झारखंड सरकार के मंत्री पत्नी को चुनाव लड़ाने के लिए कर रहे है जोर-आजमाइश, हेमंत सोरेन के आने के नाम पर बनाया माहौल, फिर भी हो गये फेल!

रांचीः झारखंड सरकार में मंत्री और आरजेडी विधायक संजय प्रसाद यादव अपनी पत्नी कल्पना देवी को बिहार विधानसभा का चुनाव लड़ाने के लिए पूरी जोर-आजमाइश कर रहे है। बांका में उन्होने अपने तौर पर पूरा माहौल बनाने की कोशिश भी की, लेकिन उनको वो सफलता नहीं मिली जिसका उन्होने अपने इलाके में ढोल पीटा था।

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बांका जिला के ढाका मोड़ में उन्होने चैती दुर्गा पूजा समारोह के बहाने मेला महोत्सव का आयोजन किया। बड़े-बड़े विज्ञापन अखबारों में छपवाये, बांका में जगह-जगह होल्डिंग और बैनर लगवाये। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कार्यक्रम के उद्घाटनकर्ता होंगे उसको लेकर पूरी हवा बनाई। बांका जिला के जनता को कार्यक्रम में आमंत्रित इस नाम पर किया कि झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव एक साथ मौजूद होंगे। कार्यक्रम भव्य एवं ऐतिहासिक होगा। राजनीति रूप से कार्यक्रम एकता का संदेश देगा। बांका विधानसभा क्षेत्र में मंत्री जी का दबदबा बढ़ेगा लेकिन उनके द्वारा बनाई गई हवा उस समय निकल गई जब हेमंत सोरेन इस कार्यक्रम में नहीं आये।  हालांकि तेजस्वी यादव जरूर  कार्यक्रम में शामिल हुए।

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हेमंत सोरेन के कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर जब जिले के अधिकारियों से पूछा गया तो उन्होने कहा कि उन्हे झारखंड के मुख्यमंत्री के आने को लेकर कोई जानकारी नहीं थी, उनके आने पर प्रोटोकॉल को फॉलो करना पड़ता, लेकिन जिला प्रशासन को ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली। वहीं झारखंड में भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का बांका जाने को लेकर कोई पूर्व निर्धारित कार्यक्रम नहीं था। इसका मतलब साफ है कि मंत्री संजय यादव ने बस बांका में माहौल बनाने के लिए हेमंत सोरेन के नाम पर भीड़ बुलाने का काम किया।

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संजय प्रसाद यादव झारखंड के गोड्डा विधानसभा सीट से आरजेडी विधायक है। उनके भाई मनोज यादव यादव बांका जिले के बेलहर से जेडीयू के विधायक हैं, और वो अपनी पत्नी कल्पना देवी जो गोड्डा की पूर्व जिला परिषद् अध्यक्ष है उन्हे बांका से विधानसभा चुनाव लड़ाने की तैयारी संजय यादव ने कर ली है। बांका विधानसभा सीट पर संजय यादव की नजर पड़ने से पूर्व मंत्री जावेद इकबाल अंसारी का विधानसभा टिकट फंसता नजर आ रहा है। जावेद इकबाल अंसारी इस सीट से कई बार विधायक रह चुके है और राबड़ी देवी की सरकार और नीतीश कुमार की सरकार में मंत्री भी रह चुके है। माना जाता है कि पिछले विधानसभा चुनाव में यादव बहुल इलाके में जावेद इकबाल अंसारी को आरजेडी उम्मीदवार रहने के बावजूद वोट कम मिले इसके पीछे भी इस सीट पर जावेद इकबाल अंसारी के दावे को कमजोर करना माना जाता है और 2020 चुनाव में इसका असर दिखा और जावेद इकबाल असांरी बीजेपी के रामनारायण मंडल से चुनाव हार गये।

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संजय प्रसाद यादव बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के करीबी माने जाते है। झारखंड सरकार में मंत्री बनने में भी तेजस्वी से उनका करीब होना काम आया और देवघर विधायक सह आरजेडी विधायक दल के नेता सुरेश पासवान की जगह वो हेमंत सोरेन की सरकार में मंत्री बने। अपनी पत्नी के लिए बांका में संजय प्रसाद यादव अभी से जुट गये है। हेमंत सोरेन भले ही उस कार्यक्रम में नहीं आये लेकिन तेजस्वी यादव के आने से संजय यादव ने राहत की सांस ली। तेजस्वी यादव ने भी संकेत दे दिये कि इस बार बांका की सीट पर कोई फेरबदल हो सकता है। संजय यादव के इस चाल से जावेद इकबाल अंसारी के टिकट पर संकट पर पड़ता नजर आ रहा है। विधानसभा चुनाव का परिणाम चाहे जो भी हो लेकिन संजय प्रसाद यादव ने हेमंत सोरेन और तेजस्वी यादव के नाम पर बांका का राजनीतिक तापमान जरूर गर्म कर दिया है। हालांकि लोग बताते है कि तमाम तामझाम और हवा बनाने के बावजूद संजय प्रसाद यादव का माहौल बनाने का अभियान जमीनी स्तर पर बेदम दिख रहा है।

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जावेद इकबाल अंसारी की जगह अपनी पत्नी को चुनाव मैदान में उतारने की संजय यादव की तैयारी के पीछे एक राजनीति वजह ये भी मानी जा रही है कि जावेद इकबाल अंसारी और बांका के जेडीयू सांसद गिरिधारी यादव की नजदीकी है, वहीं संजय यादव और उनके भाई मनोज यादव के साथ गिरिधारी यादव का छत्तीस का आंकड़ा है। जावेद इकबाल अंसारी का टिकट कटवाने के पीछे ये कहानी भी स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय है।

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