हिंडाल्को ने ताना-बाना समारोह में कोसा बुनकरों को किया सम्मानित

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October 15, 2025

Hindalco felicitates silk weavers at the Weave Ceremony

रायगढ़/चांपा। कोसा रेशम बुनाई की समृद्ध परंपरा को सशक्त बनाने के उद्देश्य से हिंडाल्को इंडस्ट्रीज की सामाजिक पहल कोसला आजीविका एवं सामाजिक फाउंडेशन ने बुधवार को ‘ताना-बाना समारोह’ का आयोजन किया। इस अवसर पर चांपा और आसपास के क्षेत्रों की 24 महिला बुनकरों को उनके उत्कृष्ट कार्य और योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

इस सम्मान समारोह में हिंडाल्को इंडस्ट्रीज के प्रबंध निदेशक सतीश पाई, सीईओ (स्पेशियलिटी एल्युमिना एंड केमिकल्स) एवं निदेशक-कोसला सौरभ खेड़ेकर, तथा बिजनेस हेड कैलाश पांडेय ने संयुक्त रूप से बुनकरों, रंगरेज़ों और कोसा धागा निर्माताओं को सम्मानित किया।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई। इस अवसर पर कोसला समुदाय के कारीगरों, बुनकरों और कोसा सूत निर्माताओं ने एक मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। अपने संबोधन में सतीश पाई ने कहा, “हिंडाल्को का उद्देश्य है कि कोसला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिले। हम चाहते हैं कि कोसा बुनाई की परंपरा सिर्फ जीवित न रहे, बल्कि यह एक आत्मनिर्भर और समृद्ध व्यवसाय बने। रायगढ़ की अपनी पहली यात्रा में मैंने कोसा उत्पादन को देखा था और तभी तय किया था कि इस कला को हमें देश-विदेश तक पहुंचाना है।”

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सौरभ खेड़ेकर ने कहा, “कोसला परिवार के प्रत्येक सदस्य का योगदान अमूल्य है। हमारा लक्ष्य पारंपरिक बुनाई की इस विरासत को सुरक्षित रखते हुए इसे आधुनिक जरूरतों के अनुरूप विकसित करना है। हम कारीगरों के लिए ऐसे अवसर सृजित कर रहे हैं जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त हों और अपनी कला को विश्व स्तर पर प्रदर्शित कर सकें।” उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के कोसा सिल्क से बनी हाथ से बुनी साड़ियां, दुपट्टे और स्टोल अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी खास पहचान बना रही हैं।

समारोह में रायगढ़ घराने की प्रसिद्ध कथक नृत्यांगना निहारिका यादव ने अपनी मनमोहक प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनका प्रदर्शन कोसा बुनाई की सांस्कृतिक विरासत को सुंदरता से अभिव्यक्त करता रहा। सीईओ-कोसला नीता शाह ने कहा, “ताना-बाना समारोह हमारे कारीगरों की मेहनत, समर्पण और सृजनशीलता का उत्सव है। यह उनके हुनर को सम्मानित करने और समाज के सामने प्रस्तुत करने का माध्यम है।”

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कार्यक्रम में हिंडाल्को के एडवाइजर देवाशीष घोष, छत्तीसगढ़ राज्य रेशम उत्पादन विभाग के सहायक संचालक मधु कुमार चंदन, तथा बुनकर सेवा केंद्र रायगढ़ के सहायक निदेशक विजय सवनेकर भी उपस्थित थे। कोसला से जुड़े बुनकर खुदीराम देवांगन ने कहा, “कोसला हमारे लिए केवल संस्था नहीं, बल्कि मां के समान है। इसने हमारे जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। अब हम पहले से ज्यादा कमा रहे हैं और बचत भी कर पा रहे हैं।” कोसला आजीविका और सामाजिक फाउंडेशन आज छत्तीसगढ़ के कोसा रेशम बुनकरों को सशक्त बनाकर न केवल उनकी परंपरा को जीवित रख रहा है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रहा है।

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