डेस्कः भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए सीबीआई की टीम ने बिहार के हाजीपुर में रेलवे निर्माण विभाग के चीफ इंजीनियर आलोक कुमार को गिरफ्तार किया। इनके साथ सीबीआई ने तीन अन्य लोगों को भी दबोचा। सीबीआई ने हाजीपुर जंक्शन परिसर स्थित कार्यालय में रेड की। इस दौरान पेपर में लपेटकर अलग-अलग रखे 98 लाख 81 हजार 500 रुपये कैश मिले।
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12 घंटे तक कार्रवाई : इतने रुपये मिले थे कि पैसा गिनने के लिए मशीन मंगवानी पड़ी। छापेमारी में केंद्रीय जांच एजेंसी के 12 अफसर शामिल थे। यह कार्रवाई 12 घंटे तक चली. इस मामले में सीबीआई ने इंजीनियर आलोक कुमार और उनके क्लर्क आलोक दास के साथ-साथ कार्यालय अधीक्षक, उप मुख्य अभियंता (वाणिज्य) कार्यालय, परियोजना प्रबंधक को गिरफ्तार किया है। डिप्टी चीफ इंजीनियर आलोक कुमार छपरा के रहने वाले हैं। वहीं उनका क्लर्क झारखंड का रहने वाला है।
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‘रेलवे को नुकसान पहुंचाया गया’ : नाम नहीं छापने की शर्त पर एक सीबीआई अधिकारी ने बताया था कि उपमुख्य अभियंता आलोक कुमार, निजी ठेकेदार गोविंद भुल्लर, सूरज प्रसाद और राजा की मिलीभगत थी। गलत बिल, मेजरमेंट बुक में हेरफेर और खराब निर्माण सामग्री की अनदेखी कर ठेकेदार को फायदा पहुंचाया गया था। इससे रेलवे को नुकसान हुआ। इस मामले में 17 नवंबर को पटना में मामला दर्ज किया गया था।
CBI Arrests Railway Deputy Chief Engineer and 3 others in Hajipur in a Bribery Case pic.twitter.com/6ytMOfXEMs
— Central Bureau of Investigation (India) (@CBIHeadquarters) November 19, 2025
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CBI के पहुंचते ही मचा हड़कंप : जानकारी के अनुसार, हाजीपुर रेलवे स्टेशन परिसर स्थित निर्माण विभाग के उप चीफ इंजीनियर के कार्यालय के सामने सीबीआई के अधिकारियों की गाड़ी लगते ही हड़कंप मच गया। अधिकारी गाड़ी से उतरते ही सीधे रेलवे के निर्माण विभाग की दूसरी मंजिल पर स्थित उप चीफ इंजीनियर (द्वितीय) आलोक कुमार के कार्यालय में पहुंच गए।
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दो साल पहले हाजीपुर में हुई थी पोस्टिंग : कार्यालय के अधिकारी कुछ समझ पाते उससे पहले सीबीआई के अधिकारियों ने सभी को दबोच लिया। कार्यालय में सघन तलाशी ली गई, जिसमें एक करोड़ से अधिक कैश मिला। रेलवे विभाग के निर्माण विभाग का कार्यालय पटना के महेंदू में है। लेकिन हाजीपुर-सुगौली रेलखंड के निर्माण को लेकर हाजीपुर कार्यालय से उसकी निगरानी की जा रही थी। निर्माण कार्य को लेकर ही आलोक कुमार की तैनाती दो साल पहले हाजीपुर में की गई थी।




