हेमंत सोरेन की युवा कैबिनेट, जातीय-क्षेत्रीय समीकरणों का भी रखा पूरा ख्याल; 50 फीसदी नए चेहरों को जगह

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विधानसभा चुनाव में जीत के बाद हेमंत सोरेन ने कैबिनेट का विस्तार कर लिया है। गुरुवार को कुल 11 मंत्रियों ने शपथ ली, जिसमें झामुमो से छह, कांग्रेस से चार और राजद से एक मंत्री को शपथ दिलाई गई। कैबिनेट के जरिए तीनों घटक दलों ने आपसी समझ बनाकर अपने-अपने वोट बैंक को साधने की कोशिश की है।

24 साल के युवा झारखंड राज्य के लिहाज से अपेक्षाकृत युवा मंत्रियों को जगह देकर हेमंत सोरेन ने आनेवाले समय की राजनीति के लिए संकेत दे दिए हैं। 11 मंत्रियों में 50 फीसदी नए चेहरे हैं। मंत्रिपरिषद में जातीय समीकरण को साधते हुए आदिवासी वर्ग से चार, ओबीसी से तीन, अल्पसंख्यक से दो, एससी और सामान्य वर्ग से एक-एक मंत्री बनाए गए हैं।

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क्षेत्रीय समीकरणों का भी खास ध्यान रखा गया है। इंडिया गठबंधन को संताल की 18 में से 17 सीटें मिली थीं। ऐसे में संताल से मुख्यमंत्री समेत पांच मंत्री हैं। वहीं दक्षिणी और उत्तरी छोटानागपुर और कोल्हान से दो-दो मंत्री बनाए गए हैं। पलामू से एक मंत्री को जगह दी गई है।

कैबिनेट में मंत्रियों की औसत आयु लगभग 52 वर्ष है। सबसे कम उम्र की मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की हैं। उनकी आयु महज 32 साल है। वहीं सबसे अधिक उम्र के मंत्री राधाकृष्ण किशोर 66 साल के हैं। मंत्रिमंडल इस मायने में भी खास है कि हेमंत सोरेन ने ज्यादा आत्मबल का परिचय किया है।

वरिष्ठ विधायक मथुरा महतो की जगह गोमिया विधायक योगेंद्र महतो को मंत्री बनाया जाना और गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू को तमाम वरीय विधायकों के ऊपर तरजीह देना इसके संकेत हैं। बिशुनपुर विधायक चमरा लिंडा के शामिल करने को भी आश्चर्य के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषक यह भी मानते हैं कि दक्षिणी छोटानागपुर में उरांव वोटरों को संतुलित करने के लिए लिंडा को जगह दी गई है।

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चमरा लिंडा की दक्षिणी छोटानागपुर में सरना वोटरों के बीच अच्छी पकड़ है। परंपरागत रूप से दक्षिणी छोटानागपुर झामुमो का मजबूत गढ़ नहीं रहा है। राज्य गठन के पूर्व से ही भाजपा की इस क्षेत्र में अच्छी पकड़ रही है। लेकिन रघुवर सरकार के दौरान पत्थलगड़ी आंदोलन के बीच इस क्षेत्र में भाजपा कमजोर हुई।

बाबूलाल मरांडी की सरकार के दौरान डोमिसाइल के मुद्दे पर बंधु तिर्की बड़े नेता के रूप में उभरे थे। ऐसे में झामुमो के लिहाज से पिछले कुछ सालों से इस इलाके में बनी जमीन को खोना नहीं चाहते हैं। हेमंत की पिछली सरकार में विशेष सत्र बुलाकर सरना धर्म कोड का प्रस्ताव विधानसभा से पास करा कर केंद्र को भेजा गया था। चुनाव में भी झामुमो ने आदिवासियों के लिए सरना धर्मकोड का मुद्दा बार-बार उठाया।

मंत्रिमंडल में उत्तरी छोटानागपुर का भी ध्यान रखा गया है। जहां जयराम महतो से महतो बहुल क्षेत्रों में कड़ी टक्कर मिलने के बावजूद भाजपा ने बेहतर प्रदर्शन किया है। दो अलग-अलग पिछड़ी जातियों के मंत्रियों योगेंद्र प्रसाद और सुदिव्य कुमार सोनू को अपने मंत्रिमंडल में शामिल कर हेमंत गैर यादव ओबीसी जातियों को जोड़ने की बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नीति पर अमल करते दिख रहे हैं। इस चुनाव में आदिवासी और अल्पसंख्यकों का एकतरफा समर्थन इंडिया गठबंधन को मिला था। दोनों समुदायों का खास ध्यान रखा गया है।

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आदिवासी समाज से चार और ओबीसी से तीन विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह दी गई है। सामान्य वर्ग से एकमात्र कांग्रेस की ओर से महागामा विधायक दीपिका पांडेय सिंह एक मंत्री दिख रही हैं। उनके बारे में भी कांग्रेस पार्टी उनके पिछड़ा और अगड़ा दोनों होने का दावा करती रहती है।

कोल्हान में चंपाई सोरेन के ऐन चुनाव से पहले झामुमो छोड़ने के बावजूद एसटी सीटों पर झामुमो ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया। इस क्षेत्र के दो कद्दावर नेता दीपक बिरुआ और रामदास सोरेन शिबू सोरेन और हेमंत सोरेन के प्रति वफादार बने रहे। लिहाजा दोनों को फिर से नई कैबिनट में जगह दी गई।

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