नई दिल्लीः वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में बजट भाषण शुरू कर दिया है। वित्त मंत्री ने घरेलू निर्माण, ऊर्जा सुरक्षा, गरीबी उन्मूलन से लेकर रोजगार की बातों पर जोर दिया। यह पहली बार है जब रविवार को बजट पेश हो रहा है।
- 📌 औद्योगिक, विनिर्माण एवं प्रौद्योगिकी नीति : प्रमुख प्रस्ताव (Pointers)
- 1️⃣ भारत सेमीकंडक्टर मिशन
- 2️⃣ इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम
- 3️⃣ दुर्लभ पृथ्वी स्थायी चुंबक (Rare Earth Permanent Magnets) योजना
- 4️⃣ रसायन (Chemical) क्षेत्र में आत्मनिर्भरता
- 5️⃣ कैपिटल गुड्स (Capital Goods) क्षमता सुदृढ़ीकरण
- 6️⃣ कंटेनर विनिर्माण योजना
- 7️⃣ श्रम-प्रधान वस्त्र (टेक्सटाइल) क्षेत्र : समेकित कार्यक्रम
- 📌 एमएसएमई, हस्तशिल्प, खेल सामग्री एवं औद्योगिक पुनरुद्धार : प्रमुख प्रस्ताव
- 1️⃣ खादी, हथकरघा एवं हस्तशिल्प का सशक्तिकरण
- 2️⃣ खेल सामग्री (Sports Goods) क्षेत्र के लिए समर्पित पहल
- 3️⃣ विरासत औद्योगिक क्लस्टरों का पुनरुद्धार
- 4️⃣ चैंपियन एसएमई का निर्माण एवं सूक्ष्म उद्यमों का समर्थन
- (क)️⃣ इक्विटी समर्थन (Equity Support)
- (ख)️⃣ तरलता (Liquidity) समर्थन
- 📌 एमएसएमई, पेशेवर सहयोग एवं अवसंरचना : प्रमुख प्रस्ताव (जारी)
- 4️⃣ व्यापार देयकों (Trade Receivables) का प्रतिभूतिकरण
- 5️⃣ पेशेवर सहयोग एवं क्षमता निर्माण
- 6️⃣ अवसंरचना (Infrastructure) विकास को गति
- 7️⃣ सार्वजनिक पूंजीगत व्यय में निरंतर वृद्धि
- 8️⃣ इन्फ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड
- सात शहरों को जोड़ने के लिए हाई स्पीड रेल योजना
- 📌 बैंकिंग, वित्तीय बाज़ार एवं निवेश सुधार : प्रमुख प्रस्ताव
- 1️⃣ विकसित भारत के लिए बैंकिंग
- 2️⃣ एनबीएफसी (NBFCs) क्षेत्र के लिए दृष्टि
- 3️⃣ विदेशी निवेश ढांचे का आधुनिकीकरण
- 4️⃣ कॉरपोरेट बॉन्ड बाज़ार का सुदृढ़ीकरण
- 5️⃣ म्युनिसिपल बॉन्ड (नगर निगम बॉन्ड) को प्रोत्साहन
- 6️⃣ ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस : निवेश नियमों में सुधार
- 📌 उभरती प्रौद्योगिकियाँ एवं समावेशी विकास
- 📌 दूसरा कर्तव्य : आकांक्षाओं की पूर्ति एवं क्षमता निर्माण
- 📌 सेवा क्षेत्र के लिए संस्थागत ढांचा
- 📌 कौशल-आधारित करियर पाथवे : स्वास्थ्य क्षेत्र पर विशेष फोकस
- 4️⃣ एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स (AHPs)
- 5️⃣ केयर इकोसिस्टम का सुदृढ़ीकरण
- 6️⃣ मेडिकल वैल्यू टूरिज़्म के लिए विशेष हब
- 📌 स्वास्थ्य, आयुष, पशुपालन एवं सृजनात्मक अर्थव्यवस्था : प्रमुख प्रस्ताव
- 1️⃣ क्षेत्रीय मेडिकल हब
- 2️⃣ योग एवं आयुर्वेद को वैश्विक बढ़ावा
- 3️⃣ पशुपालन क्षेत्र का सुदृढ़ीकरण
- 4️⃣ ऑरेंज इकोनॉमी : ABGC सेक्टर
- 5️⃣ डिज़ाइन शिक्षा का विस्तार
- 📌 शिक्षा, विज्ञान, पर्यटन एवं पर्यावरण संरक्षण : प्रमुख प्रस्ताव
- 1️⃣ शिक्षा : शैक्षणिक अवसंरचना का विस्तार
- 2️⃣ उच्च शिक्षा में छात्राओं के लिए सुविधाएँ
- 3️⃣ खगोल भौतिकी एवं खगोल विज्ञान का संवर्धन
- 4️⃣ पर्यटन : कौशल, संस्थान और रोजगार
- 5️⃣ पर्यटन गाइडों का कौशल उन्नयन
- 6️⃣ राष्ट्रीय गंतव्य डिजिटल ज्ञान ग्रिड
- 7️⃣ प्रकृति एवं इको-टूरिज़्म पहल
- 8️⃣ अंतरराष्ट्रीय बिग कैट संरक्षण
- 📌 वैश्विक संरक्षण, पर्यटन, खेल एवं समावेशी ग्रामीण विकास : प्रमुख प्रस्ताव
- 1️⃣ वैश्विक बिग कैट शिखर सम्मेलन
- 2️⃣ विरासत एवं सांस्कृतिक पर्यटन का विकास
- 3️⃣ खेल क्षेत्र : खेलो इंडिया मिशन
- 4️⃣ तीसरा कर्तव्य : सबका साथ, सबका विकास की दिशा में विकसित भारत
- 5️⃣ मत्स्य पालन का समेकित विकास
- 6️⃣ पशुपालन क्षेत्र में उद्यमिता को बढ़ावा
- 7️⃣ उच्च-मूल्य कृषि फसलों को समर्थन
- 8️⃣ नारियल संवर्धन योजना
- 9️⃣ काजू एवं कोको के लिए समर्पित कार्यक्रम
- 🔟 चंदन (सैंडलवुड) इकोसिस्टम का पुनरुद्धार
- 1️⃣1️⃣ बागवानी एवं मेवा फसलें
- 1️⃣2️⃣ भारत विस्तार (Bharat Vistar)
- ग्रामीण महिला उद्यमिता : “श्री मार्ट्स”
- दिव्यांगजन सशक्तिकरण
- दिव्यांग सहारा योजना
- मानसिक स्वास्थ्य और ट्रॉमा केयर
- सीमावर्ती और पूर्वोत्तर क्षेत्रों पर विशेष फोकस
- राजकोषीय समेकन (Fiscal Consolidation)
- सरकारी वित्तीय आँकड़े
- बजट अनुमान (BE) 2026-27
- 🧾 नया आयकर अधिनियम
- 🏡 ईज़ ऑफ लिविंग (Ease of Living)
- 🌍 एकमुश्त विदेशी संपत्ति प्रकटीकरण योजना (6 माह)
- ⚖️ दंड और अभियोजन का युक्तिकरण
- 🤝 सहकारिताएँ (Cooperatives)
- 💻 आईटी सेक्टर – भारत का ग्रोथ इंजन
- 🧾 नया आयकर अधिनियम
- 🏡 ईज़ ऑफ लिविंग
- 🌍 एकमुश्त विदेशी संपत्ति प्रकटीकरण (6 माह)
- ⚖️ दंड व अभियोजन का युक्तिकर
- 🤝 सहकारिताएँ
- 💻 आईटी सेक्टर
- ✅ नया टैक्स रेजीम और MAT (Minimum Alternate Tax)
- 🧾 अप्रत्यक्ष कर (Indirect Taxes): उद्देश्य
- 🏭 कस्टम ड्यूटी छूट में सुधार
- 📦 सेक्टर-वाइज कस्टम्स प्रस्ताव
- 🐟 समुद्री, लेदर और टेक्सटाइल
- 🔋 ऊर्जा परिवर्तन और सुरक्षा
- ⚛️ परमाणु ऊर्जा
- 🪨 क्रिटिकल मिनरल्स
- ♻️ बायोगैस-मिश्रित CNG
- ✈️ सिविल और डिफेंस एविएशन
- 📱 इलेक्ट्रॉनिक्स
- 🏗️ विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ)
- 🧑⚕️ Ease of Living: आम नागरिकों को राहत
भारत में रोगों का स्वरूप तेज़ी से बदल रहा है। अब देश में *गैर-संचारी रोगों* (Non-Communicable Diseases) जैसे *डायबिटीज़, कैंसर और ऑटोइम्यून बीमारियों* का बोझ लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में *जैविक दवाएँ (Biologics)* लंबी उम्र और बेहतर जीवन गुणवत्ता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, बशर्ते वे *सस्ती और सुलभ* हों।
भारत को *वैश्विक बायोफार्मा मैन्युफैक्चरिंग हब* के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से मैं *“बायोफार्मा शक्ति”* पहल का प्रस्ताव करती हूँ। इसके अंतर्गत अगले *पाँच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये* का निवेश किया जाएगा।
इस पहल का उद्देश्य होगा:
• देश में *जैविक दवाओं (Biologics)* के घरेलू उत्पादन के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना
• उन्नत मैन्युफैक्चरिंग क्षमता विकसित करना
• अनुसंधान एवं विकास (R&D) को बढ़ावा देना
• कुशल मानव संसाधन और आधुनिक तकनीक को प्रोत्साहित करना
• भारत को किफायती और उच्च-गुणवत्ता वाली बायोलॉजिक दवाओं का वैश्विक केंद्र बनाना
*बायोफार्मा शक्ति* के माध्यम से भारत न केवल अपनी स्वास्थ्य ज़रूरतों को बेहतर ढंग से पूरा करेगा, बल्कि दुनिया के लिए भी भरोसेमंद और किफायती बायोलॉजिक दवाओं का प्रमुख आपूर्तिकर्ता बन सकेगा।
ज़रूर। नीचे दिए गए पाठ को नीति/बजट भाषण/विजन डॉक्यूमेंट की शुद्ध, औपचारिक और प्रभावी हिंदी में स्पष्ट पॉइंटर्स के रूप में संरचित किया गया है:
📌 औद्योगिक, विनिर्माण एवं प्रौद्योगिकी नीति : प्रमुख प्रस्ताव (Pointers)
1️⃣ भारत सेमीकंडक्टर मिशन
- भारत सेमीकंडक्टर मिशन 1.0 के माध्यम से देश की सेमीकंडक्टर क्षमताओं का विस्तार और आपूर्ति शृंखला का सुदृढ़ीकरण।
- आगामी चरण में उद्योग-नेतृत्व वाले अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्रों पर विशेष ध्यान।
- उन्नत तकनीक के विकास तथा कुशल मानव संसाधन के निर्माण को प्राथमिकता।
2️⃣ इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम
- अप्रैल 2025 में ₹22,919 करोड़ के परिव्यय के साथ प्रारंभ योजना को मजबूत निवेश समर्थन प्राप्त।
- योजना के लक्ष्यों को दोगुना किया गया।
- सकारात्मक गति को बनाए रखने हेतु परिव्यय बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ करने का प्रस्ताव।
3️⃣ दुर्लभ पृथ्वी स्थायी चुंबक (Rare Earth Permanent Magnets) योजना
- नवंबर 2025 में प्रारंभ योजना का विस्तार।
- ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे खनिज-समृद्ध राज्यों को विशेष समर्थन।
- इन राज्यों में समर्पित रेयर अर्थ कॉरिडोर की स्थापना का प्रस्ताव।
- कॉरिडोर के माध्यम से:
- खनन
- प्रसंस्करण
- अनुसंधान
- विनिर्माण
को समग्र रूप से बढ़ावा।
4️⃣ रसायन (Chemical) क्षेत्र में आत्मनिर्भरता
- रसायनों के घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहन और आयात निर्भरता में कमी।
- नई योजना की शुरुआत।
- राज्यों को चैलेंज रूट के माध्यम से चयन।
- क्लस्टर-आधारित, प्लग-एंड-प्ले मॉडल पर:
- तीन समर्पित केमिकल पार्क स्थापित करने का प्रस्ताव।
5️⃣ कैपिटल गुड्स (Capital Goods) क्षमता सुदृढ़ीकरण
- विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादकता और गुणवत्ता बढ़ाने हेतु मजबूत कैपिटल गुड्स आधार का निर्माण।
प्रमुख प्रस्ताव:
- केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों द्वारा दो स्थानों पर हाई-टेक टूल रूम की स्थापना।
- डिजिटल रूप से सक्षम
- स्वचालित सेवा केंद्र
- उच्च-परिशुद्धता घटकों का डिज़ाइन, परीक्षण एवं निर्माण।
- उच्च-मूल्य एवं तकनीकी रूप से उन्नत पूंजीगत उपकरण (CIE) के घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन, जिनमें शामिल:
- बहुमंजिला इमारतों की लिफ्टें
- मल्टीप्लेक्स अग्निशमन उपकरण
- औद्योगिक मशीनरी (छोटी व बड़ी)
- मेट्रो व उच्च-ऊँचाई सड़कों हेतु टनल बोरिंग मशीनें।
6️⃣ कंटेनर विनिर्माण योजना
- वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के निर्माण का लक्ष्य।
- पाँच वर्षों में ₹10,000 करोड़ का बजटीय प्रावधान।
- निर्यात, लॉजिस्टिक्स और आत्मनिर्भरता को बल।
7️⃣ श्रम-प्रधान वस्त्र (टेक्सटाइल) क्षेत्र : समेकित कार्यक्रम
- रोजगार सृजन और पारंपरिक कौशल के संरक्षण हेतु समग्र वस्त्र कार्यक्रम।
- कार्यक्रम के प्रमुख घटक:
- राष्ट्रीय फाइबर योजना
- रेशम, ऊन, जूट जैसे प्राकृतिक रेशे
- मानव-निर्मित रेशे
- नए युग के उन्नत रेशों में आत्मनिर्भरता।
- टेक्सटाइल विस्तार एवं रोजगार योजना
- पारंपरिक क्लस्टरों के आधुनिकीकरण हेतु
- मशीनरी में पूंजीगत सहायता।
- प्रौद्योगिकी उन्नयन एवं गुणवत्ता अवसंरचना
- सामान्य परीक्षण एवं प्रमाणन केंद्रों की स्थापना।
- राष्ट्रीय हथकरघा एवं हस्तशिल्प कार्यक्रम
- मौजूदा योजनाओं का एकीकरण एवं सुदृढ़ीकरण।
- बुनकरों एवं कारीगरों को लक्षित और प्रभावी समर्थन।
📌 एमएसएमई, हस्तशिल्प, खेल सामग्री एवं औद्योगिक पुनरुद्धार : प्रमुख प्रस्ताव
1️⃣ खादी, हथकरघा एवं हस्तशिल्प का सशक्तिकरण
- खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्रों के लिए वैश्विक बाजार से जुड़ाव और ब्रांडिंग पर विशेष बल।
- उत्पादन प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने तथा मूल्य शृंखला को सुदृढ़ करने पर फोकस।
- इस पहल से प्रत्यक्ष लाभ:
- बुनकरों और कारीगरों को
- ग्रामोद्योग इकाइयों को
- एक जिला–एक उत्पाद (ODOP) पहल को
- ग्रामीण युवाओं को रोजगार और उद्यमिता के अवसर।
2️⃣ खेल सामग्री (Sports Goods) क्षेत्र के लिए समर्पित पहल
- भारत को उच्च गुणवत्ता एवं किफायती खेल सामग्री का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में ठोस कदम।
- खेल सामग्री के लिए एक विशेष पहल का प्रस्ताव।
- इस पहल के प्रमुख घटक:
- घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन
- अनुसंधान एवं नवाचार (R&D)
- उन्नत उपकरणों की डिज़ाइन क्षमता
- मटेरियल साइंस में तकनीकी विकास।
- निर्यात, रोजगार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा।
3️⃣ विरासत औद्योगिक क्लस्टरों का पुनरुद्धार
- 200 विरासत औद्योगिक क्लस्टरों के पुनर्जीवन हेतु नई योजना का प्रस्ताव।
- योजना के अंतर्गत:
- आधुनिक बुनियादी ढांचे का विकास
- प्रौद्योगिकी उन्नयन
- उद्देश्य:
- लागत प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार
- उत्पादन दक्षता और बाजार पहुँच को सशक्त बनाना।
4️⃣ चैंपियन एसएमई का निर्माण एवं सूक्ष्म उद्यमों का समर्थन
- एमएसएमई को आर्थिक विकास का प्रमुख इंजन मानते हुए सुदृढ़ समर्थन।
- तीन-स्तरीय (Three-Pronged) रणनीति का प्रस्ताव।
(क)️⃣ इक्विटी समर्थन (Equity Support)
- भविष्य के चैंपियन एसएमई तैयार करने हेतु:
- चयनित मानदंडों के आधार पर ₹10,000 करोड़ का समर्पित एसएमई ग्रोथ फंड।
- सूक्ष्म उद्यमों को निरंतर जोखिम पूंजी उपलब्ध कराने के लिए:
- वर्ष 2021 में स्थापित आत्मनिर्भर भारत फंड में
- ₹2,000 करोड़ की अतिरिक्त राशि (टॉप-अप) का प्रस्ताव।
(ख)️⃣ तरलता (Liquidity) समर्थन
- अब तक एमएसएमई क्षेत्र को ₹7 लाख करोड़ से अधिक की तरलता सहायता।
- इस सहायता का पूर्ण लाभ सुनिश्चित करने हेतु चार ठोस उपाय प्रस्तावित।
पहला उपाय:
- केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (CPSEs) द्वारा एमएसएमई से की जाने वाली सभी खरीद के लिए
- TReDS को अनिवार्य लेन-देन निपटान मंच बनाया जाएगा।
- उद्देश्य:
- समय पर भुगतान सुनिश्चित करना
- TReDS को अन्य कॉरपोरेट संस्थाओं के लिए मानक (बेंचमार्क) के रूप में स्थापित करना।
ज़रूर। नीचे दिए गए अंश को नीति/बजट भाषण की सशक्त, स्पष्ट और औपचारिक हिंदी में क्रमबद्ध पॉइंटर्स के रूप में प्रस्तुत किया गया है:
📌 एमएसएमई, पेशेवर सहयोग एवं अवसंरचना : प्रमुख प्रस्ताव (जारी)
4️⃣ व्यापार देयकों (Trade Receivables) का प्रतिभूतिकरण
- व्यापार देयकों को परिसंपत्ति-समर्थित प्रतिभूतियों (Asset-Backed Securities) के रूप में पेश किया जाएगा।
- इसके माध्यम से:
- एक सशक्त द्वितीयक बाजार का विकास
- एमएसएमई क्षेत्र में तरलता में वृद्धि
- लेन-देन के निपटान में तेजी और पारदर्शिता।
- वित्तीय बाजारों में एमएसएमई के लिए पूंजी तक पहुँच का विस्तार।
5️⃣ पेशेवर सहयोग एवं क्षमता निर्माण
- ICAI, ICFAI जैसे पेशेवर संस्थानों के माध्यम से:
- अल्पकालिक, मॉड्यूलर और व्यावहारिक पाठ्यक्रमों का विकास।
- विशेष फोकस:
- टियर-2 और टियर-3 शहरों में कॉरपोरेट मित्रों का एक सक्षम कैडर तैयार करना।
- ये मान्यता प्राप्त पैरा-प्रोफेशनल्स:
- एमएसएमई को कम लागत पर अनुपालन (कम्प्लायंस) आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता करेंगे।
- उद्देश्य:
- अनुपालन का बोझ कम करना
- व्यवसाय संचालन को सरल और सुगम बनाना।
6️⃣ अवसंरचना (Infrastructure) विकास को गति
- पिछले एक दशक में सार्वजनिक अवसंरचना विस्तार हेतु बहुआयामी पहलें:
- इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvITs)
- रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REITs)
- NIIF और NABFID जैसी संस्थाओं की सशक्त भूमिका।
- आगामी चरण में:
- 5 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहरों
- अर्थात टियर-2 और टियर-3 शहरों पर विशेष फोकस।
- ये शहर अब विकास के नए केंद्र के रूप में उभर रहे हैं।
7️⃣ सार्वजनिक पूंजीगत व्यय में निरंतर वृद्धि
- 2014-15 में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय: ₹2 लाख करोड़
- 2025-26 (बजट अनुमान): ₹11.2 लाख करोड़
- इस गति को बनाए रखते हुए:
- वित्त वर्ष 2026-27 के लिए
- पूंजीगत व्यय बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ करने का प्रस्ताव।
- अवसंरचना, रोजगार और दीर्घकालिक विकास को मजबूती।
8️⃣ इन्फ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड
- अवसंरचना विकास एवं निर्माण चरण के जोखिमों को कम करने हेतु:
- इन्फ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड की स्थापना का प्रस्ताव।
- यह फंड:
- ऋणदाताओं को सावधानीपूर्वक कैलिब्रेटेड आंशिक क्रेडिट गारंटी प्रदान करेगा।
- उद्देश्य:
- निजी डेवलपर्स का भरोसा मजबूत करना
- निजी निवेश को आकर्षित करना
- परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना।
सात शहरों को जोड़ने के लिए हाई स्पीड रेल योजना
📌 बैंकिंग, वित्तीय बाज़ार एवं निवेश सुधार : प्रमुख प्रस्ताव
1️⃣ विकसित भारत के लिए बैंकिंग
- “विकसित भारत के लिए बैंकिंग” विषय पर एक उच्च-स्तरीय समिति के गठन का प्रस्ताव।
- समिति द्वारा:
- पूरे बैंकिंग क्षेत्र की समग्र समीक्षा
- भारत के अगले विकास चरण के अनुरूप बैंकिंग प्रणाली का पुनर्संरेखण।
- साथ ही सुनिश्चित किया जाएगा:
- वित्तीय स्थिरता
- वित्तीय समावेशन
- उपभोक्ता संरक्षण।
2️⃣ एनबीएफसी (NBFCs) क्षेत्र के लिए दृष्टि
- विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप एनबीएफसी क्षेत्र के लिए स्पष्ट दृष्टि और रोडमैप।
- फोकस क्षेत्र:
- लक्षित ऋण वितरण
- प्रौद्योगिकी अपनाने में तेजी
- परिचालन दक्षता में सुधार।
- सार्वजनिक क्षेत्र की एनबीएफसी में स्केल और दक्षता बढ़ाने के लिए:
- पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (PFC) और
- रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन (REC)
के पुनर्गठन का प्रस्ताव।
3️⃣ विदेशी निवेश ढांचे का आधुनिकीकरण
(फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट – नॉन-डेब्ट इंस्ट्रूमेंट्स नियम)
- विदेशी मुद्रा प्रबंधन (नॉन-डेब्ट इंस्ट्रूमेंट्स) नियमों की समग्र समीक्षा का प्रस्ताव।
- उद्देश्य:
- बदलती आर्थिक प्राथमिकताओं के अनुरूप ढांचा तैयार करना
- विदेशी निवेश को सरल, आधुनिक और यूज़र-फ्रेंडली बनाना।
- निवेशकों के लिए स्पष्टता, स्थिरता और भरोसे में वृद्धि।
4️⃣ कॉरपोरेट बॉन्ड बाज़ार का सुदृढ़ीकरण
- कॉरपोरेट बॉन्ड इंडेक्स पर:
- उपयुक्त फंडिंग और डेरिवेटिव्स के साथ
- मार्केट-मेकिंग फ्रेमवर्क की शुरुआत का प्रस्ताव।
- इसके अतिरिक्त:
- कॉरपोरेट बॉन्ड्स पर टोटल रिटर्न स्वैप्स शुरू करने का प्रस्ताव।
- उद्देश्य:
- बाज़ार में तरलता बढ़ाना
- गहराई और निवेशकों की भागीदारी को सुदृढ़ करना।
5️⃣ म्युनिसिपल बॉन्ड (नगर निगम बॉन्ड) को प्रोत्साहन
- बड़े शहरों द्वारा उच्च मूल्य के म्युनिसिपल बॉन्ड निर्गम को बढ़ावा।
- ₹1,000 करोड़ से अधिक की एकल बॉन्ड निर्गम पर:
- ₹100 करोड़ का प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव।
- AMRUT के अंतर्गत:
- वर्तमान योजना, जो ₹200 करोड़ तक के बॉन्ड निर्गम को प्रोत्साहित करती है, जारी रहेगी।
- उद्देश्य:
- छोटे और मध्यम शहरों को भी निरंतर वित्तीय समर्थन।
6️⃣ ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस : निवेश नियमों में सुधार
- भारत के बाहर निवासी व्यक्ति
(PROI – Persons Resident Outside India) को:- पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट स्कीम के तहत
- सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों के इक्विटी उपकरणों में निवेश की अनुमति।
- निवेश सीमाओं में वृद्धि:
- किसी एक PROI के लिए सीमा 5% से बढ़ाकर 10%।
- सभी व्यक्तिगत PROI के लिए कुल सीमा 10% से बढ़ाकर 24%।
- उद्देश्य:
- विदेशी निवेश को प्रोत्साहन
- पूंजी प्रवाह में वृद्धि
- भारतीय पूंजी बाज़ार को अधिक आकर्षक बनाना।
📌 उभरती प्रौद्योगिकियाँ एवं समावेशी विकास
1️⃣ उभरती प्रौद्योगिकियों की भूमिका
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सहित उभरती प्रौद्योगिकियाँ 21वीं सदी के तकनीक-प्रेरित युग की पहचान।
- प्रौद्योगिकी का उपयोग सभी के लाभ के लिए:
- किसान और कृषि क्षेत्र
- STEM क्षेत्रों में आगे बढ़ती महिलाएँ
- कौशल उन्नयन के इच्छुक युवा
- नई संभावनाओं तक पहुँच बनाने वाले दिव्यांगजन।
- नई तकनीकों को प्रोत्साहन देने हेतु प्रमुख पहलें:
- AI मिशन
- नेशनल क्वांटम मिशन
- अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान कोष
- अनुसंधान, विकास एवं नवाचार कोष।
📌 दूसरा कर्तव्य : आकांक्षाओं की पूर्ति एवं क्षमता निर्माण
2️⃣ समावेशी विकास की उपलब्धियाँ
- पिछले एक दशक के सतत और सुधार-उन्मुख प्रयासों से:
- लगभग 25 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर आए।
- अब सरकार का नया फोकस:
- सेवा क्षेत्र (Service Sector) को विकास का प्रमुख आधार बनाना।
- उद्देश्य:
- युवा भारत की आकांक्षाओं को पूरा करने हेतु मजबूत अवसरों का सृजन।
📌 सेवा क्षेत्र के लिए संस्थागत ढांचा
3️⃣ सेवा क्षेत्र हेतु उच्च-स्तरीय स्थायी समिति
- शिक्षा से रोजगार और उद्यम पर एक उच्च-स्तरीय स्थायी समिति के गठन का प्रस्ताव।
- लक्ष्य:
- सेवा क्षेत्र को विकसित भारत का प्रमुख प्रेरक बनाना।
- 2047 तक वैश्विक सेवा व्यापार में 10% हिस्सेदारी के साथ भारत को वैश्विक नेता बनाना।
- समिति की प्रमुख जिम्मेदारियाँ:
- विकास, रोजगार और निर्यात की अधिकतम संभावनाओं वाले क्षेत्रों की पहचान।
- AI सहित उभरती प्रौद्योगिकियों के रोजगार एवं कौशल आवश्यकताओं पर प्रभाव का आकलन।
- आवश्यक नीतिगत सुधारों और उपायों की सिफारिश।
📌 कौशल-आधारित करियर पाथवे : स्वास्थ्य क्षेत्र पर विशेष फोकस
4️⃣ एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स (AHPs)
- मौजूदा एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल संस्थानों का उन्नयन।
- सार्वजनिक और निजी क्षेत्र में नए AHP संस्थानों की स्थापना।
- 10 चयनित विषयों में प्रशिक्षण, जिनमें शामिल:
- ऑप्टोमेट्री
- रेडियोलॉजी
- एनेस्थीसिया
- ओटी टेक्नोलॉजी
- एप्लाइड साइकोलॉजी
- बिहेवियरल हेल्थ।
- लक्ष्य:
- अगले पाँच वर्षों में 1 लाख नए AHPs का सृजन।
5️⃣ केयर इकोसिस्टम का सुदृढ़ीकरण
- वृद्धजन (जेरियाट्रिक) एवं एलाइड केयर सेवाओं के लिए मजबूत देखभाल तंत्र का विकास।
- NSQF-संरेखित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की शुरुआत।
- बहु-कौशल देखभालकर्ताओं को प्रशिक्षित किया जाएगा, जिनमें क्षमताएँ होंगी:
- मूल स्वास्थ्य देखभाल
- वेलनेस और योग
- मेडिकल सहायक उपकरणों का संचालन।
- आगामी वर्ष में:
- 1.5 लाख केयरगिवर्स को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य।
6️⃣ मेडिकल वैल्यू टूरिज़्म के लिए विशेष हब
- भारत की वैश्विक स्वास्थ्य क्षमताओं को ध्यान में रखते हुए:
- मेडिकल वैल्यू टूरिज़्म को बढ़ावा देने हेतु विशेष हब का विकास।
- अपेक्षित लाभ:
- रोजगार के नए अवसर
- निवेश में वृद्धि
- सेवा निर्यात को नई गति।
📌 स्वास्थ्य, आयुष, पशुपालन एवं सृजनात्मक अर्थव्यवस्था : प्रमुख प्रस्ताव
1️⃣ क्षेत्रीय मेडिकल हब
- निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी में पाँच क्षेत्रीय मेडिकल हब की स्थापना।
- ये हब एकीकृत स्वास्थ्य परिसरों के रूप में विकसित किए जाएंगे।
- प्रमुख सुविधाएँ:
- चिकित्सा, शिक्षा और अनुसंधान का एकीकृत ढांचा
- आयुष केंद्र
- मेडिकल वैल्यू टूरिज़्म सुविधा केंद्र
- निदान, पोस्ट-केयर एवं पुनर्वास हेतु आधुनिक बुनियादी ढांचा।
- लाभ:
- डॉक्टरों और एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स (AHPs) सहित
- स्वास्थ्य क्षेत्र में विविध एवं व्यापक रोजगार अवसर।
2️⃣ योग एवं आयुर्वेद को वैश्विक बढ़ावा
- प्राचीन भारतीय योग को:
- माननीय प्रधानमंत्री द्वारा संयुक्त राष्ट्र में प्रस्तुत किए जाने के बाद
- वैश्विक स्तर पर व्यापक मान्यता प्राप्त।
- कोविड के बाद आयुर्वेद को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान।
- गुणवत्तापूर्ण आयुर्वेद उत्पादों के निर्यात से:
- औषधीय जड़ी-बूटियाँ उगाने वाले किसानों को लाभ
- प्रसंस्करण से जुड़े युवाओं के लिए रोजगार।
- बढ़ती वैश्विक मांग को पूरा करने हेतु प्रस्तावित कदम:
- तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थानों की स्थापना।
- आयुष फार्मेसियों एवं औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं का उन्नयन, ताकि:
- उच्च-स्तरीय प्रमाणन इकोसिस्टम विकसित हो
- कुशल मानव संसाधन तैयार हों।
- जामनगर स्थित WHO ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर का उन्नयन, जिससे:
- साक्ष्य-आधारित अनुसंधान
- प्रशिक्षण
- जागरूकता
को और मजबूती मिले।
3️⃣ पशुपालन क्षेत्र का सुदृढ़ीकरण
- पशुधन का:
- कृषि आय में लगभग 16% योगदान, विशेषकर गरीब और सीमांत परिवारों के लिए।
- पशु-चिकित्सा पेशेवरों की उपलब्धता 20,000 से अधिक बढ़ाने का लक्ष्य।
- इसके लिए:
- निजी क्षेत्र में
- पशु-चिकित्सा एवं पैरा-पशु-चिकित्सा कॉलेज
- पशु अस्पताल
- डायग्नोस्टिक प्रयोगशालाएँ
- प्रजनन सुविधाएँ
की स्थापना हेतु ऋण-आधारित पूंजी सब्सिडी समर्थन योजना का प्रस्ताव।
- निजी क्षेत्र में
4️⃣ ऑरेंज इकोनॉमी : ABGC सेक्टर
- एनीमेशन, विज़ुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (ABGC) क्षेत्र:
- भारत का तेजी से बढ़ता उद्योग।
- अनुमान:
- 2030 तक लगभग 20 लाख पेशेवरों की आवश्यकता।
- इस क्षेत्र को सशक्त करने हेतु:
- इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज़, मुंबई को समर्थन।
- उद्देश्य:
- देशभर के
- 15,000 माध्यमिक विद्यालयों और
- 500 कॉलेजों में
ABGC कंटेंट क्रिएटर लैब्स की स्थापना।
- देशभर के
5️⃣ डिज़ाइन शिक्षा का विस्तार
- भारतीय डिज़ाइन उद्योग में तीव्र विस्तार, परंतु:
- कुशल डिज़ाइनरों की कमी एक बड़ी चुनौती।
- इस कमी को दूर करने हेतु:
- चैलेंज रूट के माध्यम से
- भारत के पूर्वी क्षेत्र में
नया राष्ट्रीय डिज़ाइन संस्थान (NID) स्थापित करने का प्रस्ताव।
- उद्देश्य:
- डिज़ाइन शिक्षा को सुदृढ़ करना
- नवाचार, विनिर्माण और स्टार्टअप इकोसिस्टम को बल।
📌 शिक्षा, विज्ञान, पर्यटन एवं पर्यावरण संरक्षण : प्रमुख प्रस्ताव
1️⃣ शिक्षा : शैक्षणिक अवसंरचना का विस्तार
- चैलेंज रूट के माध्यम से राज्यों को सहयोग।
- प्रमुख औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक्स कॉरिडोरों के आसपास पाँच यूनिवर्सिटी काउंसिल की स्थापना।
- इन काउंसिलों को नियोजित शैक्षणिक क्षेत्र (Academic Zones) के रूप में विकसित किया जाएगा।
- प्रमुख घटक:
- विश्वविद्यालय, कॉलेज और अनुसंधान संस्थान
- कौशल विकास केंद्र
- छात्र-छात्राओं हेतु आवासीय परिसर।
2️⃣ उच्च शिक्षा में छात्राओं के लिए सुविधाएँ
- STEM संस्थानों में छात्राओं की विशेष आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए:
- BGF वायबिलिटी गैप फंडिंग एवं पूंजीगत सहायता के माध्यम से
- प्रत्येक जिले में एक बालिका छात्रावास की स्थापना।
- उद्देश्य:
- सुरक्षित आवास
- अध्ययन, शोध और नवाचार में निरंतरता।
3️⃣ खगोल भौतिकी एवं खगोल विज्ञान का संवर्धन
- इमर्सिव और वैज्ञानिक अनुभवों के माध्यम से खगोल विज्ञान को बढ़ावा।
- चार प्रमुख टेलीस्कोप अवसंरचना सुविधाओं का स्थापना/उन्नयन:
- नेशनल लार्ज सोलर टेलीस्कोप
- नेशनल लार्ज ऑप्टिकल इन्फ्रारेड टेलीस्कोप
- हिमालयन चंद्रा टेलीस्कोप
- कॉस्मोस-2 प्लेनेटेरियम।
- उद्देश्य:
- अनुसंधान, शिक्षा और जन-जागरूकता को सुदृढ़ करना।
4️⃣ पर्यटन : कौशल, संस्थान और रोजगार
- पर्यटन क्षेत्र में रोजगार, विदेशी मुद्रा अर्जन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के विस्तार की व्यापक संभावनाएँ।
- राष्ट्रीय आतिथ्य संस्थान (National Institute of Hospitality) की स्थापना का प्रस्ताव।
- इसके लिए:
- नेशनल काउंसिल फॉर होटल मैनेजमेंट एंड कैटरिंग टेक्नोलॉजी का उन्नयन।
- यह संस्थान:
- शिक्षा जगत, उद्योग और सरकार के बीच सेतु के रूप में कार्य करेगा।
5️⃣ पर्यटन गाइडों का कौशल उन्नयन
- 20 प्रतिष्ठित पर्यटन स्थलों पर 10,000 गाइडों के प्रशिक्षण हेतु पायलट योजना।
- एक भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) के सहयोग से:
- 12-सप्ताह का मानकीकृत, उच्च-गुणवत्ता वाला हाइब्रिड प्रशिक्षण कार्यक्रम।
- उद्देश्य:
- सेवा गुणवत्ता में सुधार
- पर्यटकों का बेहतर अनुभव।
6️⃣ राष्ट्रीय गंतव्य डिजिटल ज्ञान ग्रिड
- देश के सभी:
- सांस्कृतिक
- आध्यात्मिक
- विरासत महत्व के स्थलों
का डिजिटल दस्तावेज़ीकरण।
- इसके लिए नेशनल डेस्टिनेशन डिजिटल नॉलेज ग्रिड की स्थापना।
- लाभ:
- स्थानीय शोधकर्ताओं
- इतिहासकारों
- कंटेंट क्रिएटर्स
- तकनीकी भागीदारों
के लिए रोजगार एवं नवाचार का नया इकोसिस्टम।
7️⃣ प्रकृति एवं इको-टूरिज़्म पहल
- विश्वस्तरीय ट्रेकिंग और हाइकिंग अनुभव विकसित करने पर विशेष फोकस।
प्रमुख पहलें:
- हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर, तथा
पूर्वी घाट (अराकू घाटी) और पश्चिमी घाट (पोडिगई मलई) में
पर्यावरणीय रूप से सतत पर्वतीय ट्रेनों का विकास। - ओडिशा, कर्नाटक और केरल के तटीय क्षेत्रों में
टर्टल ट्रेन का संचालन। - आंध्र प्रदेश–तमिलनाडु सीमा पर स्थित
पुलिकट झील के आसपास बर्ड-वॉचिंग ट्रेल्स का विकास।
8️⃣ अंतरराष्ट्रीय बिग कैट संरक्षण
- वर्ष 2024 में इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस की स्थापना।
- इस वर्ष भारत द्वारा:
- पहले वैश्विक बिग कैट शिखर सम्मेलन की मेज़बानी।
- सहभागिता:
- 95 रेंज देशों के राष्ट्राध्यक्ष और मंत्री।
- उद्देश्य:
- वैश्विक स्तर पर संरक्षण की सामूहिक रणनीतियों का निर्माण।
📌 वैश्विक संरक्षण, पर्यटन, खेल एवं समावेशी ग्रामीण विकास : प्रमुख प्रस्ताव
1️⃣ वैश्विक बिग कैट शिखर सम्मेलन
- भारत द्वारा आयोजित वैश्विक बिग कैट शिखर सम्मेलन।
- 95 रेंज देशों के राष्ट्राध्यक्षों और मंत्रियों की भागीदारी।
- उद्देश्य:
- वन्यजीव संरक्षण के लिए सामूहिक वैश्विक रणनीतियों पर विचार-विमर्श।
- बिग कैट संरक्षण में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना।
2️⃣ विरासत एवं सांस्कृतिक पर्यटन का विकास
- लोथल, धोलावीरा, राखीगढ़ी, आदिचनल्लूर, सारनाथ, हस्तिनापुर और लेह पैलेस सहित
15 प्रमुख पुरातात्विक स्थलों को- जीवंत, अनुभव-आधारित सांस्कृतिक गंतव्यों के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव।
- प्रमुख पहलें:
- खुदाई किए गए स्थलों को क्यूरेटेड वॉकवे के माध्यम से जनता के लिए खोलना।
- संरक्षण प्रयोगशालाओं और व्याख्या केंद्रों की स्थापना।
- गाइडों के लिए इमर्सिव स्टोरीटेलिंग कौशल और तकनीकों का समावेश।
- उद्देश्य:
- पर्यटन अनुभव को समृद्ध बनाना
- स्थानीय रोजगार और सांस्कृतिक चेतना को बढ़ावा।
3️⃣ खेल क्षेत्र : खेलो इंडिया मिशन
- खेल क्षेत्र को रोजगार, कौशल विकास और करियर अवसरों के प्रमुख स्रोत के रूप में विकसित करना।
- मौजूदा खेलो इंडिया कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए:
- अगले दशक में खेल क्षेत्र के रूपांतरण हेतु खेलो इंडिया मिशन की शुरुआत।
- मिशन के प्रमुख स्तंभ:
- (A) एकीकृत प्रतिभा विकास मार्ग (बुनियादी से एलीट स्तर तक)
- (B) कोच और सहायक स्टाफ का व्यवस्थित विकास
- (C) खेल विज्ञान और प्रौद्योगिकी का एकीकरण
- (D) प्रतियोगिताओं और लीगों का विस्तार
- (E) प्रशिक्षण एवं प्रतियोगिता हेतु खेल अवसंरचना का विकास।
4️⃣ तीसरा कर्तव्य : सबका साथ, सबका विकास की दिशा में विकसित भारत
- समावेशी और संतुलित विकास के लिए लक्षित प्रयास:
- (A) उत्पादकता वृद्धि और उद्यमिता के माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि
- विशेष ध्यान छोटे और सीमांत किसानों पर।
- (B) युवाओं का सशक्तिकरण
- रोजगार, प्रशिक्षण और आधुनिक सहायक उपकरणों तक पहुँच।
- (C) संवेदनशील वर्गों का सशक्तिकरण
- मानसिक स्वास्थ्य और ट्रॉमा केयर तक बेहतर पहुँच।
- (D) पूर्वोत्तर तथा आकांक्षी/पिछड़े क्षेत्रों पर विशेष फोकस
- विकास और रोजगार के अवसरों में तेजी।
- (A) उत्पादकता वृद्धि और उद्यमिता के माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि
5️⃣ मत्स्य पालन का समेकित विकास
- 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों के एकीकृत विकास की पहल।
- उद्देश्य:
- तटीय क्षेत्रों में मत्स्य मूल्य श्रृंखला को सुदृढ़ करना।
- प्रमुख कदम:
- स्टार्टअप्स और महिला-नेतृत्व वाले समूहों को
- मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों (FFPOs) से जोड़कर
- बाज़ार तक सीधी पहुँच सुनिश्चित करना।
6️⃣ पशुपालन क्षेत्र में उद्यमिता को बढ़ावा
- ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण रोजगार सृजन पर जोर।
- प्रमुख उपाय:
- (A) क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी कार्यक्रम
- (B) पशुधन उद्यमों का विस्तार एवं आधुनिकीकरण
- (C) पशुधन, डेयरी और पोल्ट्री आधारित एकीकृत मूल्य श्रृंखलाओं का निर्माण
- (D) पशुधन किसान उत्पादक संगठनों के गठन को प्रोत्साहन।
7️⃣ उच्च-मूल्य कृषि फसलों को समर्थन
- कृषि में विविधीकरण, आय वृद्धि और रोजगार सृजन हेतु उच्च-मूल्य फसलों पर फोकस:
- तटीय क्षेत्रों में: नारियल, चंदन, कोको, काजू
- पूर्वोत्तर में: अगर (अगरवुड)
- पहाड़ी क्षेत्रों में: बादाम, अखरोट और पाइन नट्स।
8️⃣ नारियल संवर्धन योजना
- भारत विश्व का सबसे बड़ा नारियल उत्पादक।
- लगभग 3 करोड़ लोग, जिनमें करीब 1 करोड़ किसान, नारियल पर निर्भर।
- नारियल संवर्धन योजना के अंतर्गत:
- अनुत्पादक और पुराने पेड़ों का प्रतिस्थापन
- उन्नत किस्मों से उत्पादकता में वृद्धि।
- उद्देश्य:
- नारियल उत्पादन की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना।
9️⃣ काजू एवं कोको के लिए समर्पित कार्यक्रम
- भारतीय काजू और कोको को वैश्विक पहचान दिलाने हेतु विशेष पहल।
- प्रमुख लक्ष्य:
- कच्चे काजू और कोको में आत्मनिर्भरता
- प्रसंस्करण क्षमता का विस्तार
- निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि।
- लक्ष्य:
- 2030 तक इन्हें प्रीमियम वैश्विक ब्रांड के रूप में स्थापित करना।
🔟 चंदन (सैंडलवुड) इकोसिस्टम का पुनरुद्धार
- चंदन भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा।
- राज्य सरकारों के सहयोग से:
- केंद्रित खेती
- कटाई-पश्चात प्रसंस्करण को बढ़ावा।
- उद्देश्य:
- भारतीय चंदन इकोसिस्टम की खोई हुई गरिमा की पुनर्स्थापना।
1️⃣1️⃣ बागवानी एवं मेवा फसलें
- पुराने और कम-उपज वाले बागानों के पुनरोद्धार को समर्थन।
- अखरोट, बादाम और पाइन नट्स की उच्च-घनत्व खेती का विस्तार।
- उद्देश्य:
- किसानों की आय में वृद्धि
- युवाओं को मूल्य संवर्धन और प्रसंस्करण से जोड़ना।
1️⃣2️⃣ भारत विस्तार (Bharat Vistar)
- भारत विस्तार की परिकल्पना:
- एक वर्चुअली इंटीग्रेटेड सिस्टम के रूप में।
- उद्देश्य:
- ग्रामीण, कृषि, उद्यमिता और बाज़ार को डिजिटल रूप से जोड़ना
- विकास योजनाओं की पहुंच, प्रभाव और समन्वय को बढ़ाना।
ग्रामीण महिला उद्यमिता : “श्री मार्ट्स”
• लखपति दीदी कार्यक्रम की सफलता को आगे बढ़ाते हुए महिलाओं को उद्यम की मालिक बनने में सहायता।
• श्री मार्ट्स की स्थापना:
– क्लस्टर-स्तरीय फेडरेशनों के अंतर्गत,
– समुदाय-स्वामित्व वाले रिटेल आउटलेट्स के रूप में,
– उन्नत और नवाचारी वित्तीय साधनों के सहयोग से।
• उद्देश्य:
– ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाना,
– स्थानीय उत्पादों को बाज़ार से जोड़ना,
– महिला-नेतृत्व वाली उद्यमिता को सशक्त करना।
दिव्यांगजन सशक्तिकरण
दिव्यांग कौशल योजना
• IT, AVGC, हॉस्पिटैलिटी, फूड एंड बेवरेज जैसे क्षेत्रों में:
– कार्य-उन्मुख और प्रक्रिया-आधारित भूमिकाएँ,
– प्रत्येक दिव्यांग समूह के लिए उद्योग-प्रासंगिक और कस्टम प्रशिक्षण।
• लक्ष्य:
– दिव्यांगजनों के लिए सम्मानजनक आजीविका के अवसर सुनिश्चित करना।
दिव्यांग सहारा योजना
• ALIMCO को समर्थन:
– सहायक उपकरणों के उत्पादन में वृद्धि,
– अनुसंधान एवं विकास तथा AI इंटीग्रेशन में निवेश,
– PM दिव्यांश केंद्रों को सुदृढ़ बनाना।
• असिस्टिव टेक्नोलॉजी मार्ट्स की स्थापना:
– आधुनिक रिटेल शैली के केंद्र,
– जहाँ दिव्यांगजन और वरिष्ठ नागरिक उपकरणों को देख, आज़मा और खरीद सकेंगे।
मानसिक स्वास्थ्य और ट्रॉमा केयर
• उत्तर भारत में NIMHANS-2 की स्थापना।
• रांची और पुणे स्थित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों को:
– क्षेत्रीय एपेक्स संस्थानों के रूप में उन्नत किया जाएगा।
• जिला अस्पतालों में:
– आपातकालीन और ट्रॉमा केयर केंद्रों की स्थापना,
– मानसिक स्वास्थ्य क्षमताओं में 50 प्रतिशत की वृद्धि।
सीमावर्ती और पूर्वोत्तर क्षेत्रों पर विशेष फोकस
• दुर्गापुर में सशक्त नोड के साथ एकीकृत ईस्ट कोस्ट इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का विकास।
• पाँच पूर्वोदय राज्यों में पाँच प्रमुख पर्यटन गंतव्यों का विकास।
• बौद्ध परिपथ योजना:
– अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिज़ोरम और त्रिपुरा में,
– मंदिरों और मठों का संरक्षण,
– तीर्थ व्याख्या केंद्र, बेहतर कनेक्टिविटी और तीर्थयात्री सुविधाओं का विकास।
16वाँ वित्त आयोग
• 17 नवंबर 2025 को 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंपी गई।
• सरकार द्वारा वर्टिकल शेयर 41 प्रतिशत बनाए रखने की सिफारिश स्वीकार।
• वर्ष 2026-27 के लिए राज्यों को 1.4 लाख करोड़ रुपये के अनुदान:
– ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों के लिए,
– आपदा प्रबंधन अनुदान सहित।
राजकोषीय समेकन (Fiscal Consolidation)
• लक्ष्य:
– वर्ष 2030-31 तक ऋण-GDP अनुपात 50 प्रतिशत ±1 प्रतिशत।
• अनुमान:
– BE 2026-27 में ऋण-GDP अनुपात: 55.6 प्रतिशत,
– RE 2025-26 में ऋण-GDP अनुपात: 56.1 प्रतिशत।
• राजकोषीय घाटा:
– RE 2025-26: GDP का 4.4 प्रतिशत,
– BE 2026-27: GDP का 4.3 प्रतिशत।
सरकारी वित्तीय आँकड़े
संशोधित अनुमान (RE)
• गैर-ऋण प्राप्तियाँ: 34 लाख करोड़ रुपये
– इसमें केंद्र का शुद्ध कर राजस्व: 26.7 लाख करोड़ रुपये।
• कुल व्यय: 49.6 लाख करोड़ रुपये
– पूंजीगत व्यय: लगभग 11 लाख करोड़ रुपये।
बजट अनुमान (BE) 2026-27
• गैर-ऋण प्राप्तियाँ: 36.5 लाख करोड़ रुपये।
• कुल व्यय: 36.5 लाख करोड़ रुपये (अनुमानित)।
बिल्कुल—नीचे आपके प्रत्यक्ष कर (Direct Taxes) से जुड़े प्रस्ताव स्पष्ट, संक्षिप्त और बजट-शैली के हिंदी पॉइंटर्स में प्रस्तुत हैं:
🧾 नया आयकर अधिनियम
- जुलाई 2024 में आयकर अधिनियम, 1961 की व्यापक समीक्षा की घोषणा
- समीक्षा प्रक्रिया रिकॉर्ड समय में पूर्ण
- आयकर अधिनियम, 2025 लागू: 1 अप्रैल 2026 से
- सरल नियम और नए फॉर्म अधिसूचित होंगे
- फॉर्म ऐसे डिज़ाइन कि आम नागरिक के लिए अनुपालन सरल हो
🏡 ईज़ ऑफ लिविंग (Ease of Living)
- मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल द्वारा प्राकृतिक व्यक्ति को दिया गया ब्याज आयकर मुक्त, TDS नहीं
- ओवरसीज़ टूर पैकेज पर TCS घटाकर 2% (पहले 5%/20%)
- LRS के तहत शिक्षा व चिकित्सा हेतु TCS 5% से घटाकर 2%
- मैनपावर सर्विसेज को ठेकेदार भुगतान में स्पष्ट शामिल; TDS 1%/2%
- छोटे करदाताओं को ऑटोमेटेड प्रक्रिया से लोअर/निल TDS सर्टिफिकेट
- डिपॉजिटरी को Form 15G/15H स्वीकार कर कंपनियों तक भेजने की अनुमति
- रिटर्न संशोधन की समय-सीमा 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च
- रिटर्न फाइलिंग समय-सीमा:
- ITR-1/ITR-2: 31 जुलाई
- नॉन-ऑडिट बिज़नेस/ट्रस्ट: 31 अगस्त
- गैर-निवासी द्वारा अचल संपत्ति बिक्री पर TDS प्रक्रिया सरल होगी
🌍 एकमुश्त विदेशी संपत्ति प्रकटीकरण योजना (6 माह)
- छोटे करदाताओं के लिए विशेष अवसर
- श्रेणी A (₹1 करोड़ तक):
- 30% टैक्स + 30% अतिरिक्त टैक्स
- अभियोजन से प्रतिरक्षा
- श्रेणी B (₹5 करोड़ तक):
- ₹1 लाख शुल्क
- दंड व अभियोजन से प्रतिरक्षा
⚖️ दंड और अभियोजन का युक्तिकरण
- आकलन व दंड का एक ही कॉमन ऑर्डर
- अपील अवधि में दंड राशि पर ब्याज नहीं
- प्री-डिपॉज़िट 20% से घटाकर 10%
- री-असेसमेंट के बाद भी अपडेटेड रिटर्न की अनुमति (10% अतिरिक्त टैक्स)
- मिस-रिपोर्टिंग में भी प्रतिरक्षा, पर 100% अतिरिक्त टैक्स
- कुछ तकनीकी चूकों पर दंड को शुल्क (Fee) में बदला जाएगा
- डिक्रिमिनलाइज़ेशन:
- दस्तावेज़ न देने, इन-काइंड भुगतान पर TDS अपराध की श्रेणी से बाहर
- मामूली मामलों में केवल जुर्माना
- ₹20 लाख से कम विदेशी गैर-अचल संपत्ति पर रेट्रोस्पेक्टिव अभियोजन से प्रतिरक्षा
🤝 सहकारिताएँ (Cooperatives)
- प्राथमिक सहकारी समितियों की कटौती का दायरा पशु आहार व कपास बीज तक बढ़ेगा
- इंटर-कोऑपरेटिव डिविडेंड पर कटौती
- अधिसूचित राष्ट्रीय सहकारी फेडरेशन को
- कंपनियों में निवेश से डिविडेंड पर 3 वर्ष की छूट
- शर्त: डिविडेंड सदस्य सहकारिताओं में वितरित हो
💻 आईटी सेक्टर – भारत का ग्रोथ इंजन
- सॉफ्टवेयर, ITES, KPO, कॉन्ट्रैक्ट R&D को
- “इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी सर्विसेज” की एक श्रेणी में शामिल
- कॉमन सेफ-हार्बर मार्जिन: 15.5% लागू
बिल्कुल—नीचे आपके प्रत्यक्ष कर (Direct Taxes) प्रस्ताव और अधिक संक्षिप्त, साफ़ और बजट-शैली के पॉइंटर्स में प्रस्तुत हैं:
🧾 नया आयकर अधिनियम
- आयकर अधिनियम, 1961 की समीक्षा (घोषणा: जुलाई 2024)
- आयकर अधिनियम, 2025 लागू: 1 अप्रैल 2026 से
- सरल नियम, नए फॉर्म; आम नागरिक के लिए आसान अनुपालन
🏡 ईज़ ऑफ लिविंग
- मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल का ब्याज आयकर मुक्त, TDS नहीं
- ओवरसीज़ टूर पैकेज पर TCS घटाकर 2%
- LRS (शिक्षा/चिकित्सा) पर TCS 2%
- मैनपावर सर्विसेज पर TDS 1%/2% (ठेकेदार भुगतान में शामिल)
- छोटे करदाताओं को ऑटोमेटेड लोअर/निल TDS सर्टिफिकेट
- डिपॉजिटरी द्वारा Form 15G/15H सीधे कंपनियों को भेजने की अनुमति
- रिटर्न संशोधन की समय-सीमा 31 मार्च तक
- रिटर्न फाइलिंग समय-सीमा:
- ITR-1/2: 31 जुलाई
- नॉन-ऑडिट बिज़नेस/ट्रस्ट: 31 अगस्त
- गैर-निवासी संपत्ति बिक्री पर TDS प्रक्रिया सरल
🌍 एकमुश्त विदेशी संपत्ति प्रकटीकरण (6 माह)
- छोटे करदाताओं के लिए विशेष अवसर
- श्रेणी A (₹1 करोड़ तक): 30% टैक्स + 30% अतिरिक्त टैक्स, अभियोजन से प्रतिरक्षा
- श्रेणी B (₹5 करोड़ तक): ₹1 लाख शुल्क, दंड/अभियोजन से प्रतिरक्षा
⚖️ दंड व अभियोजन का युक्तिकर
- आकलन व दंड का एक कॉमन ऑर्डर
- अपील अवधि में दंड पर ब्याज नहीं
- प्री-डिपॉज़िट 10%
- री-असेसमेंट के बाद भी अपडेटेड रिटर्न (10% अतिरिक्त टैक्स)
- मिस-रिपोर्टिंग पर 100% अतिरिक्त टैक्स के साथ प्रतिरक्षा
- तकनीकी चूकों पर दंड → शुल्क (Fee)
- डिक्रिमिनलाइज़ेशन: मामूली अपराध—केवल जुर्माना
- ₹20 लाख से कम गैर-अचल विदेशी संपत्ति पर रेट्रोस्पेक्टिव अभियोजन से प्रतिरक्षा
🤝 सहकारिताएँ
- कटौती का विस्तार: पशु आहार व कपास बीज तक
- इंटर-कोऑपरेटिव डिविडेंड पर कटौती
- अधिसूचित राष्ट्रीय सहकारी फेडरेशन को 3 वर्ष डिविडेंड छूट (सदस्य सहकारिताओं में वितरण शर्त)
💻 आईटी सेक्टर
- सॉफ्टवेयर, ITES, KPO, कॉन्ट्रैक्ट R&D—एक श्रेणी: IT Services
- कॉमन सेफ-हार्बर मार्जिन: 15.5%
✅ नया टैक्स रेजीम और MAT (Minimum Alternate Tax)
- नए टैक्स रेजीम में MAT क्रेडिट का अधिकतम 25% तक टैक्स देनदारी से सेट-ऑफ
- 1 अप्रैल 2026 से MAT को फाइनल टैक्स बनाया जाएगा
- आगे नया MAT क्रेडिट अर्जित नहीं होगा
- MAT दर 15% → 14%
- 30 मार्च 2026 तक का जमा MAT क्रेडिट, तय सीमा में मान्य
🧾 अप्रत्यक्ष कर (Indirect Taxes): उद्देश्य
- टैरिफ स्ट्रक्चर सरल बनाना
- घरेलू विनिर्माण को समर्थन
- निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ाना
- ड्यूटी इनवर्ज़न का समाधान
🏭 कस्टम ड्यूटी छूट में सुधार
- भारत में बनने वाली/कम आयातित वस्तुओं पर पुरानी छूटें हटेंगी
- कई इफेक्टिव रेट्स सीधे टैरिफ शेड्यूल में शामिल—दरें समझना आसान
📦 सेक्टर-वाइज कस्टम्स प्रस्ताव
🐟 समुद्री, लेदर और टेक्सटाइल
- सी-फूड एक्सपोर्ट: ड्यूटी-फ्री इनपुट सीमा 1% → 3% (FOB टर्नओवर)
- शू अपर निर्यात को ड्यूटी-फ्री इनपुट
- लेदर/टेक्सटाइल/फुटवियर: एक्सपोर्ट समय-सीमा 6 माह → 1 वर्ष
🔋 ऊर्जा परिवर्तन और सुरक्षा
- BESS (लिथियम-आयन सेल) के कैपिटल गुड्स पर BCD छूट
- सोलर ग्लास हेतु Sodium Antimonate आयात पर BCD छूट
⚛️ परमाणु ऊर्जा
- न्यूक्लियर प्रोजेक्ट आयात पर BCD छूट 2035 तक
- छूट सभी न्यूक्लियर प्लांट्स पर लागू (क्षमता अप्रासंगिक)
🪨 क्रिटिकल मिनरल्स
- प्रोसेसिंग के लिए आवश्यक कैपिटल गुड्स आयात पर BCD छूट
♻️ बायोगैस-मिश्रित CNG
- एक्साइज गणना में बायोगैस का पूरा मूल्य बाहर
✈️ सिविल और डिफेंस एविएशन
- सिविल ट्रेनिंग/अन्य विमानों के पार्ट्स पर BCD छूट
- डिफेंस MRO हेतु पार्ट्स बनाने के कच्चे माल पर BCD छूट
📱 इलेक्ट्रॉनिक्स
- माइक्रोवेव ओवन निर्माण के निर्दिष्ट पार्ट्स पर BCD छूट—वैल्यू एडिशन बढ़ेगा
🏗️ विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ)
- वन-टाइम विशेष उपाय के तहत SEZ यूनिट्स को
- कंसेशनल ड्यूटी पर DTA बिक्री की अनुमति
- बिक्री निर्यात के तय अनुपात तक सीमित
- रेगुलेटरी बदलाव—DTA यूनिट्स के साथ लेवल प्लेइंग फील्ड
🧑⚕️ Ease of Living: आम नागरिकों को राहत
- पर्सनल यूज़ आयात पर टैरिफ 20% → 10%
- कैंसर सहित 17 दवाएँ: BCD से छूट
- 7 और दुर्लभ बीमारियाँ जोड़ी जाएँगी—इलाज की दवाओं/फूड पर ड्यूटी छूट
यदि चाहें तो इसे UPSC/State PSC/SSC शॉर्ट रिविज़न, PDF-रेडी हैंडआउट, या इन्फोग्राफिक/सोशल पोस्ट में बदल दूँ।




