रांचीः झारखंड कांग्रेस ने नगर निकाय चुनाव के लिए 49 वरिष्ठ नेताओं को पर्यवेक्षक बनाया था। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने निकाय चुनाव की तैयारी और पर्यवेक्षकों को दिए गए टास्क की प्रगति की समीक्षा के लिए गुरुवार को कांग्रेस भवन में बैठक बुलाई, लेकिन इसमें सिर्फ चार पर्यवेक्षक ही पहुंचे। प्रदेश अध्यक्ष ने इस मुद्दे पर प्रदेश प्रभारी के राजू से बात की और तत्काल प्रभाव से पर्यवेक्षकों की कमेटी को भंग कर दिया। अब इसकी जिम्मेदारी संबंधित जिलाध्यक्ष और जिला पर्यवेक्षकों को सौंप दी गई है।
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इस बैठक में प्रदेश अध्यक्ष के अलावा कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर और अमूल्य नीरज खलखो विशेष रूप से उपस्थित थे। लेकिन पर्यवेक्षकों में सरायकेला नगर पंचायत के पर्यवेक्षक राज बागची, आदित्यपुर नगर परिषद के अजय सिंह, चाईबासा नगर परिषद के त्रिशानु रॉय और मंझगांव नगर पंचायत के पर्यवेक्षक सुधीर चंद्रवेशी बैठक में पहुंचे।
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प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि निकाय चुनाव के लिए पर्यवेक्षकों की कमेटी को जो जिम्मेदारी सौंपी गई थी, उसका काम संतोषजनक नहीं मिला। इसलिए कमेटी की अधिसूचना ही वापस ले ली गई। जो पर्यवेक्षक इस बैठक में नहीं आए, उनमें से कई ने पार्टी द्वारा सौंपी गई दूसरी जिम्मेदारियों की जानकारी देते हुए यहां न आने की सूचना दी थी।
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जमीनी पकड़ बनाने के लिए नियुक्ति किए थे पर्यवेक्षक
निकाय चुनाव के लिए राज्य के सभी नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत स्तर पर पर्यवेक्षक नियुक्ति किए गए थे। इन पर्यवेक्षकों में बड़े-बड़े नाम थे। इनमें मंत्री, पूर्व मंत्री, विधायक, पूर्व विधायक, सांसद और पूर्व सांसद शामिल थे। इन्हें पर्यवेक्षक बनाने के पीछे सोच थी कि उन्होंने हाल ही में लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ा है। वे निकाय क्षेत्रों में काम करने वाले सक्रिय कार्यकर्ताओं की अच्छी तरह से पहचान कर सकते हैं, और उन्हें जिम्मेदारी देकर काम ले सकते है। सभी 49 निकाय क्षेत्रों में प्रदेश कांग्रेस की ओर से 6 जून को ही पर्यवेक्षकों की नियुक्ति से संबंधित अधिसूचना जारी की गई थी। करीब पांच माह में अधिसूचना वापस ले ली गई।



