MMDR के खिलाफ कांग्रेस का आर-पार का आंदोलन, झारखंड के खनिज अधिकार छीनने की साजिश बर्दाश्त नहीं, प्रदेश महासचिव आलोक दूबे का बयान

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September 4, 2026

MMDR के खिलाफ कांग्रेस का आर-पार का आंदोलन, झारखंड के खनिज अधिकार छीनने की साजिश बर्दाश्त नहीं, प्रदेश महासचिवआलोक दूबे का बयान

DESK: झारखंड के खनिज संसाधनों और राज्य के आर्थिक अधिकारों को सीमित करने वाले Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Act, 2026 के खिलाफ प्रदेश कांग्रेस ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है। प्रदेश कांग्रेस महासचिव सह लोहरदग्गा प्रभारी आलोक कुमार दूबे ने आज लोहरदग्गा में प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि झारखंड की धरती से खनिज निकालकर देश का विकास करने वालों को यह भी समझना होगा कि खनिज संपदा पर पहला और न्यायसंगत अधिकार उस राज्य और उसके लोगों का है, जिसकी जमीन, जंगल और पर्यावरण इसकी कीमत चुका रहे हैं।

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उन्होंने कहा कि 7 सितंबर को महामहिम राज्यपाल के समक्ष विराट रैली एवं प्रदर्शन किया जाएगा। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के. राजू एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के नेतृत्व में राज्यभर से हजारों कांग्रेस कार्यकर्ता रांची पहुंचेंगे। रैली में कांग्रेस कोटे के सभी मंत्री, विधायक, पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक, जिला कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष, प्रदेश पदाधिकारी और मोर्चा संगठनों के पदाधिकारी शामिल होंगे। इसके बाद 9 से 16 सितंबर तक राज्य के सभी प्रखंड मुख्यालयों पर धरना एवं प्रदर्शन किया जाएगा।

आलोक कुमार दूबे ने कहा कि झारखंड कोई खनिज कॉलोनी नहीं है, जिसे केवल देश के उद्योगों के लिए कच्चा माल उपलब्ध कराने के लिए इस्तेमाल किया जाए। झारखंड आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार राज्य में 91,812 मिलियन टन कोयला और 4.71 बिलियन टन लौह अयस्क संसाधन हैं। वर्ष 2023-24 में राज्य के रिपोर्टेड खनिज उत्पादन का मूल्य करीब ₹57,963 करोड़ था, जिसमें अकेले लौह अयस्क का मूल्य ₹54,829 करोड़ रहा। सवाल यह है कि इतनी विशाल खनिज संपदा वाले झारखंड के राजस्व और आर्थिक अधिकारों को कमजोर करने की जरूरत केंद्र सरकार को क्यों महसूस हुई?

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उन्होंने कहा कि MMDR Amendment Act, 2026 की धारा 9D राज्यों की खनिज अधिकारों अथवा खनिज-युक्त भूमि पर टैक्स, सेस और अन्य लेवी लगाने की शक्ति को केंद्र द्वारा निर्धारित शर्तों और सीमाओं से बांधती है। यह केवल कानून की एक धारा नहीं, बल्कि राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता और संघीय ढांचे से जुड़ा गंभीर सवाल है।

दूबे ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर Mineral Bearing Land Cess से झारखंड को लगभग ₹7,110 करोड़ सालाना संभावित राजस्व का उल्लेख किया है। यदि राज्य को अपने खनिज-युक्त भूभाग से न्यायसंगत राजस्व जुटाने का अधिकार ही सीमित कर दिया जाएगा तो झारखंड अपने गरीब, आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए संसाधन कहां से जुटाएगा?

उन्होंने कहा कि खनन का सबसे बड़ा दुष्प्रभाव झारखंड झेलता है—विस्थापन, प्रदूषण, जंगलों का नुकसान, जलस्रोतों पर दबाव और स्थानीय आधारभूत संरचना पर अतिरिक्त बोझ। खनिज बाहर जाएगा, मुनाफा बाहर जाएगा और अगर राजस्व के अधिकार भी केंद्र नियंत्रित करेगा तो झारखंड के हिस्से में आखिर क्या बचेगा?

प्रदेश कांग्रेस महासचिव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की 2024 की नौ-न्यायाधीशों की संविधान पीठ के फैसले के बाद राज्यों के खनिज अधिकारों और mineral-bearing land पर कराधान की शक्ति को लेकर महत्वपूर्ण संवैधानिक व्यवस्था सामने आई थी। ऐसे समय में MMDR संशोधन के जरिए राज्यों की शक्तियों को सीमित करने का प्रयास संघीय ढांचे पर सीधा सवाल खड़ा करता है।

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चंदा चोरी के मुद्दे पर भी केंद्र सरकार को घेरते हुए आलोक कुमार दूबे ने कहा कि एक तरफ झारखंड के खनिज और राजस्व अधिकारों पर नियंत्रण की कोशिश हो रही है और दूसरी तरफ राजनीतिक चंदे की व्यवस्था में पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल हैं। उन्होंने कहा कि जनता जानना चाहती है कि राजनीतिक दलों को मिलने वाले हजारों करोड़ रुपये के चंदे का स्रोत क्या है, किन कंपनियों और संस्थाओं से कितना धन मिला और उसके बदले सत्ता के स्तर पर क्या लाभ पहुंचाया गया।

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उन्होंने कहा कि खनिज पर झारखंड का अधिकार और राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता—दोनों जनता के लोकतांत्रिक अधिकार हैं। कांग्रेस इन दोनों मुद्दों को लेकर सड़क पर उतरेगी और केंद्र सरकार को जनता के सवालों का जवाब देना होगा।

दूबे ने स्पष्ट कहा कि 7 सितंबर की रैली महज विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि झारखंड के अधिकारों की निर्णायक लड़ाई का शंखनाद होगी। केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा पर राज्य के अधिकार और वित्तीय स्वायत्तता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। जरूरत पड़ी तो आंदोलन को गांव-गांव और प्रखंड-प्रखंड तक ले जाकर इसे व्यापक जनआंदोलन बनाया जाएगा।

आलोक कुमार दूबे ने कहा कि बॉक्साइट नगरी लोहरदगा से जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुखेर भगत के साथ स्थानीय विधायक डॉ. रामेश्वर उरांव, सांसद सुखदेव भगत सहित कांग्रेस के तमाम बड़े नेता 7 सितंबर को होने वाले धरना एवं प्रदर्शन में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि लोहरदगा की खनिज संपदा केवल खनन कंपनियों के मुनाफे का साधन नहीं, बल्कि वहां की जनता और पूरे झारखंड के विकास का अधिकार है। इसलिए लोहरदगा से भी बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता रांची पहुंचकर केंद्र की खनिज नीति के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करेंगे।

मीडिया के एक सवाल के जवाब में आलोक कुमार दूबे ने कहा कि अगर भाजपा ने खनिज कानून के नाम पर झारखंड की जनता के साथ बेईमानी की और राज्य के आर्थिक अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास किया तो आने वाले समय में झारखंड की जनता भाजपा को राजनीतिक रूप से नेस्तनाबूद कर देगी और उसका पूरी तरह सफाया कर देगी। उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता अपने जल, जंगल, जमीन और खनिज पर किसी का अधिकार छीनने नहीं देगी।

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भाजपा नेताओं बाबूलाल मरांडी और आदित्य साहू पर निशाना साधते हुए दूबे ने कहा, “बाबूलाल मरांडी और आदित्य साहू पहले दिल्ली दरबार की राजनीति छोड़कर झारखंड के खनिज और राजस्व अधिकारों पर अपना स्पष्ट स्टैंड बताएं, वरना जनता के सवालों से बचना उनके लिए मुश्किल होगा और जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेगी।”

लोहरदग्गा जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुखेर भगत ने कहा कि बॉक्साइट नगरी लोहरदगा से स्थानीय विधायक डॉ. रामेश्वर उरांव, सांसद सुखदेव भगत सहित कांग्रेस के तमाम बड़े नेता 7 सितंबर को होने वाले धरना एवं प्रदर्शन में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि लोहरदगा की खनिज संपदा केवल खनन कंपनियों के मुनाफे का साधन नहीं, बल्कि यहां की जनता और पूरे झारखंड के विकास का अधिकार है। इसलिए लोहरदगा से भी बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता रांची पहुंचकर केंद्र की खनिज नीति के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करेंगे।उन्होंने कहा प्रदेश कांग्रेस के निर्देशानुसार 9 सितंबर से 16 सितंबर तक प्रखंडों में धरना एवं प्रदर्शन को सफल बनाया जाएगा। संवाददाता सम्मेलन में जिला कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष सुखेर भगत,कांग्रेस नेता संदीप कुमार, प्रकाश उरांव,मुजम्मिल हसन, संतोष कुमार महतो मुख्य रूप से शामिल रहे।

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