रांचीः झारखंड में हुए शराब घोटाला मामले में भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत जांच कर रही भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने पूर्वी सिंहभूम जमशेदपुर के उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी से सोमवार को पूछताछ की।
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उन्हें मंगलवार को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया है। आइएएस अधिकारी कर्ण सत्यार्थी पूर्व की उत्पाद नीति के दौरान उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के आयुक्त उत्पाद थे। उनके पास झारखंड राज्य बेवरेजेज कारपोरेशन लिमिटेड (जेएसबीसीएल) के प्रबंध निदेशक थे।उन्होंने विभाग में अनियमितता पकड़ी थी। इसका असर यह हुआ कि बाद में शराब घोटाले का मामला पकड़ा। एसीबी ने इससे पूर्व रामगढ़ के उपायुक्त फैज अक अहमद मुमताज से पूछताछ की थी।
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वे भी पूर्व की उत्पाद नीति के दौरान तत्कालीन आयुक्त उत्पाद सह जेएसबीसीएल के प्रबंध निदेशक थे। एसीबी ने आइएएस अधिकारी कर्ण सत्यार्थी से उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के टेंडर पर ही सवाल पूछे।उनसे पूछा गया कि पूर्व सचिव विनय कुमार चौबे के समय फर्जी बैंक गारंटी देने वाली प्लेसमेंट एजेंसियों को सरकारी खुदरा शराब दुकानों में मैनपावर आपूर्ति का ठेका दिया गया था। इससे विभाग को राजस्व का नुकसान भी पहुंचा।
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इन एजेंसियों के कर्मचारियों ने एमआरपी से अधिक कीमत पर शराब की बिक्री की और कमीशन का पैसा भी कुछ अधिकारियों तक पहुंचाया। एसीबी ने आइएएस कर्ण सत्यार्थी से पूछा कि फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद उन्होंने क्या कार्रवाई की।अगर कार्रवाई नहीं की तो क्यों नहीं की। इसके लिए कोई दबाव था। एसीबी के कई प्रश्नों का कर्ण सत्यार्थी ने संतोषजनक जवाब दिया है। बताया जा रहा है कि कर्ण सत्यार्थी एसीबी का सरकारी गवाह बन सकते हैं।मंगलवार को भी इससे जुड़े प्रश्न ही उनसे पूछे जाने हैं। बताया जा रहा है कि आइएएस अधिकारी कर्ण सत्यार्थी ने शराब घोटाले से संबंधित कई अहम जानकारियां भी एसीबी को दी है, जो अनुसंधान के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण हैं।




