व्यवसायिक दृष्टिकोण से ब्लैक बंगाल नस्ल बकरी पालन बेहद उपयोगी – डीन वेटनरी

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March 29, 2022

बकरीपालन पर तीन दिवसीय दो प्रशिक्षणों का समापन
रांची। बीएयू में संचालित आईसीएआर दृ अखिल भारतीय समन्वित बकरीपालन अनुसंधान परियोजना के ट्राइबल सब प्लान कार्यक्रम के तहत बकरीपालन की उन्नत प्रौद्योगिकी विषयक तीन दिवसीय दो प्रशिक्षणों का समापन मंगलवार को हुआ. इन दो प्रशिक्षणों में रांची जिले के अनगड़ा प्रखंड के विभिन्न गाँवो के कुल 100 जनजातीय किसानों ने भाग लिया. जिनमें 50 महिला एवं 50 पुरूष शामिल थे.
प्रशिक्षणों के दौरान झारखण्ड के ग्रामीण परिवेश में बकरीपालन का महत्त्व, विभिन्न नस्ल की विशेषताएँ, आवास व्यवस्था, विभिन्न अवस्थाओं में दाना मिश्रण, बंध्याकरण एवं आवश्यक दवा, फार्म प्रबंधन के तरीके, गर्भवती बकरी की पहचान व रख-रखाव, मेमनों में मृत्य दर कम करने के उपाय, प्रजनन की समस्या व निदान, प्रमुख रोग एवं बीमारियों की पहचान एवं निदान, टीकाकरण का महत्त्व तथा आय-व्यय एवं लाभ से अवगत कराया गया. प्रशिक्षाणार्थियों को पशु चिकित्सा संकाय स्थित सूकर, मुर्गी एवं बकरी फार्म में प्रत्यक्ष रूप से काम दृ काज एवं वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन की व्यावहारिक जानकारी दी गई. प्रशिक्षकों में डॉ सुशील प्रसाद, डॉ रविन्द्र कुमार, डॉ अभिषेक कुमार, डॉ प्रवीण कुमार, डॉ निशांत पटेल, डॉ हिमांशु कु हिमकर, डॉ निर्मला मिंज, मो मोअजम एवं मो नयीम शामिल थे.
समापन समारोह के अवसर पर डीन वेटनरी एवं परियोजना अन्वेंषक (बकरीपालन अनुसंधान) डॉ सुशील प्रसाद ने प्रशिक्षाणार्थियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किया. प्रतिभागियों से प्रशिक्षण से सबंधित फीडबेक जाना और उनकी जानकारी एवं अनुभवों को साझा की. संबोधन में कहा कि ग्रामीण बेरोजगारी और गरीबी को दूर करने में बकरी पालन एक आसान साधन है. बकरी की ब्लैक बंगाल नस्ल काफी अच्छी है. व्यवसायिक दृष्टिकोण से प्रदेश में उपयोगी साबित हो रही है. सौभाग्य से झारखंड में यह नस्ल उपलब्ध है.
उन्होंने बताया कि आईसीएआर – बकरीपालन अनुसंधान परियोजना के अधीन राज्य के बाराबंकी (जमशेदपुर), पलाजोरी (देवघर), टिको (लोहरदगा) और (चामगुरु) रांची जिलों के विभिन्न गाँवों के प्रशिक्षित किसानों के माध्यम से बकरी नस्ल सुधार, संरक्षण एवं प्रजनन द्वारा नस्ल की वृद्धि को बढ़ावा दिया जा रहा है. इन केन्द्रों से उन्नत ब्लैक बंगाल नस्ल उचित दर पर प्राप्त की जा सकती है. मार्च 2021 में इन केन्द्रों में ब्लैक बंगाल नस्ल की 11250 बकरियां हैं.

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