हजारीबाग केंद्रीय कारा के पूर्व सुपरिटेंडेंट जितेंद्र सिंह को लेकर एक और खुलासा, 10 पालतू कुत्तों की रखवाली में लगाए थे 18 जेलकर्मी

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November 25, 2025

हजारीबाग केंद्रीय कारा के पूर्व सुपरिटेंडेंट जितेंद्र सिंह को लेकर एक और खुलासा, 10 पालतू कुत्तों की रखवाली में लगाए थे 18 जेलकर्मी

रांचीः हजारीबाग के लोकनायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा के पूर्व सुपरिटेंडेंट जितेंद्र सिंह के कार्यकाल के दौरान हुए कारनामों की कलई अब खुलने लगी है। उन्होंने अपने सरकारी आवास पर 10 पालतू कुत्तों की रखवाली के लिए 18 जेलकर्मियों को लगाया था। इन कर्मियों की हाजिरी बायोमीट्रिक से बनती थी। जब रजिस्टर के ड्यूटी रोस्टर में ड्यूटी बंटती थी तो इन 18 कर्मियों की ड्यूटी सुपरिटेंडेंट के आवास के लिए लगाई जाती थी। ये सभी कर्मी जेल के सफाई कर्मी व अन्य पद वाले हैं। इसका खुलासा तब हुआ जब ड्यूटी रोस्टर रजिस्टर मुख्यालय में जेल आईजी तक पहुंचा। जेल आईजी ने मामले में तत्काल संज्ञान लिया। जितेंद्र सिंह को सोमवार को दूसरी बार शोकॉज किया गया। इधर, सुपरिटेंडेंट आवास में लगे सभी कर्मी वापस जेल में पदस्थापित कर दिए हैं। जितेंद्र सिंह ने 27 नवंबर 2023 को हजारीबाग जेल में योगदान दिया था। जमीन घोटाला में जेल में बंद विनय सिंह को सुविधा उपलब्ध कराने का मामला भी उनसे जोड़कर देखा जा रहा है।

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पूर्व सुपरिटेंडेंट जितेंद्र सिंह पर जेल में बंद सजायाफ्ता कैदियों की दैनिक मजदूरी की आधी राशि वसूलने का भी आरोप है। जेल में करीब 900 सजायाफ्ता कैदी हैं। इनमें से 150 से अधिक कैदियों ने सरकार को यह शिकायत की थी कि उन्हें दैनिक मजदूरी के रूप में मिलने वालनी राशि में से जेलकर्मियों द्वारा आधी ले ली जाती है। मजदूरी की राशि में हिस्सेदारी की वसूली जेलकर्मी भूतपूर्व सैनिक कक्षपाल शंभु साव करता है। कैदियों की शिकायत पर मामले की जांच के लिए आईजी जेल ने तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच टीम का गठन किया है। एआईजी तुषार रंजन समिति के अध्यक्ष हैं। जबकि बंदी कल्याण पदाधिकारी और एक प्रोबेशनल ऑफिसर को जांच में शामिल किया गया है। तुषार रंजन की टीम ने जांच शुरू कर दी है। कक्षपाल शंभू साव को गढ़वा जेल स्थानांतरित कर दिया गया है।

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Hazaribagh Jail Scam: बंदी पारिश्रमिक का नियम क्या कहता है?
जेल नियमों के अनुसार सजायाफ्ता कैदियों को उनकी योग्यता के आधार पर काम दिया जाता है और उसी के अनुरूप पारिश्रमिक मिलता है। 2015 के नियम के तहत अकुशल कैदी को 91 रुपए, कुशल को 113 रुपए और अति कुशल को 144 रुपए प्रतिदिन दिया जाता है। मजदूरी का एक तिहाई हिस्सा पीड़ित पक्ष को दिया जाता है। कैदियों ने यह भी आरोप लगाया है कि योग्यता विभाजन में भी मनमानी की जाती है, जिससे उनकी मजदूरी प्रभावित होती है।

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