पटनाः AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने वादा किया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अगर मुस्लिम बहुल सीमांचल क्षेत्र के साथ “न्याय” करें और “सांप्रदायिकता” को दूर रखें, तो उनकी पार्टी बिहार में राजग सरकार को “पूर्ण सहयोग” देगी।
मां के दूध में मिला यूरेनियम, बिहार के 6 जिलों से आई चौकाने वाली रिपोर्ट, नवजात पर मंडराया कैंसर का खतरा
सीमांचल के दौरे पर हैं ओवैसी
हैदराबाद के सांसद ने सीमांचल के अपने दो दिवसीय दौरे के दौरान यह टिप्पणी की।सीमांचल बिहार का पूर्वोत्तर क्षेत्र है, जहां से ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के पांच उम्मीदवारों ने हाल के विधानसभा चुनावों में जीत हासिल की है।
मोदी-नीतीश के साथ मैथिली ठाकुर की आपत्तिजनक पोस्ट को लेकर कार्रवाई, गुजरात पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार
सीमांचल के साथ न्याय करे सरकार: ओवैसी
ओवैसी ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “हम पटना में बनी नई सरकार को शुभकामनाएं देते हैं। हम पूरा सहयोग देने का वादा भी कर सकते हैं, बशर्ते वह सीमांचल क्षेत्र के साथ न्याय करे और सांप्रदायिकता को भी दूर रखे।” सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में सबसे बड़ी साझेदार भाजपा आरोप लगाती रही है कि सीमांचल में बड़े पैमाने पर “घुसपैठ” हो रही है, जिससे क्षेत्र में “जनसांख्यिकीय असंतुलन” पैदा हो रहा है।
पटना के PMCH में युवती से छेड़खानी, ECG जांच के दौरान निजी अंगो को छूने लगा कर्मचारी
सभी के लिए लड़ती है AIMIM: ओवैसी
ओवैसी ने कहा, “एआईएमआईएम सिर्फ मुसलमानों के लिए ही नहीं, बल्कि सीमांचल में रहने वाले सभी लोगों के लिए लड़ती रही है, जहां दलितों और आदिवासियों की भी अच्छी आबादी है। हम उम्मीद करते हैं कि नई सरकार इस उपेक्षित क्षेत्र पर ध्यान देगी और पटना और राजगीर तक ही सीमित नहीं रहेगी।”
खान सर से पढ़ने गई लड़की, गुजारा करने को ढूंढी पार्ट टाइम जॉब, तभी पहुंच गई रेड लाइट एरिया
बिहार की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें
ओवैसी ने राजद पर निशाना साधते हुए कहा, “यह साबित हो गया है कि जो लोग भाजपा को रोकने के नाम पर मुसलमानों के वोट मांगते हैं, वे उस पार्टी को नहीं रोक पाएंगे। इसलिए, जो लोग एमवाई (मुस्लिम यादव) गठबंधन पर भरोसा कर रहे हैं, उन्हें पुनर्विचार करना चाहिए।” बता दें कि राजद ने विधानसभा चुनावों में गठबंधन के लिए एआईएमआईएम के अनुरोध को ठुकरा दिया था और इस बार विधानसभा चुनावों में राजद की सीटें घटकर 25 रह गईं, जो पांच साल पहले के 75 सीटों के आंकड़े का महज एक तिहाई है।




