झारखंड में केंद्र सरकार की ड्रोन सर्वे योजना पर लगी रोक, सीएम ने कहा- समीक्षा के बाद फैसला


ड्रोन आधारित डिजिटल सर्वे स्वामित्व योजना पर तत्काल प्रभाव से रोक
रांची। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दसवें दिन आज प्रश्नोत्तरकाल के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्वामित्य योजना के तहत खूंटी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे संपत्ति और भूमि के डिजिटल सर्वे पर रोक लगाने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने भाकपा-माले के विनोद कुमार सिंह के एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि भारत सरकार की ओर से वर्ष 2020 में स्वामित्व योजना की लागू की गयी। पायलट प्रोजेक्ट के तहत राज्य के खूंटी जिले का चयन किया गया, कई जिलों में डिजिटल सर्वे का काम पूरा भी हो गया, लेकिन कुछ प्रखंडों के ग्रामीणों ने ड्रोन आधारित डिजिटल सर्वे को लेकर कई तरह की आशंका जाहिर की है और वहां इस योजना को लेकर कुछ नाराजगी है, इसलिए फिलहाल इसे तत्काल होल्ड करने का निर्णय लिया गया है और समीक्षा के उपरांत सरकार आगे का फैसला लेगी।
इससे पहले भूमि एवं राजस्व निबंधन विभाग की ओर से लिखित उत्तर में बताया कि स्वामित्व योजना की शुरूआत खूंटी जिला में 1 नवंबर 2021 को पायलट प्रोजेक्ट के तहत की गयी थी। इस योजना के तहत चूना मार्किंग करते हुए ड्रोन द्वारा ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों का भू सर्वेक्षण कर उनके राजस्व कागजात की जांच अंचल में उपलब्ध अभिलेख से कर रैयतों को अभिधारी खाता पुस्तिका उपलब्ध कराना है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों के ऋण और अन्य वित्तीय लाभ प्राप्त करने के लिए अपनी संपत्ति को एक वित्तीय परिसंपत्ति के रूप में प्रयोग करने में सक्षम बनाते हुए उन्हें वित्तीय स्थिरता प्रदान करना और ग्रामीण नियोजन के लिए सटीक भूमि अभिलेखों का निर्माण करना है। सर्वेक्षण की अवसंरचना तथा जीआईएस नक्शों का उपयोग किसी भी विभाग द्वारा अपने उपयोग के लिए किया जा सकता है। जीआईएस मानचित्रों का उपयोग करते हुए बेहत्तर गुणवत्ता वाली ग्राम पंचायत विकास योजना, जीपीडीपी तैयार करने में सहयोग देना और संपत्ति संबंधी विवादों तथा कानूनी मामलों को कम करना है।
विभाग द्वारा यह भी कहा गया है कि खूंटी जिला अंतर्गत स्वामित्व योजना का कार्य ड्रोन सर्वे के सभी गांवों में प्रचार-प्रसार के साथ ग्रामसभा हिन्दी और क्षेत्रीय भाषा में अवगत कराया जा रहा है। साथ ही आम ग्रामीणों को इस योजना से संबंधित श्ंाकाओं का भी समाधान किया जा रहा हैं।

 

झारखंड में दाखिल खारिज के लंबित 68 हजार पर फैसला जल्द-जोबा मांझी
राज्य सरकार की ओर से यह भरोसा दिलाया गया है कि झारखंड के विभिन्न जिलों में दाखिल खारिज के लंबित 68 हजार आवेदनों पर जल्द फैसला ले लिया जाएगा।
भाजपा के शशिभूषण मेहता के एक अल्पसूचित प्रश्न के उत्तर में राजस्व, निबंधन और भूमि सुधार विभाग की प्रभारी मंत्री जोबा मांझी ने बताया कि राईट टू सर्विस के तहत अंचल कार्यालयों में दाखिल खारिज करने के लिए एक तय सीमा होती तथा म्यूटेशन के मामले के त्वरित निष्पादन का प्रावधान हैं। उन्होंने बताया कि रांची जिला के विभिन्न अंचलों में दाखिल खारिज के लिए प्राप्त आवेदनों के निष्पादन को अस्वीकृत किये जाने के मामलों की जांच के लिए उपायुक्त रांची द्वारा 22 फरवरी को एक टीम गठित की गयी हैं। उन्होंने कहा कि दाखिल खारिज वादों का निष्पादन नियम समय-सीमा पर नहीं किये जाने पर झारखंड सेवा देने की गारंटी अधिनियम 2011 की धारा 07 एवं धारा 08 में निहित प्रावधानों के तहत दोषी पदाधिकारियों पर जुर्माना और अर्थदंड लगाने का निर्देश निर्गत किया गया हैं।
इससे पहले शशिभूषण मेहता ने बताया कि रांची के 23 अंचल अंचलों में 2.77 लाख दाखिल खारिज के आवेदन में 1.49 लाख आवेदन खारिज कर दिये गये, जबकि 10 हजार से अधिक आवेदन लंबित है और पूरे राज्य में 68 हजार से अधिक आवेदन लंबित हैं।
भाजपा विधायक नवीन जायसवाल ने इस मामले में कहा कि झारखंड के कई अंचल में सीओ पहले दाखिल खारिज के आवेदन को रिजेक्ट कर देते हैं, ऐसे में एलआरडीसी कोर्ट दाखिल खारिज स्वीकृत होना चाहिए, परंतु सीओ बाद में उसे स्वीकृत कर देते हैं, यह नियम विरूद्ध है। प्रभारी मंत्री ने कहा कि ऐसा मामला सामने आने पर नियमानुसार दोषी पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
भाजपा के ही सीपी सिंह ने अपने गृह जिला पलामू का उदाहरण देते हुए कहा कि उनकी जमीन का भी दाखिल खारिज नहीं हो रहा हैं, जब उन्होंने सीओ से बातचीत की और कहा कि पैसा ही लेकर करना है, तो बता दिजिये, तो सीओ ने पैसा लेने से भी मना कर दिया।
झारखंड मुक्ति मोर्चा के सुदिव्य कुमार सोनु ने कहा कि वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्य सचिव राजबाला वर्मा के एक पत्र से राज्य में 21 लाख एकड़ भूमि लैंड बैंक के नाम पर हस्तांतरित हो गयी और सारा विवाद तभी से खड़ा हुआ है, इसलिए सरकार को इस पर अविलंब फैसला लेना चाहिए।

आयुष्मान योजना के तहत गरीबों को स्वास्थ्य सुविधा मिलने में आने वाली परेशानियों को दूर करेंगे-मंत्री
झारखंड विधानसभा में विधायक प्रदीप यादव के एक प्रश्न के उत्तर में प्रभारी मंत्री बादल ने बताया कि राज्य सरकार आयुष्मान योजना के तहत गरीबों को स्वास्थ्य सुविधा मिलने में आने वाली परेशानियों को दूर करने का काम करेगी।
स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता की अनुपस्थिति में प्रभारी मंत्री बादल ने बताया कि राज्य में 831 सरकारी एवं निजी अस्पताल आयुष्मान योजना अंतर्गत सूचीबद्ध है और गरीब व्यक्तियों को इलाज की समुचित सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है। इसमें हर महीने लगभग 25 से 30 करोड़ का भुगतान योजना के अंतर्गत किया जा रहा हैं। योजना के तहत सीएमसी वेल्लोर और राज्य के प्रमुख निजी अस्पताल मेडिका, मेदांता और पल्स समेत अन्य अस्पतालों का सर्जरी संबंधी इलाज तथा अन्य कई रोगों के इलाज के लिए आयुष्मान योजना के तहत निबंधन न होने के होने वाली परेशानियों के संबंध में उन्होंने कहा कि यदि ये सभी निजी अस्पताल पोर्टल के माध्यम से आवेदन देते हैं, तो नियमानुसार इन अस्पतालों में भी सभी स्पेशिलियाटी के साथ जोड़े जाने की प्रक्रिय पूरी कर ली जाएगी।
प्रदीप यादव द्वारा निजी अस्पतालों के दो बिल भुगतान का जिक्र किये जाने पर प्रभारी मंत्री ने कटाक्ष करते हुए उन्हें पहले लगा कि माननीय विधायकों को गरीबों के इलाज की चिंता है, लेकिन यदि वे निजी अस्पताल मेडिका के बकाया भुगतान को लेकर चिंतित है,तो उसे भी वे दिखवा लेंगे।

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