जिस गांव में माओवादियों का ‘मुख्यालय’ उसका हाल देख बहने लगेंगे आंसू, झोपड़ी में होती है डिलेवरी…बच्चे कई दिनों तक रहते हैं भूखे

Picture of Live Dainik

Live Dainik

June 5, 2025

saranda village

पश्चिमी सिंहभूम: चारो के गोद में नवजात है । आस पास तीन और बच्चे हैं । आदिवासी महिला चारो की संतान हैं ये सब। गांव में कुल 12 परिवार रहते हैं । तस्वीर में नजर आ रहे झोपड़ी में चारो को एक और एक बच्चा हुआ । पहले पूजा-पाठ किया गया फिर डिलेवरी हुई । गांव में कोई अस्पताल नहीं जाता । किसी बच्चे का जन्म अस्पताल में नहीं होता । सब-के-सब जंगल से घिरे इसी गांव में रहते हैं। गांव तक कोई सड़क नहीं जाती इसलिए सरकार भी नहीं आती । यहां आते हैं सिर्फ माओवादी । गांव का पता है सरजोम बुरु । भाकपा माओवादी का ईस्टर्न रिजनल ब्यूरो मुख्यालय।  

माओवादियों का ईस्टर्न जोन हेडक्वार्टर का हाल

saranda village

घर में होती है डिलेवरी, बच्चे रहते हैं भूखे

चारो देवी अकेली नहीं है । सारंडा के जंगल सैकड़ों गांव विकास की किरण तो छोड़िए आधुनिक जरुरतों से भी दूर हैं। बिजली, सड़क, नल का पानी, पढ़ाई, अस्पताल सब यहां के लोगों के लिए बेमानी है । नक्सलियों के कब्जेे में दशकों तक रहने के बाद सरजोमबुरु गांव में बातें तो बराबरी की शोषण की होती रही लेकिन गैरबराबरी और शोषण के सबसे ज्यादा शिकार यहीं के लोग हुए । जिस गांव में माओवादियों का पूर्वी मुख्लायल रहा हो वहां के हालात देख तरस आता है ।

See also  JAC अध्यक्ष नटवा हांसदा ने की मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात, 10-12वीं परीक्षा की तैयारियों की दी जानकारी

saranda village

सारंडा का सरजोमबुरु गांव का हाल

सरजोमबुरु का हर बच्चा कुपोषित है। हर मां.. एनिमिया की शिकार । सरजोमबुरु गांव आकर किसी भी एहसास हो जाएगा कि कम से सौ साल पीछे है झारखंड के कई इलाके । इसके पीछे हैं सबसे बड़ी वजह है माओवादियों का खौफ और प्रशासन और सरकार की उदासीनता ।  गांव तक जाने के लिए एक मात्र कच्ची सड़क है जहां तुम्बा हाका और सरजोमबुरु के मध्य में पुलिया  के क्षतिग्रस्त होने के कारण दो पहिया वाहन से गांव तक पहुंच सकता है । बच्चे दिन भर घर के बाहर बिना कपड़ों के या तो खेलते रहते हैं या फिर सोए रहते हैं। खाने के लिए जंगल से जो मिला उसी के भरोसे चलती है इनकी जिंदगी । अबुआ आवास, मुफ्त राशन, वृद्घा पेंशन, मंईयां सम्मान योजना किसी भी चीज का लाभ इन्हें नहीं मिल पाता।

WhatsApp Image 2025 06 05 at 16.12.29

सरकार की मदद की सख्त जरुरत

अगर वक्त रहते सरजोमबुरु गांव को मदद नहीं पहुंची तो आने वाले दिनों में इस गांव का नाम सिर्फ कागजों में दिखेगा , गांव वाले नजर नहीं आएंगें। खास तौर से महिलाओं और बच्चों के हालात बहुत दयनीय हैं । घरों में प्रवस होने और बिना पौष्टिक आहार के जीवन यापन करने के लिए इन परिवारों को फौरन सरकारी मदद की जरुरत है ।

See also  मुजफ्फरपुर में आभूषण कारोबारी की हत्या ,बदमाशों ने ताबड़तोड़ तीन गोली मारकर मौत के घाट उतारा

 

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now

Trending Now