लोहरदगा : कभी परिवार की आमदनी के लिए शराब बनाने और बेचने पर निर्भर रहने वाली ग्रामीण महिलाएं अब अपने पैरों पर खड़ी होकर सम्मानजनक आजीविका की नई कहानी लिख रही हैं। लोहरदगा के कुडू प्रखंड के चिरी गांव में फूलो झानो आशीर्वाद अभियान (पीजेएए) के तहत हुए बदलाव को देखने अमेरिका से प्रतिनिधिमंडल पहुंचा। लाइवलीहुड इम्पैक्ट फंड (एलआइएफ) की प्रतिनिधि सामंथा कार्टर और क्रिस्टीना मेंडोजा मोरा ने गांव में महिलाओं से मुलाकात कर उनके संघर्ष, बदलाव और स्वरोजगार की पूरी यात्रा को समझा। क्षेत्र भ्रमण के दौरान जेएसएलपीएस के बीपीओ व्यास यादव, टीएसओ विवेक कुमार गौतम, सीसी अरुण कुमार महतो, यदु राम, मकबूल, एफटीसी बिशेश्वर सिंह, सुग्रीव साव, गौरव, मेघा सहित नवजीवन सखी कैडर और पीजेएए की लाभुक महिलाएं मौजूद थीं।



महिलाओं ने खुद सुनाई बदलाव की कहानी
प्रतिनिधिमंडल ने पीजेएए से जुड़ी महिलाओं की समूह बैठक में भाग लिया। नवजीवन सखी के नेतृत्व में हुई बैठक में लाभुक महिलाओं ने बताया कि किस तरह अभियान से जुड़ने के बाद उन्होंने शराब निर्माण और बिक्री का काम छोड़कर वैकल्पिक आजीविका को अपनाया। नारी जागृति साथियों ने प्रतिनिधिमंडल को अभियान की कार्यप्रणाली की जानकारी दी। इसमें लाभुकों की पहचान से लेकर बेसलाइन सर्वे, आजीविका योजना तैयार करना, ब्याजमुक्त ऋण उपलब्ध कराना, सरकारी योजनाओं से जोड़ना और मोबाइल एप के जरिए लाभुकों की गतिविधियों की निगरानी शामिल है।

20 हजार के ऋण से शुरू हुई नई पारी
प्रतिनिधिमंडल ने केवल बैठक तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि महिलाओं के घर और उनके कारोबार को भी करीब से देखा। सरस्वती कुमारी ने बताया कि पीजेएए के तहत मिले 20 हजार रुपये के ब्याजमुक्त ऋण से उन्होंने नाश्ते की दुकान शुरू की। छोटे स्तर से शुरू हुआ यह कारोबार अब उनके परिवार की नियमित आमदनी का आधार बन चुका है। सरस्वती के अनुसार आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ उनमें निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी बढ़ा है।

इसी तरह बबीता देवी ने 25 हजार रुपये के ब्याजमुक्त ऋण से किराना दुकान शुरू की। गांव में ही कारोबार होने से उन्हें नियमित आमदनी मिल रही है और वह परिवार की जरूरतों में आर्थिक सहयोग कर रही हैं। दोनों महिलाओं ने बताया कि अभियान ने उन्हें केवल कर्ज नहीं दिया, बल्कि अपनी पहचान बनाने और सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर दिया।

सिर्फ रोजगार नहीं, जिंदगी बदल रहा अभियान
एलआइएफ प्रतिनिधियों ने महिलाओं की उपलब्धियों और सामुदायिक स्तर पर उनके नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि पीजेएए का प्रभाव रोजगार तक सीमित नहीं है। यह महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ उनके सामाजिक सम्मान और परिवार की आर्थिक स्थिति में भी बदलाव ला रहा है। ग्रामीण स्तर पर महिलाओं द्वारा खड़े किए गए छोटे उद्यम इस परिवर्तन का प्रत्यक्ष उदाहरण हैं।







