टेंडर की शर्तें अचानक बदलने से नाराज संवेदक, लोहरदगा डीसी के सामने पेश किया गड़बड़ियों के सबूत

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August 28, 2025

lohardaga tendar

लोहरदगा: जिले के संवेदकों ने जिला परिषद् में टेंडर शर्तों को खास लोगों को फायदा पहुंचाने के मकसद से अचानक बदलाव करने का आरोप लगाया है । पारदर्शिता की मांग करते हुए संवेदकों ने डीसी डॉक्टर ताराचंद से दखल देने की मांग की है  । यह आपत्ति जिला परिषद लोहरदगा की ओर से जारी निविदा संख्या-04/2025-26 (जेपी) को लेकर  है ।  संवेदकों ने जिला परिषद् अध्यक्ष के सामने भी अपनी बातें रखीं और इन शिकायतों की प्रतिलिपि डीडीसी को दी ।

टेंडर की शर्तें बदलने से किसे फायदा ?

संवेदकों का कहना है कि इस बार टेंडर प्रक्रिया में जो नए नियम एवं शर्तें लागू की गई हैं, उससे अधिकांश संवेदक टेंडर में भाग नहीं ले पाएंगे। संवेदकों ने लोहरदगा उपायुक्त डा. कुमार ताराचंद से हस्तक्षेप कर इस पर रोक लगाने और पूर्व की निविदा की तरह नियम बहाल करने की मांग की है। बताया गया कि जिला परिषद्, लोहरदगा के अधीन 50 लाख से 250 करोड़ रुपये तक की श्रेणी के कार्यों में 27 संवेदक पंजीकृत हैं। जिला परिषद द्वारा हाल ही में निविदा संख्या-04/2025-26 के तहत दो कार्य जारी किए गए हैं। इसमें भाग लेने के लिए निविदा के नियम एवं शर्त के क्रमांक-09 में यह अनिवार्य किया गया है कि संवेदक के पास पिछले तीन वर्षों में प्राक्कलित राशि का 100 प्रतिशत एकल भवन निर्माण कार्य का अनुभव होना चाहिए।संवेदकों का कहना है कि यह शर्त अचानक और अनुचित रूप से बदालव कर दी गई है। इससे पहले निविदा संख्या-02/2025-25 (डीई) में प्राक्कलित राशि का केवल 50 प्रतिशत किसी भी सिविल वर्क के अनुभव को मान्य किया गया था, लेकिन अब केवल 100 प्रतिशत एकल भवन निर्माण कार्य का अनुभव मान्य करने और वह भी शत-प्रतिशत की शर्त लगाने से लगभग 22 से 25 संवेदक नियम के अभाव में निविदा प्रक्रिया से बाहर हो जाएंगे। जिला परिषद की नई निविदा शर्तों को लेकर संवेदक नाराज हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि यह नियम कुछ चुनिंदा लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाए गए हैं। संवेदकों ने जिला प्रशासन से अपील किया है कि इस मामले में पारदर्शी और संवेदनशील रवैया अपनाया जाए। जिससे कि ज्यादा से ज्यादा संवेदक बीड एवं टेंडर में भाग ले सकें। अब देखना यह है कि उपायुक्त इस मामले में संवेदकों की मांग पर क्या फैसला लेते हैं।

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संवेदकों ने जताई नाराजगी

संवेदकों का कहना है कि टेंडर में बदलाव का यह नियम केवल कुछ खास लोगों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से लागू किया गया है। उनका आरोप है कि पारदर्शिता की बजाए शर्तों को पक्षपात पूर्ण तरीके से तैयार किया गया है, ताकि अधिकतर संवेदक खुद ही बाहर हो जाएं और टेंडर प्रक्रिया सीमित हाथों में सिमट जाए।

उपायुक्त से की गई मांग

संवेदकों ने उपायुक्त लोहरदगा से लिखित रूप से अनुरोध किया है कि इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करें। जिला परिषद के रजिस्ट्रर्ड ठेकेदारों ने मांग किया है कि नई शर्तों के तहत जारी निविदा पत्र पर रोक लगाई जाए और पूर्व की तरह ही सरल नियम लागू किए जाएं, ताकि अधिक से अधिक संवेदक निविदा में भाग ले सकें। ठेकेदारों का कहना है कि संवेदकों के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए जिला परिषद को पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया अपनानी चाहिए।

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एकाधिकार करने की कोशिश

इस मुद्दे पर स्थानीय स्तर पर भी चर्चा गर्म हो गई है। संवेदक वर्ग का कहना है कि अगर नियमों में इतने कठोर बदलाव होते रहेंगे, तो छोटे और मध्यम स्तर के संवेदक धीरे-धीरे टेंडर प्रक्रिया से बाहर हो जाएंगे। इससे एकाधिकार की स्थिति बनेगी और विकास योजनाओं पर भी असर पड़ेगा।

पारदर्शिता पर उठ रहे सवाल

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सरकारी टेंडर का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा प्रतिभागियों को अवसर देना होता है, ताकि प्रतिस्पर्धा बढ़े और गुणवत्ता वाले कार्य का चयन हो सके। पर शर्तें इस तरह से तैयार की जाती हैं कि अधिकांश प्रतिभागी बाहर हो जाएं, तो पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

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