गयाजी एयरपोर्ट के कोड ‘GAY’ को लेकर विवाद, BJP सांसद की मांग से LGBTQ एक्टिविस्ट नाराज

गयाजी एयरपोर्ट के कोड 'GAY' को लेकर विवाद, BJP सांसद की मांग से LGBTQ एक्टिविस्ट नाराज

डेस्कः बिहार के गयाजी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के कोड (GAY) को लेकर अब विवाद शुरू हो गया है। दरअसल भारतीय जनता पार्टी के सांसद ने ‘गे’ कोड को बदलने की मांग की है। बीजेपी सांसद डॉक्टर भीम सिंह ने कहना है कि ‘गे’ शब्द को अपमानजनक माना जाता है इसलिए इसे बदला जाना चाहिए। अब इसपर LGBTQ एक्टिविस्ट की प्रतिक्रिया भी आई है। उन्होंने मांग की है कि भाजपा सांसद माफी मांगें। दरअसल भाजपा सांसद डॉ. भीम सिंह ने मंगलवार को राज्यसभा में अतारांकित प्रश्न के माध्यम से गयाजी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का कोड (जीएवाई) होने पर आपत्ति जताते हुए इसमें बदलाव करने की मांग की है।

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उन्होंने कहा है कि अंग्रेजी शब्द जीएवाई (गे) को सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से अपमानजनक और असहज माना जाता है। इस पर संसद में केंद्रीय नागर विमानन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने जवाब दिया कि यह कोड अंतरराष्ट्रीय वायु परिवहन संघ ने तय किया है। इसे सिर्फ बेहद खास परिस्थितियों में ही बदला जा सकता है।

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उन्होंने कहा कि पहले भी एयर इंडिया ने यह कोड बदलने की मांग की थी, लेकिन संघ ने अपने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे कोड स्थायी होते हैं और सिर्फ सुरक्षा जैसी गंभीर वजहों से ही बदले जा सकते हैं। इस पर डॉ. भीम सिंह ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय वायु परिवहन संघ से विशेष अनुरोध कर कोड में बदलाव कराया जाए।

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सांसद से माफी मांगने की मांग
इसपर प्रतिक्रिया देते हुए LGBTQ एक्टिविस्ट ने कहा कि सांसद के बयान से पता चलता है कि वो पूर्वाग्रह से काफी ग्रसित हैं। एक एक्टिविस्ट अरविंद नारायण ने साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट के द्वारा दिए गए एक फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि अदालत ने अपने फैसले में समलैंगिक संबंधों को अपराधमुक्त किया तथा ऐसे लोगों के लिए सम्मान के अधिकार को मान्यता दी। उन्होंने कहा कि उन्हें (भीम सिंह) को खुद को एजुकेट करने की जरुरत है कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जो शासन व्यक्तिगत नहीं बल्कि संवैधानिक नैतिकता है। उन्हें समुदाय से माफी मांगनी चाहिए।
एक अन्य LGBTQ एक्टिविस्ट राजेश श्रीनिवास ने किसी तरह के बदलाव को खारिज किया। उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट के कोड में किसी तरह के बदलाव की जरूरत नहीं है क्योंकि इस शब्द में सांस्कृतिक तौर से कुछ भी गलत नहीं है।

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