विजय माल्या और नीरव मोदी भारत लाने की सुगबुगाहट तेज, ब्रिटिश टीम ने किया तिहाड़ जेल का दौरा

Picture of Live Dainik

Live Dainik

September 7, 2025

vijay_mallya_and_nirav_modi

ब्रिटेन की क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (CPS) का एक प्रतिनिधिमंडल हाल ही में दिल्ली स्थित तिहाड़ जेल पहुंचा। इसका उद्देश्य जेल की स्थितियों का आकलन करना था ताकि विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे हाई-प्रोफाइल भगोड़े बिजनेसमैन के प्रत्यर्पण मामलों में भारत की स्थिति मजबूत हो सके। गृह मंत्रालय (MHA) की ओर से आयोजित इस दौरे को भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, CPS टीम जेल की सुविधाओं से काफी हद तक संतुष्ट रही।

इस दौरान भारतीय अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि आवश्यकता पड़ने पर तिहाड़ परिसर में ही एक विशेष ‘एनक्लेव’ तैयार किया जा सकता है, जहां हाई-प्रोफाइल प्रत्यर्पित कैदियों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप रखा जाएगा और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

नीतीश सरकार के मंत्री पर सरकारी जमीन कब्जा करने का आरोप, BJP नेता सहित 37 को प्रशासन ने भेजा नोटिस

एक अधिकारी ने बताया कि जुलाई में आए इस चार सदस्यीय दल में दो CPS विशेषज्ञ और ब्रिटिश उच्चायोग के दो अधिकारी शामिल थे। उन्होंने तिहाड़ के हाई-सिक्योरिटी वार्ड का दौरा किया और कुछ कैदियों से बातचीत भी की। दूसरे अधिकारी ने कहा कि CPS टीम ने गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और जांच एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर प्रत्यर्पण मामलों और ब्रिटिश अदालतों की कानूनी आवश्यकताओं पर चर्चा की।

See also  जसीडीह के पास जयनगर-राऊरकेला एक्सप्रेस के एसी कोच में लूट, चिल्लाते रहे यात्री नहीं आई जीआरपी

कई भगोड़े अपराधी, जिनमें आर्म्स डीलर संजय भंडारी और 750 करोड़ रुपए के धोखाधड़ी मामले में फरार विर्करण अवस्थी और उनकी पत्नी रितिका अवस्थी शामिल हैं, ने ब्रिटिश अदालतों में दलील दी थी कि उन्हें भारत लाए जाने पर तिहाड़ जेल में उत्पीड़न, हिंसा या असुरक्षा का खतरा रहेगा। इन्हीं तर्कों के आधार पर ब्रिटेन की उच्च अदालत ने इस साल फरवरी में भंडारी का प्रत्यर्पण खारिज कर दिया था। इसी का हवाला देते हुए अप्रैल में वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट्स कोर्ट ने अवस्थी दंपति को भी बिना शर्त जमानत दे दी थी।

रांची में जमीन विवाद को लेकर दो गुटों में जमकर मारपीट,गाड़ी को किया आग के हवाले

इन फैसलों के बाद CPS ने भारत सरकार से आग्रह किया कि वे प्रत्यर्पित कैदियों की सुरक्षा और यूरोपीय मानवाधिकार संधि (ECHR) के अनुच्छेद 3—जो यातना या अमानवीय व्यवहार पर रोक लगाता है के अनुपालन की गारंटी दे। जून में भारत सरकार ने ब्रिटेन को आश्वासन दिया कि प्रत्यर्पित अवस्थी दंपति से भारत लाने के बाद कोई पूछताछ या यातना नहीं की जाएगी।

See also  दावोस से झारखंड के लिए निवेश और साझेदारी की नई राह, हेमंत सोरेन को इन कंपनियों से मिला निवेश का न्योता

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत की एजेंसियों के 178 प्रत्यर्पण अनुरोध विभिन्न देशों में लंबित हैं। इनमें से लगभग 20 मामले केवल ब्रिटेन में लंबित हैं। इनमें विजय माल्या, नीरव मोदी, अंडरवर्ल्ड डॉन इकबाल मिर्ची की पत्नी हाजरा मेमन, उनके बेटे असीक और जुनैद मेमन सहित कई ब्रिटेन-स्थित खालिस्तानी नेताओं के नाम शामिल हैं।

अवैध शराब पकड़ने गए पुलिस टीम को आदिवासियों ने दौड़ा-दौड़ा कर पीटा, हाथ जोडता रहा जवान फिर नहीं बख्शा

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now

Trending Now