जिस घर पर चला बुलडोजर वो फिर बनेगा, सुप्रीम फैसले से योगी सरकार को बड़ा झटका

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March 25, 2025

बुलडोजर एक्शन कानून के खिलाफ, सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, अगर कोई दोषी भी हो तो घर गिराना सही नहीं

उत्तर प्रदेशः यूपी के प्रयागराज में बुलडोजर कार्रवाई से सुप्रीम कोर्ट हैरान है। भारत के शीर्ष न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं को न सिर्फ घर दोबारा बनाने की अनुमति देने का रास्ता दिखाया है, बल्कि राज्य सरकार को कड़े शब्दों में हिदायत दी है। दरअसल, याचिकाकर्ताओं की तरफ से अदालत को बताया गया था कि जमीन के हिस्से को गैंगस्टर अतीक अहमद का मानकर राज्य सरकार की तरफ से घरों को ढहा दिया गया था। अतीक की 2023 में हत्या कर दी गई थी।

याचिका पर जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच सुनवाई कर रही थी। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि याचिकाकर्ताओं को ढहाए गए घरों को अपने खर्च पर दोबारा बनाने की अनुमति दी जाएगी। हालांकि, इसमें कुछ शर्तें शामिल की गई हैं। जैसे तय समय में अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष अपील दायर करनी होगी। अदालत ने कहा कि अगर उनकी अपील खारिज हो जाती है तो याचिकाकर्ताओं को अपने खर्च पर घरों को ध्वस्त करना होगा।

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बेंच ने कहा, ‘हम एक आदेश पास करेंगे कि वे अपने खर्च पर घर दोबारा बना सकते हैं और अगर अपील खारिज हो जाती है, तो उन्हें उसे अपने ही खर्च पर ढहाना भी होगा।’ इस मामले में याचिकाकर्ता एडवोकेट जुल्फिकार हैदर, प्रोफेसर अली अहमद, दो विधवाएं और एक अन्य शख्स था।

इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका खारिज होने के बाद याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। उनके आरोप थे कि अधिकारियों ने शनिवार देर रात नोटिस जारी किए और अगले ही दिन घरों को गिरा दिया गया। उन्हें इस कार्रवाई को चुनौती देने का मौका ही नहीं मिला। एटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को 8 दिसंबर 2020 में नोटिस मिल गए थे और बाद में जनवरी और मार्च 2021 में भी नोटिस मिले हैं।

उन्होंने कहा, ‘ऐसे में हम नहीं कह सकते कि पर्याप्त प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है।’ हालांकि, कोर्ट ने राज्य की सफाई को नहीं माना और कहा कि नोटिस अनुचित तरीके से दिए गए थे। कोर्ट ने यह भी कहा, ‘राज्य यह नहीं कह सकता कि इन लोगों के पास एक से ज्यादा घर हैं, तो हम कानून की प्रक्रिया का पालन नहीं करेंगे और ढहाए जाने की प्रक्रिया के खिलाफ अपील दायर करने का समय भी नहीं देंगे।’

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याचिकाकर्ताओं ने खुद को पट्टेदार बताया है। उनका कहना है कि जमीन के पट्टे को फ्रीहोल्ड में बदलने के लिए उन्होंने आवेदन कर दिया है। उनका कहना था कि ढहाए जाने का नोटिस 1 मार्च 2021 को जारी हुआ और 6 मार्च को मिला और 7 मार्च को ढहाए जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई। इसके चलते उन्हें उत्तर प्रदेश अर्बन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट एक्ट की धारी 27(2) के तहत इस आदेश को चुनौती देने का अधिकार भी नहीं मिला।

साल 2024, नवंबर में शीर्ष न्यायालय ने दिशानिर्देश जारी किए थे। इनमें कहा गया था कि बगैर पूर्व नोटिस के ढहाए जाने की प्रक्रिया नहीं की जाएगी। साथ ही घर में रहने वालों को जवाब देने के लिए 15 दिनों का समय दिया जाएगा और इस नोटिस को रजिस्टर्ड पोस्ट से ही भेजा जाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा था कि इस प्रक्रिया के चलते प्रभावित होने वालों को अधिकारी के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश होने का मौका मिलेगा।

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इतना ही नहीं, ध्वस्त करने के आदेश को अंतिम रूप दिए जाने के बाद भी उसे 15 दिन होल्ड करना होगा, ताकि वहां रहने वाला शख्स खाली करने की व्यवस्था कर सके या फैसले को चुनौती दे सके।

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