रांचीः शुक्रवार को 1997 से जुड़े बहुचर्चित चारा घोटाले के मामले में न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत ने अहम फैसला सुनाया। CBI की विशेष अदालत ने चार अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए तीन-तीन साल की सजा सुनाई है।साथ ही सभी दोषियों पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है। वहीं साक्ष्य के अभाव में तीन आरोपियों को बरी कर दिया गया। सजा पाने वालों में मुख्य रूप से ट्रांसपोर्टर विनय कुमार सिन्हा, आशीष मैटे, राजकुमार राय और रंजन प्रधान शामिल हैं। अदालत ने इन सभी पर आर्थिक दंड भी लगाया है।
लोक अभियोजक ने पेश किए थे 35 गवाह
सिविल कोर्ट के अधिवक्ता संजय कुमार के अनुसार, यह मामला लंबे समय से अदालत में लंबित था और अब 29 साल बाद फैसला सामने आया है। यह निर्णय CBI के विशेष न्यायाधीश की अदालत ने सुनाया। CBI की ओर से विशेष लोक अभियोजक खुशबू जायसवाल ने पक्ष रखा। अभियोजन ने मामले को साबित करने के लिए 35 गवाहों की गवाही और दस्तावेजी साक्ष्य अदालत में पेश किए।
साक्ष्य के अभाव में तीन बरी, दो की ट्रायल के दौरान मौत
इस हाई-प्रोफाइल मामले में कुल नौ आरोपी ट्रायल का सामना कर रहे थे। सुनवाई के दौरान ही दो आरोपियों की मृत्यु हो गई, जबकि तीन अन्य आरोपियों- एके दास, एसएम औरंगजेब और एनसी प्रसाद को पर्याप्त सबूत न मिलने के कारण अदालत ने बरी कर दिया। CBI की ओर से लोक अभियोजक खुशबू जायसवाल ने 35 गवाहों को पेश कर भ्रष्टाचार की कड़ियों को साबित किया।
फर्जी सप्लाई दिखाकर राशि की हुई थी निकासी
अभियोजन के मुताबिक, अलकतरा सप्लाई के तीन ऑर्डरों में बड़े पैमाने पर घोटाला किया गया। हल्दिया से NH बरही तक अलकतरा की आपूर्ति बरौनी के रास्ते होनी थी, लेकिन फर्जी सप्लाई दिखाकर सरकारी राशि की निकासी कर ली गई।जांच में सामने आया कि तय मात्रा से कम आपूर्ति दिखाकर फर्जी बिल बनाए गए। ट्रांसपोर्टर द्वारा बरौनी में रिपोर्टिंग भी नहीं की गई और फर्जी भाड़ा बिल जमा किया गया। मामला सामने आने के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर CBI ने केस नंबर 12/97 दर्ज कर जांच शुरू की थी।



