मंगल पांडे को सम्राट कैबिनेट में नहीं मिली जगह, मैथिली ठाकुर विधानसभा में जवाब से नहीं हुई थी संतुष्ट

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May 7, 2026

मंगल पांडे को सम्राट कैबिनेट में नहीं मिली जगह, मैथिली ठाकुर ने विधानसभा में जवाब से नहीं हुई थी संतुष्ट

पटनाः बिहार में सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल का गुरुवार को विस्तार हो गया। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत के साथ-साथ 42 नए मंत्रियों ने शपथ ली, इनमें चार महिलाएं शामिल थी। इस बार नीतीश कैबिनेट में मंत्री रहे तीन मंत्रियों की छुट्टी हो गई जिसमें सबसे बड़ा नाम मंगल पांडे का है, वो उन चुनिंदा नेताओं में थे जो एनडीए के हर सरकार में मंत्री बनते थे। मंगल पांडे के साथ साथ नारायण प्रसाद और सुरेंद्र मेहता की सम्राट कैबिनेट से पत्ता साफ हो गया।

मंगल पांडे के पत्ता कटने के पीछे मैथिली ठाकुर!

मंगल पांडे 2025 में पहली बार विधायक चुन कर आये और सीवान सीट से जीत के बाद वो नीतीश कैबिनेट में मंत्री बने, इससे पहले वो विधानपरिषद के सदस्य हुआ करते थे और कैबिनेट में उनकी जगह पक्की रहती थी। नीतीश कुमार की सरकार में वो स्वास्थ्य मंत्री हुआ करते थे। इसी साल फरवरी में हुए बजट सत्र के दौरान मशहूर लोक गायिका और बीजेपी विधायक मैथिली ठाकुर ने अपने विधानसभा क्षेत्र के अस्पताल की बदहाली का मुद्दा उठाया था। इस पर स्वास्थ्य मंत्री के द्वारा दिए जवाब से संतुष्ट नहीं थी और उसी मंत्री मंगल पांडेय का पत्ता कट गया है।मंगल पांडेय 2017 से लेकर 2022 तक स्वास्थ्य मंत्री रहे। तब मंगल पांडेय को पहली बार कैबिनेट में शामिल किया गया था। मंगल पांडेय 2024 से लेकर 2025 तक दूसरी बार मंत्री बने। इस बार स्वास्थ्य मंत्री और कृषि मंत्री की जिम्मेदारी संभाली। साल 2025 में जब एनडीए की सरकार बनी तो फिर से मंत्री बने और उन्हें स्वास्थ्य मंत्रालय का जिम्मा मिला, लेकिन सम्राट चौधरी के अगुवाई वाले मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल सकी।

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स्वास्थ्य मंत्री से मैथिली ठाकुर ने किया सवाल

2025 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के टिकट पर मशहूर लोक गायिका मैथिली ठाकुर बीजेपी से विधायक चुनी गई।मैथिली ठाकुर ने बजट सत्र के दौरान अपने निर्वाचन क्षेत्र में अस्पताल की इमारत की हालत का मुद्दा उठाया था और कहा था कि यह इतनी जर्जर है कि एक बड़ी दुर्घटना का खतरा मंडरा रहा है।उन्होंने कहा था कि छत से प्लास्टर लगातार गिर रहा है, दीवारों में गहरी दरारें हैं और बरसात के मौसम में वार्डों में पानी रिसता है, जो लोगों की जिंदगी लिए सीधा खतरा है।

मैथिली ठाकुर ने सवाल उठाया था कि बिहार सरकार द्वारा हर साल स्वास्थ्य बजट बढ़ाने के बाद अस्पतालों की इमारतें इतनी खराब हालत में क्यों हैं? उन्होंने कहा Le कि डॉक्टरों और दवाओं की कमी एक समस्या है,लेकिन इससे भी बड़ा खतरा जर्जर इमारतें हैं, जो कभी भी गिर सकती हैं।क्या सरकार नए भवनों के निर्माण से पहले किसी बड़ी दुर्घटना के होने का इंतजार कर रही है।

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मंगल पांडेय के जवाब से संतुष्ट नहीं मैथिली

बीजेपी विधायक मैथिली ठाकुर के सवालों का जवाब देते हुए तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा था कि राज्य सरकार अस्पतालों की इमारतों को लेकर गंभीर है। कई अस्पतालों के लिए नई बिल्डिंग को मंजूरी दे दी गई है और कुछ जगह पर काम जारी है। हालांकि, मंत्री के जवाब से मैथिली ठाकुर संतुष्ट नहीं हुईं। उन्होंने सदन में ही तुरंत हस्तक्षेप करते हुए कहा कि उनके इलाके का अस्पताल कई सालों से लिस्ट में है, लेकिन आज तक न मरम्मत का काम शुरू हुआ है और न ही नई इमारत बनी है।

उन्होंने कहा था कि कागजों पर जो ‘सब ठीक’ बताया जा रहा है, धरातल पर सच्चाई उसके ठीक उलट है।मैथिली ठाकुर ने कहा था कि हर साल सिर्फ योजना बनाने और मंजूरी देने की बात होती है, लेकिन जमीनी हकीकत वही रहती है।उन्होंने यह भी कहा कि मरीज और उनके परिवार डर के साये में इलाज कराने के लिए मजबूर हैं। मैथिली ठाकुर के बार-बार पूछे गए सवालों के बाद सदन का माहौल कुछ देर के लिए गरमा गया था। तीन महीने के बाद ही बिहार में सत्ता परिवर्तन हुआ और सम्राट चौधरी के अगुवाई में कैबिनेट गठन किया तो मंगल पांडेय को जगह नहीं मिली।

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