डेस्कः बहरागोड़ा थाना क्षेत्र के पानीपड़ा- नागुड़साइर्द में स्वर्णरेखा नदी के तट पर मिले विशालकाय बम से आसपास के लोग कई दिनों से दहशत में है। इस बम का वजन करीब 227 किलो है। सोमवार को रांची से भारतीय सेना की एक विशेष टीम कैप्टन आयुष कुमार सिंह के नेतृत्व में पहुंची। टीम ने बम की वैज्ञानिक जांच की। सुरक्षा के दृष्टिकोण से ड्रोन कैमरों के जरिये आसपास के रिहायशी इलाकों की दूरी और भागौलिक स्थिति का आकलन किया।

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कैप्टन आयुष कुमार सिंह ने घाटशिला एसडीपीओ अजीत कुमार कुजूर को बताया कि शुरुआती जांच में यह जिंदा बम प्रतीत होता है। सेना की टीम इस बात की गहन अध्यनन कर रही है कि इस विस्फोटक की मारक क्षमता कितनी बड़ी हो सकती है। कैप्टन ने बताया कि इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट सैन्य मुख्यालय के वरीय अधिकारियों को सौंपी जायेगी। इसके बाद उनके दिशा-निर्देश पर बम को डिफ्यूज करने की अगली कार्रवाई सुनिश्चित की जायेगी।

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एक और संदिग्ध वस्तु मिलने से बढ़ी सतर्कता
इसी बीच गांव में विशेश्वर सेनापति के घर के सामने मिट्टी में दबा एक और संदिग्ध लोहे का सिलेंडरनुमा वस्तु मिलने से सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और बढ़ गई है। पुलिस ने सावधानीपूर्वक उसे बाहर निकालकर नदी किनारे सुरक्षित स्थान पर रख दिया है। उसकी भी जांच की जा रही है।
द्वितीय विश्व युद्ध से कनेक्शनः स्थानीय बुजुर्गो के अनुसार, यह बम लगभग 50 वर्ष पूर्व द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान विमानों से गिराये गये थे। उस समय स्वर्णरेखा नदी में लगभग 30 से 40 की संख्या में ऐसे बम गिराये गये थे। पूर्व में एक विशेष टीम ने आकर अधिकतर बमों से बारूद निकाल लिया था, लेकिन जो बम उस समय बालू या मिट्टी के नीचे दब ये थे, वे अब धीरे-धीरे बाहर आ रहे है।







