नई दिल्ली: देश के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे के पीछे की वजह अब धीरे-धीरे स्पष्ट होती जा रही है। अंग्रेजी के कई प्रतिष्ठित अखबारों के अपने विश्वसनीय सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, धनखड़ अपने कार्यकाल के दौरान खुद को ‘घटती भूमिका’ और ‘सम्मान में कमी’ का शिकार महसूस कर रहे थे। उनके विदेश दौरों में कटौती, राजनयिक प्रोटोकॉल का उल्लंघन और उन्हें उचित स्तर का सम्मान नहीं मिलने जैसी कई घटनाओं ने इस असंतोष को जन्म दिया।
कम विदेशी यात्राओं से नाराजगी?
बताया जा रहा है कि जगदीप धनखड़ ने महसूस किया कि उन्हें विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधित्व से जुड़ी जिम्मेदारियों में अपेक्षित भागीदारी नहीं दी जा रही थी। एक रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने इस बात पर नाराज़गी जताई कि विदेश दौरों की संख्या पहले के उपराष्ट्रपति की तुलना में बेहद कम हो गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि कई मौकों पर उन्हें बिना किसी स्पष्टीकरण के बाहर भेजने से मना कर दिया गया।
प्रोटोकॉल उल्लंघन और ‘सम्मान में कमी’
“The Hindu” और “Economic Times” की रिपोर्टों के मुताबिक, धनखड़ विदेश यात्राओं के दौरान कई बार राजनयिक प्रोटोकॉल में की गई चूक से आहत थे। एक घटना में उन्हें विमान के इकोनॉमी क्लास में भेजा गया, वहीं किसी यात्रा के दौरान होटल में उनके लिए राष्ट्रपति स्तर की सुविधा सुनिश्चित नहीं की गई। वे इस बात को लेकर भी चिंतित थे कि उनके पद के अनुकूल गरिमा का पालन नहीं हो रहा है।
‘राष्ट्रपति भवन’ की अचानक यात्रा और इस्तीफा
धनखड़ ने 21 जुलाई की रात 9 बजे राष्ट्रपति भवन पहुंचकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की और उसी रात इस्तीफा दे दिया। राष्ट्रपति भवन की यह ‘बिना सूचना वाली’ मुलाकात चर्चा का विषय बन गई। उनके इस अचानक फैसले के पीछे न केवल स्वास्थ्य कारण, बल्कि संस्थागत सम्मान और कार्यक्षमता को लेकर गहरा असंतोष था।
बीजेपी के भीतर असहजता, विपक्ष हमलावर
धनखड़ के इस्तीफे को लेकर विपक्ष हमलावर हो गया है और इसे एक ‘संवैधानिक पद की अवहेलना‘ के रूप में देखा जा रहा है। वहीं बीजेपी इसे ‘व्यक्तिगत निर्णय‘ बता रही है और विपक्ष के बयानों को उनके ही शब्दों से काटने की रणनीति बना रही है।




