डेस्कः अमेरिका में अडानी ग्रुप पर लंबे समय से मंडरा रहा कानूनी संकट काफी हद तक खत्म हो सकता है। ब्लूमबर्ग ने दावा किया है कि मुताबिक, अमेरिकी न्याय विभाग उनके खिलाफ चल रहे 265 मिलियन डॉलर (करीब 2,500 करोड़ रुपए) के रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी के आपराधिक आरोपों को वापस लेने की तैयारी कर रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस सप्ताह तक यह कानूनी मामला खत्म किया जा सकता है। अडाणी ग्रुप करीब डेढ़ साल से कानूनी उलझनों का सामना कर रहे हैं।
अमेरिकी न्याय विभाग में मुक़दमे को वापस लेने से जुड़ी न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में क्या कहा गया है, यह जानने से पहले यह जान लें कि आख़िर पूरा मामला क्या है। 2024 के नवंबर में अमेरिका के ब्रुकलिन के संघीय अभियोजकों ने गौतम अडानी, उनके भतीजे सागर अडानी और अडानी ग्रीन के एक अधिकारी पर आरोप लगाया था। आरोप था कि उन्होंने 25 करोड़ डॉलर यानी क़रीब 2650 करोड़ रुपये की रिश्वत देकर भारत में सोलर पावर प्रोजेक्ट्स हासिल किए। इसके साथ ही इस साज़िश को छिपाकर अमेरिकी निवेशकों से 17.5 करोड़ डॉलर जुटाए। अमेरिकी अभियोजकों ने इसे ‘भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी’ का मामला बताया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, अदाणी ने हाल में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रप के निजी वकील रॉबर्ट गिउफ्रा के नेतृत्व में नई टीम नियुक्ति की है। हाल में वॉशिंगटन स्थित न्याय विभाग मुख्यालय में एक बैठक में गिउफ्रा ने करीब 100 स्लाइड्स के जरिए दलील दी कि अदाणी के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं। बैठक में अदाणी की ओर से कहा गया कि यदि आरोप हटाए जाते हैं तो वे अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 95 हजार करोड़ निवेश और 15 हजार नौकरियां पैदा करने को तैयार हैं। हालांकि, अभियोजन ने बाद में कहा कि यह निवेश केस के फैसले में भूमिका नहीं निभाएगा। बता दें कि बाइडेन के कार्यकाल में नवंबर, 2024 में अदाणी पर केस हुआ था।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि अदाणी के खिलाफ मामला वापस लेने के लिए ही पीएम नरेंद्र मोदी ने अमेरिका से भारतीय हितों के प्रतिकूल ट्रेड डील की थी। ऑपरेशन सिंदूर को भी इसलिए अचानक रोका था।
Compromised PM ने trade deal नहीं, अडानी की रिहाई का सौदा किया।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) May 15, 2026
रिपोर्ट के अनुसार अडानी के मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि प्रॉसिक्यूटर अडानी पर से केस इसलिए वापस नहीं ले रहे हैं क्योंकि वे उन्हें कोई राजनीतिक फ़ायदा पहुँचाना चाहते हैं; जिनका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ काफ़ी करीबी संबंध हैं। इसके बजाय, उनमें से एक व्यक्ति ने कहा कि केस को खारिज करने का यह फ़ैसला, विदेशी रिश्वतखोरी के मामलों से ट्रंप प्रशासन के पीछे हटने की व्यापक नीति को दिखाता है।
किन लोगों के नाम शामिल थे?
इसमें गौतम अडाणी के अलावा सागर अडाणी, अडाणी ग्रीन एनर्जी के पूर्व CEO विनीत जैन, और एज़्योर पावर ग्लोबल के पूर्व अधिकारी रंजीत गुप्ता और रूपेश अग्रवाल शामिल थे। साथ ही कनाडाई निवेशक CDPQ से जुड़े सिरिल कैबनेस का नाम भी इसमें था।ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (SEC) भी नवंबर 2024 में अडाणी और अन्य के खिलाफ दायर किए गए पैरेलल 'सिविल फ्रॉड केस' को सेटलमेंट के जरिए हल करने की दिशा में बढ़ रहा है।


