चंद्रयान-5 मिशन में शामिल होगा जापान, इसरो के साथ हो गई बड़ी डील; क्या हैं मायने

Picture of Live Dainik

Live Dainik

August 30, 2025

JAPAN-INDIA

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों जापान की यात्रा पर हैं। भारत और जापान ने मिलकर मून मिशन को आगे बढ़ाने के लिए समझौता किया है। दोनों देशों ने ‘चंद्रयान-5’ को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर भेजने के लिए एक समझौते पर साइन किए हैं। इसरो और जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (Jaxa) के बीच यह पैक्ट साइन किया गया है जिसमें। जाक्सा के उपाध्यक्ष मातसुरा मायुमी और जापान में भारत के राजदूत सिबी जॉर्ज शामिल थे

चंद्रयान-5 मिशन का उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव में स्थायी रूप से छायांकित क्षेत्र (पीएसआर) के आसपास के क्षेत्र में चंद्रमा के पानी समेत अस्थिर पदार्थों का अध्ययन करना है। इस मिशन को जाक्सा द्वारा अपने एच3-24एल प्रक्षेपण यान से प्रक्षेपित किया जाएगा, जिसमें इसरो निर्मित चंद्र लैंडर होगा, जो जापान निर्मित चंद्र रोवर को ले जाएगा। इसरो, चंद्र लैंडर के विकास के अलावा, चंद्र ध्रुवीय क्षेत्र में मौजूद वाष्पशील पदार्थों के अन्वेषण और यथास्थान विश्लेषण के लिए मिशन के लिए कुछ वैज्ञानिक उपकरण विकसित करेगा।

See also  Sakshi Malik बनीं Time magazine की 100 सबसे प्रभावशाली शख्सियों में एक,बीजेपी सांसद बृजभूषण पर लगाए थे यौन शोषण के आरोप

बिहार में ग्रामीण विकास विभाग के इंजीनियर के ठिकानों पर छापेमारी, पटना से गयाजी तक निगरानी की रेड

जापान की यात्रा के दौरान ‘द योमिउरी शिंबुन’ को दिए एक साक्षात्कार में कहा, ‘मुझे खुशी है कि भारत और जापान चंद्रयान श्रृंखला के अगले संस्करण या लूपेक्स (चंद्र ध्रुवीय अन्वेषण) मिशन के लिए हाथ मिला रहे हैं। इससे चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर स्थायी रूप से छायांकित क्षेत्रों के बारे में हमारी समझ और गहरी होगी।’ प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि भारत और जापान की वैज्ञानिक टीम अंतरिक्ष विज्ञान की सीमाओं को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करेंगी।

पीएम मोदी ने कहा, ‘अंतरिक्ष में हमारी साझेदारी न केवल हमारे क्षितिज का विस्तार करेगी, बल्कि हमारे आसपास के जीवन को भी बेहतर बनाएगी।’उन्होंने कहा कि भारत की अंतरिक्ष यात्रा देश के वैज्ञानिकों के दृढ़ संकल्प, कड़ी मेहनत और नवाचार की कहानी है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘चंद्रयान-3 के चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर ऐतिहासिक ‘लैंडिंग’ से लेकर अंतरग्रहीय मिशनों में हमारी प्रगति तक, भारत ने लगातार यह प्रदर्शित किया है कि अंतरिक्ष अंतिम सीमा नहीं है, यह अगली सीमा है।’प्रधानमंत्री ने कहा, ‘अंतरिक्ष विज्ञान का प्रभाव हमारे दैनिक जीवन में कृषि, आपदा प्रबंधन से लेकर संचार और उससे भी आगे की प्रगति से जुड़ा है।’

See also  ट्रेन से गिरकर समस्तीपुर कोर्ट के मुंशी की मौत, बदमाशों को पकड़ने के दौरान हादसा

पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह हत्याकांड: पुलिस से ये गलतियां नहीं होती तो संजीव सिंह को हो जाती उम्रकैद… पढ़िए आखिर कैसे बच गए बीजेपी नेता ?

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now

Trending Now