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दिल्ली में हेमंत सोरेन और झारखंड के पूर्व सीएम रघुवर दास, कहीं हुई जीत की मुलाकातें तो कहीं हुई हार की बातें!

Raghuvar Das met Shivraj Singh Chauhan, will he re-enter Jharkhand politics?

दिल्लीः देश की राजधानी में झारखंड से जुड़ी दो शख्सियतें एक साथ नज़र आईं। झारखंड के कार्यवाहक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास जो फ़िलहाल ओडिशा के राज्यपाल हैं।

हेमंत सोरेन यूं तो औपचारिक मुलाक़ात करने के लिए दिल्ली गए थे जहां उन्होंने प्रधानमंत्री से मुलाकातें की , हेमंत सोरेन के साथ कल्पना मुर्मू सोरेन भी थीं। दोनों नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से भी मुलाक़ात की। 

रघुवर और शिवराज की मुलाक़ात

इधर दिल्ली से एक और तस्वीर नज़र आईं रघुवर दास की । ओडिशा  के राज्यपाल और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री  ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाक़ात की तस्वीरें रघुवर दास ने सोशल मीडिया पर  साझा की है। रघुवर दास ने लिखा है कि इस मुलाक़ात में विभिन्न विषयों पर बातचीत हुई । शिवराज सिंह चौहान ने लिखा –ज नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में पधारे ओडिशा के माननीय राज्यपाल श्री

@dasraghubarजी से शिष्टाचार भेंट कर उनका स्वागत किया। इस दौरान विविध विषयों पर सार्थक चर्चा हुई।

बीजेपी की करारी हार के बाद मुलाक़ात के मायने?

ग़ौरतलब है कि झारखंड बीजेपी के प्रभारी के तौर पर शिवराज सिंह चौहान क़रीब एक महीने से अधिक का समय झारखंड में बिताया वहीं रघुवर दास की बहू पूर्णिमा साहू ने बीजेपी के टिकट से  जमशेदपुर पूर्वी सीट से जीत हासिल की है, लेकिन झारखंड में बीजेपी की बड़ी हार हुई है  । माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच इस हार के संबंध में भी बातचीत हुई है । पार्टी की आगे की रणनीति क्या होगी और किस तरह बीजेपी आने वाले पाँच सालों में झारखंड में सियासत करेगी इस पर भी चर्चा की संभावना है ।

झारखंड का मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं रघुवर दास!

रघुवर दास की मुलाक़ात कई मायनों में अहम है । झारखंड में बीजेपी की हार और पार्टी के अंदर आने वाले वक्त में होने वाली उठा पटक, गुटबाजी बड़ी चुनौती होने वाली है । वैसे भी इस तरह की खबरें लगातार सामने आ रही थी कि झारखंड विधानसभा चुनाव में रघुवर दास अपनी राजनीतिक इंट्री की इच्छा पार्टी के आालाकमान से जता चुके थे लेकिन मौका नहीं मिला । माना जा रहा है कि झारखंड में सक्रिय राजनीति का मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं रघुवर दास।
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