JJMP के जिस पप्पू लोहरा को पुलिस ने था पाला वही बन गया सिरदर्द तो हो गया काम तमाम, पढ़िए JJMP के बनने और बिखरने की कहानी

JJMP- pappu lohara

लातेहार: इंसास के साथ पप्पू लोहरा, अगर इसकी पहचान बताई नहीं जाए तो लोग इसे सुरक्षाकर्मी समझेंगे। लेकिन झारखंड पुलिस और दूसरी सुरक्षा एजेंसियां अच्छी तरह जानती है कि पप्पू लोहरा उर्फ सोमेद लोहरा  JJMP संगठन का मुखिया और ‘जोनल कमांडर’ था  जिस पर सरकार ने 10 लाख रुपये का इनाम रखा था । पप्पू लोहरा की ये तस्वीर उस वक्त की है जब पुलिस ने माओवादियों के ख़िलाफ़ दुश्मन तैयार किया था और पप्पू लोहरा जैसे पूर्व माओवादियों को एक नया संगठन बनाने का मौका दे बड़े दुश्मन को खात्मे की प्लानिंग बनाई थी लेकिन वक्त के साथ सपोला सपेरे को ही काटने लगा ।

पप्पू लोहरा को पुलिस ने दिया था हथियार!

पप्पू लोहरा आखिकार मौत की नींद सो गया इसके साथ ही लातेहार, पलामू, गढ़वा और चतरा जैसे जिलों के लोगों को भी अब रात में चैन की नींद आएगी । जी हां  JJMP सुप्रीमो और 10 लाख का इनामी पप्पू लोहरा समेत दो उग्रवादियों को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया है।  लातेहार जिले के एसपी कुमार गौरव के नेतृत्व में सीआरपीएफ और झारखंड पुलिस की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जेजेएमपी उग्रवादी संगठन के सुप्रीमो 10 लाख इनामी पप्पू लोहरा और उग्रवादी प्रभात को मुठभेड़ में मार गिराया है । यह मुठभेड़ की घटना लातेहार जिले के इचावार के जंगल में हुई है. दरअसल सुरक्षा बलों  को सूचना मिली थी कि पप्पू लोहार अपने संगठन के सदस्यों के साथ इचावार के जंगल में बड़ी घटना को अंजाम देने के लिए जुटे हुए हैं. जिसके बाद पुलिस अधिकारियों और सुरक्षाबलों के द्वारा सर्च अभियान चलाया गया. सर्च अभियान के दौरान उग्रवादियों ने सुरक्षा बलों को देखते फायरिंग शुरू कर दी. जिसके बाद सुरक्षा बलों ने भी जवाबी कार्रवाई की, इस मुठभेड़ में पप्पू लोहरा समेत दो उग्रवादी मारा गया । 

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कैसे बना JJMP संगठन

सवाल ये उठता है कि कौन है पप्पू लोहरा और क्या है जेजेएमपी । तो बात सबसे पहले जेजेएमपी की यानी की झारखंड जनमुक्ति  परिषद  की शुरुआत 2008 में तब होती है जब माओवादियों के साथ  जाति को लेकर मतभेद हो जाता है । 2007-08 में संजय यादव उर्फ मंजीत जी, जो कि सीपीआई-माओवादी का ‘एरिया कमांडर’ था और जिस पर 15 लाख रुपये का इनाम घोषित था, ने पहले अपना अलग गिरोह बनाया और फिर झारखंड जनमुक्ति परिषद (जेजेएमपी) का गठन किया।

माओवादियों से अलग हुआ संजय

आर्थिक तंगी के चलते संजय ने 2004-05 में माओवादी आंदोलन से जुड़ाव लिया था। धीरे-धीरे उसने 50 सदस्यों का मजबूत कैडर तैयार किया, जिन्हें अत्याधुनिक हथियारों का प्रशिक्षण भी दिया गया। 5 फरवरी 2011 को यादव ने खुद को जेजेएमपी का ‘जोनल कमांडर’ घोषित करते हुए उसने गुमला, लोहरदगा और लातेहार में सक्रियता बढ़ा दी।

संजय कर चुका है सरेंडर

27 मार्च 2018 को ‘नई दिशा’ आत्मसमर्पण नीति और पारिवारिक दबाव के चलते उसने लोहरदगा में डीआईजी अमोल विनायक होमकर के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। आरोप लगे कि पुलिस और सुरक्षा बलों ने माओवादियों से लड़ने के लिए जेजेएमपी को हथियार मुहैया कराए। 2018 में जेजेएमपी के वर्तमान सुप्रीमो पप्पू लोहरा की एक वायरल तस्वीर में वह कोबरा कमांडो के साथ नजर आया। तब वह पुलिस के साथ मिलकर अन्य माओवादी संगठनों के खिलाफ ऑपरेशन चला रहा था।

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JJMP पुलिस के बन गया सिरदर्द

कहा जाता है कि पुलिस भी दबी ज़ुबान यह मानती रही है कि JJMP का इस्तेमाल माओवादियों को खत्म करने के लिए किया गया था । लेकिन अब ये संगठन झारखंड के लिए नासूर बन चुका है। लेकिन जब जेजेएमपी खुद खतरा बनने लगा, तो सरकार ने इसके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी और JJMP के उग्रवादियों पर इनाम के ऐलान कर दिया ।  जेजेएमपी से जुड़े 8 कुख्यात के सिर पर लाखों का इनाम की घोषणा की गई जिनमें शामिल है

कौन-कौन हैं JJMP का इनामी उग्रवादी

₹10 लाख का इनामी पप्पू लोहरा उर्फ सोमेद लोहरा , जिसे पुलिस ने ढेर कर दिया है । ये संगठन का मुखिया था।  मनोहर परहैया उर्फ मनोहर जी  इस पर भी दस लाख रुपए का इनाम है और  जोनल कमेटी सदस्य है ।  बीरबल उराँव उर्फ सुशील उराँव -सब-जोनल कमांडर और  ₹5 लाख का इनामी

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रविन्द्र यादव (पलामू): सब-जोनल उग्रवादी,इनाम ₹5 लाख

गणेश लोहरा (पलामू): विशेष क्षेत्रीय सदस्य, इनाम ₹5 लाख

फिरोज अंसारी (लोहरदगा): एरिया कमांडर, इनाम ₹2 लाख

रघुनाथ सिंह खेरवार उर्फ रघु जी (लातेहार): एरिया कमांडर, इनाम ₹2 लाख

ललिन्द्र महतो (लोहरदगा): वरिष्ठ सदस्य, इनाम ₹1 लाख

पप्पू लोहरा के मारे जाने के बाद  माना जा रहा है कि JJMP का भी अंत निकट है उनके पास दो ही विकल्प है या तो सरेंडर कर दे या फिर पुलिस की गोली खाएं

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