रांचीः 1993 बैच के आईएएस अधिकारी अविनाश कुमार झारखंड के 28वें मुख्य सचिव बने है। उनके मुख्य सचिव बनने के बाद बिहार के सीतामढ़ी स्थित उनके गांव में जश्न का माहौल है। सीतामढ़ी के विररख पंचायत अंतर्गत बखरी गांव में खुशी की लहर दौड़ रही है। अविनाश कुमार और उनके बड़े भाई अमिताभ ठाकुर दोनों की पढ़ाई आईआईटी कानपुर से एक साथ हुई। अमिताभ ठाकुर यूपी कैडर के आईपीएस अधिकारी बने और अविनाश कुमार बिहार कैडर जो वर्तमान में झारखंड कैडर है।
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पंचायत के मुखिया विनोद शाही ने बताया कि अविनाश कुमार कड़क मिजाज के आईपीएस अधिकारी बनना चाहते थे, पर ऐसा नहीं हुआ और वो आईएएस अधिकारी बनें, वहीं उनके बड़े भाई अमिताभ ठाकुर आईएएस बनना चाहते थे लेकिन वो आईपीएस बन गए। इनके पिता तपेश्वर नारायण ठाकुर बोकारो स्टील फैक्ट्री में इंजीनियर के पर से सेवानिवृत होने के बाद बोकारो सिविल कोर्ट में ही वकालत करते हैं। उत्तर प्रदेश में 10 जिलों में पुलिस कप्तान रहे अमिताभ ठाकुर अनिवार्य सेवानिवृत्ति से पहले यूपी पुलिस में आईजी के पद पर थे
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अविनाश कुमार और अमिताभ ठाकुर दोनों कड़क और ईमानदार अधिकारी माने जाते है। यूपी के चर्चित आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को जबरन मार्च 2021 में रिटायर्ड कर दिया गया। गृह विभाग की स्क्रीनिंग में अमिताभ ठाकुर सहित तीन आईपीएस अधिकारी को सरकारी सेवा के लिए अनुपयुक्त पाया गया। अमिताभ ठाकुर उस समय आईजी रूल्स एंड मैनुअल के पद पर कार्यरत थे।
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अमिताभ ठाकुर पर हुई कार्रवाई के समय अविनाश कुमार झारखंड सरकार में उर्जा विभाग के प्रधान सचिव थे। उन्होंने ईमानदार छवि के अधिकारी माने जाने वाले अपने बड़े भाई के खिलाफ हुई कार्रवाई पर आक्रोश जारी कर सोशल मीडिया अकाउंट पर अपनी भावनाएं स्पष्ट रूप से प्रकट की थी। अविनाश कुमार ने कविता के जरिये अपने भाई पर गर्व महसूस किया था। उन्होंने कविता के माध्यम से अपनी स्वर्गीय मां को विश्वास और भरोसा दिलाया था कि मेरा भाई गिरेगा नहीं, मरेगा नहीं, लड़ेगा जरूर और झुकेगा नहीं। इसकी झलक अमिताभ ठाकुर दिखा चुके है।
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इस पोस्ट के बाद अविनाश कुमार ने भगत सिंह की तस्वीर साझा किया था। जिसपर लिखा था कि ‘मेरे जज्बातों से इस कदर वाकिफ है कलम मेरी…मैं इश्क भी लिखना चाहूं तो इंकलाब लिखा जाता है।’अमिताभ ठाकुर सबसे पहले वर्ष 2006 में तब चर्चा में आए थे जब उन्होंने उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के समधी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया था। अमिताभ इन दिनों फिरोजाबाद के एसपी थे । तब मुलायम सिंह यादव के समधी रामवीर सिंह ने जसराना में उन्हें थप्पड़ मार दिया था । जिसके बाद उन्होंने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया था । यहां से अमिताभ की सत्ताधारियो से लड़ाई शुरू हुई और आज तक चली आ रही है।
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अमिताभ ठाकुर और उनकी पत्नी नूतन ठाकुर ने वर्ष 2015 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रसाद पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कई शिकायतें दर्ज कराई । तभी जुलाई 2015 में मुलायम सिंह यादव ने अमिताभ ठाकुर को फोन करके फिरोजाबाद का किस्सा याद दिलाते हुए सुधर जाने की नसीहत दी थी। अमिताभ ठाकुर ने इसे धमकी बताते हुए मुलायम सिंह यादव के खिलाफ ही धमकी का मुकदमा दर्ज करा दिया था।हमेशा हुकूमत के निशाने पर या फिर उसकी आंख की किरकिरी साबित होने वाले तथा अपने बेबाक बोल के लिए चर्चित अमिताभ ठाकुर उस समय चर्चा में आए थे जब उन्होंने 11 दिसंबर 2008 को यूपी के थानों में इंस्पेक्टर स्तर के पुलिस अफसरों को ही थानाध्यक्ष बनाए जाने को लेकर आदेश जारी कर डाला।






