नई दिल्ली: भारत निर्वाचन आयोग ने गुरुवार को देश के 17वें उपराष्ट्रपति के चुनाव की औपचारिक घोषणा कर दी है। मौजूदा उपराष्ट्रपति के पद रिक्त होने के कारण यह चुनाव प्रक्रिया शुरू की गई है। गृह मंत्रालय की अधिसूचना संख्या S.O. 3354(E), दिनांक 22 जुलाई 2025 के अनुसार यह पद रिक्त हुआ है।
संविधान के अनुच्छेद 68(2) और राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति चुनाव अधिनियम, 1952 की धारा 4 के अनुसार, रिक्ति उत्पन्न होने के तुरंत बाद चुनाव कराना अनिवार्य है। निर्वाचन आयोग ने आज चुनाव की तिथियों की घोषणा करते हुए बताया कि यदि आवश्यक हुआ तो मतदान 9 सितंबर 2025 (मंगलवार) को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक कराया जाएगा और मतगणना भी उसी दिन की जाएगी।
उप राष्ट्रपति का चुनाव कार्यक्रम:
अधिसूचना जारी होने की तिथि: 7 अगस्त 2025
नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि: 21 अगस्त 2025
नामांकन पत्रों की जांच: 22 अगस्त 2025
नाम वापसी की अंतिम तिथि: 25 अगस्त 2025
मतदान (यदि आवश्यक हुआ): 9 सितंबर 2025
मतगणना (यदि आवश्यक हुई): 9 सितंबर 2025
कैसे होता है उपराष्ट्रपति का चुनाव ?
भारत का उपराष्ट्रपति, संविधान के अनुच्छेद 66 के अंतर्गत, संसद के दोनों सदनों के सदस्यों से बने निर्वाचक मंडल द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली और एकल संक्रमणीय मत (Single Transferable Vote) पद्धति से चुना जाता है। इस बार के निर्वाचक मंडल में कुल 782 सदस्य होंगे — लोकसभा के 543 निर्वाचित सदस्य (1 सीट रिक्त), राज्यसभा के 233 निर्वाचित सदस्य (5 सीट रिक्त), और 12 मनोनीत सदस्य शामिल हैं।
प्रत्येक सांसद का एक मत मूल्य होगा। मतदान पूरी तरह से गुप्त मतदान (Secret Ballot) के माध्यम से होगा और किसी भी परिस्थिति में मत पत्र को सार्वजनिक करना प्रतिबंधित है।
क्या है नामांकन प्रक्रिया और शर्तें:
उम्मीदवार को नामांकन पत्र (फॉर्म-3) खुद या उनके प्रस्तावक/समर्थक के माध्यम से सुबह 11 से दोपहर 3 बजे तक दाखिल करना होगा।
एक उम्मीदवार के नामांकन के लिए कम से कम 20 प्रस्तावक और 20 समर्थनकर्ता सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक हैं।
नामांकन शुल्क ₹15,000 है, जो भारतीय रिजर्व बैंक या सरकारी कोषागार में जमा करना होगा।
एक उम्मीदवार अधिकतम 4 नामांकन पत्र दाखिल कर सकता है।
कहां होगी वोटिंग
मतदान संसद भवन के कक्ष संख्या F-101, वसुंधा भवन, प्रथम तल, में होगा। मतदान के लिए विशेष प्रकार की कलम निर्वाचन आयोग द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी। किसी अन्य कलम से मतदान करने पर मत अवैध माना जाएगा।
चुनाव आयोग के निर्देश और पहल:
किसी भी राजनीतिक दल को अपने सांसदों को वोटिंग के लिए व्हिप जारी करने की अनुमति नहीं है।
चुनाव प्रक्रिया को इको-फ्रेंडली बनाने के लिए प्लास्टिक का उपयोग वर्जित किया गया है और केवल बायोडिग्रेडेबल सामग्री के प्रयोग का निर्देश दिया गया है।
निर्वाचन आयोग ने राज्यसभा के महासचिव को रिटर्निंग ऑफिसर नियुक्त किया है और उनकी सहायता के लिए दो सहायक नियुक्त किए गए हैं।




