लोहरदगा : प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितता को लेकर उठे सवालों के बीच झारखंड सरकार के परीक्षा रद करने के फैसले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद धीरज प्रसाद साहू ने सरकार के निर्णय का स्वागत करते हुए इसे राज्य के लाखों अभ्यर्थियों के हित में महत्वपूर्ण कदम बताया है। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामले में सरकार ने छात्रों की आवाज को गंभीरता से लिया है।
साहू ने कहा कि जेएसएससी एवं सीजीएल सहित टीडीपीएल के माध्यम से आयोजित परीक्षाओं को रद करने का फैसला केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं है, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में अभ्यर्थियों के भरोसे को बनाए रखने की कोशिश है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में युवा वर्षों तक मेहनत करते हैं। परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठने से उनकी मेहनत और भविष्य दोनों प्रभावित होते हैं। ऐसे में निष्पक्ष व्यवस्था सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
अनियमितता पर सरकार का रुख स्पष्ट
पूर्व सांसद ने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितता, भ्रष्टाचार या पारदर्शिता की कमी की शिकायतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में लिया गया निर्णय यह संदेश देता है कि सरकार योग्य अभ्यर्थियों के साथ न्याय करने के लिए कठिन फैसला लेने से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में योग्यता और पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

जेपीएससी के फैसलों का भी दिया हवाला
धीरज साहू ने कहा कि सरकार पहले 14वीं जेपीएससी तथा बैकलॉग की दो परीक्षाओं को रद करने का निर्णय ले चुकी है। अब जेएसएससी और अन्य परीक्षाओं को लेकर उठाया गया कदम भी उसी दिशा में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आगामी परीक्षाओं के लिए ऐसी व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है, जिसमें प्रश्नपत्र से लेकर परीक्षा संचालन और परिणाम तक हर स्तर पर कड़ी निगरानी हो।
युवाओं के भविष्य से बड़ा कोई मुद्दा नहीं
उन्होंने कहा कि रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाएं राज्य के युवाओं से सीधे जुड़ा विषय है। किसानों की समस्या हो या रोजगार का सवाल, सरकार को जनभावनाओं के अनुरूप संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेना चाहिए। युवाओं के भविष्य को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। साहू ने छात्रों और अभ्यर्थियों से संयम बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि परीक्षा रद होने से अभ्यर्थियों को असुविधा जरूर होगी, लेकिन नई प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी हो, यह अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगे होने वाली परीक्षाओं में सख्त निगरानी के साथ ऐसी व्यवस्था लागू होगी, जिससे मेहनती और योग्य अभ्यर्थियों को उनका अधिकार मिल सके। उनके अनुसार, पारदर्शी भर्ती व्यवस्था से युवाओं का शासन और परीक्षा प्रणाली पर भरोसा मजबूत होगा।






