बिहार में फर्जी सर्टिफिकेट पर लेक्चरर बनने का बड़ा खेल उजागर, ऐक्शन में शिक्षा विभाग; सभी विश्वविद्यालयों में जांच शुरू

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बिहार में फर्जी प्रमाण पत्र पर लेक्चरर बनने का बड़ा मामला सामने आया है। इसके बाद विभाग की ओर से विश्वविद्यालयों में नियुक्त सहायक प्राध्यापकों के अनुभव और दिव्यांगता समेत अन्य प्रमाण-पत्रों की जांच कराने का फैसला लिया गया है। शिक्षा विभाग और बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग दोनों ने सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को पत्र लिखा है।

इसकी जांच पूरी गंभीरता के साथ करने को निर्देशित किया है। गलत प्रमाण-पत्र पर बहाल सहायक प्राध्यापकों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जांच के बाद अनुशंसा प्राप्त होते ही गलत प्रमाण पत्र के माध्यम से नियुक्त सहायक प्राध्यापकों को नौकरी से हटाया जा सकता है।

शिक्षा विभाग के सचिव बैद्यनाथ यादव ने विश्वविद्यालयों को भेजे गए पत्र में साफ तौर पर कहा है कि विश्वविद्यालयों को अनुभव और दिव्यांगता सहित संबंधित सभी तरह के अभिलेख की जांच करानी है। विभाग को जानकारी प्राप्त हुई है कई विश्वविद्यालयों में गलत प्रमाण-पत्र के माध्यम से कुछ लोगों की नियुक्ति हो गई है।

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पत्र में बताया गया कि आयोग के स्तर से 37 विषयों में सहायक प्राध्यापकों के पद पर नियुक्त के लिए अनुंशसा प्राप्त हो चुकी है। विभागीय स्तर से 36 विषयों में प्राप्त अनुशंसा को संबंधित विश्वविद्यालयों को भेजा चुका है।इसमें नियुक्ति की प्रक्रिया भी हो चुकी है।

शिक्षा विभाग का पत्र पीयू, पीपीयू, मौलाना मजहरुल हक अरबी फारसी विश्वविद्यालय सहित लगभग विश्वविद्यालयों को प्राप्त हो चुका है। पत्र प्राप्त होने के बाद इसपर कार्रवाई भी शुरू हो चुकी है।

पाटलिपुत्र विवि के कुलसचिव प्रो. एनके झा ने बताया कि करीब दो सौ नए सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति हुई है। नव नियुक्त सहायक प्राध्यापकों के प्रमाण-पत्र की जांच का पत्र प्राप्त हो चुका है। इस पर विश्वविद्यालय ने कार्य भी शुरू कर दिया है। अलग-अलग टीम बनाकर जांच कराई जाएगी। शिक्षा विभाग के निर्देशों का पालन किया जाएगा।

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विवि में व्याख्याताओं की नियुक्ति में कई तरह का मामले उजागर हो रहे थे। अनुभव प्रमाण पत्र और दिव्यांगता प्रमाण पत्र का गलत इस्तेमाल कर नियुक्ति ली गई। कुछ फर्जी मामला पकड़ में भी आ गया है।

बीएन मंडल विवि में जांच के दौरान कई अभ्यर्थियों को पकड़ा भी गया है। इसकी रिपोर्ट धीरे-धीरे आयोग को प्राप्त हो रही है। बता दें कि अनुभव प्रमाण पत्र पर अंक निर्धारित है। एक वर्ष के अनुभव पर दो अंक मिलते हैं। अधिकतर ने दो से चार वर्षों का अनुभव प्रमाण-पत्र जमा कराया है।

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