दिल्‍ली में 50% स्‍टाफ वर्क फ्रॉम होम,बढ़ते प्रदूषण को लेकर सरकार का फैसला

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November 24, 2025

दिल्‍ली में 50% स्‍टाफ वर्क फ्रॉम होम,बढ़ते प्रदूषण को लेकर सरकार का फैसला

डेस्कः दिल्ली NCR लगातार तीसरे सप्ताह से गंभीर वायु प्रदूषण की चपेट में है। CPCB के आंकड़ों के अनुसार सोमवार को दिल्ली का AQI 396 दर्ज किया गया। सर्दियों के मौसम के साथ बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। वातावरण में पार्टिकुलेट मैटर (PM2.5 और PM10) के अत्यधिक बढ़े स्तर और ‘बहुत खराब’ श्रेणी में पहुंच चुकी हवा के मद्देनज़र पर्यावरण विभाग ने आदेश जारी किया है कि सरकारी और निजी दफ्तर अब केवल 50 % स्टाफ के साथ ही काम करेंगे, जबकि बाकी कर्मचारी घर से काम यानी वर्क फ्रॉम होम करेंगे। यह आदेश तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है।

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यह फैसला ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के स्टेज-III के तहत लिया गया है, जिसे दिल्ली और NCRमें वायु गुणवत्ता के बिगड़ने पर लागू किया जाता है। आदेश में कहा गया है कि पिछले कई दिनों से दिल्ली की हवा बेहद खराब स्तर पर है। ऐसे में वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए दफ्तरों में उपस्थिति घटाना ज़रूरी माना गया है।
सरकारी दफ्तरों के लिए निर्देश
सभी विभागाध्यक्ष और सचिव नियमित रूप से दफ्तर आएंगे।
50% से अधिक स्टाफ दफ्तर में मौजूद नहीं होगा।
बाकी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की अनुमति दी गई है।
अगर किसी आवश्यक सेवा के लिए ज़रूरी हो, तो संबंधित विभाग अधिकारी या कर्मचारी को बुला सकते हैं ताकि जरूरी सरकारी काम में बाधा न आए।
निजी दफ्तरों के लिए दिशा-निर्देश
सरकार ने स्पष्ट किया है कि निजी दफ्तरों को भी यही व्यवस्था अपनानी होगी।
निजी कार्यालय भी अधिकतम 50% क्षमता के साथ ही काम करेंगे।
शेष कर्मचारी अनिवार्य रूप से घर से काम करेंगे।
कंपनियों को जहां संभव हो, स्टैगर्ड वर्किंग आवर लागू करने की सलाह दी गई है।
कार्यालयों से जुड़े वाहन आवागमन को कम करने के लिए कंपनियों को वर्क-फ्रॉम-होम के नियमों का पूरी तरह पालन करना होगा।

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कौन–कौन इस आदेश से छूट में रहेगा?
अस्पताल, स्वास्थ्य सेवाएँ
फायर सर्विस
जेल, पानी, बिजली, स्वच्छता से जुड़ी सेवाएं
पब्लिक ट्रांसपोर्ट
पर्यावरण, वन एवं आपदा प्रबंधन से जुड़े विभाग
प्रदूषण नियंत्रण, मॉनिटरिंग व प्रवर्तन करने वाली टीमें
प्रदूषण नियंत्रण को लेकर आदेश में क्या कहा गया?
दिल्ली सरकार ने आदेश में कहा कि वाहनों की संख्या कम किए बिना प्रदूषण को नियंत्रित करना मुश्किल है। इसलिए कार्यालयों में उपस्थिति घटाने का उद्देश्य यह है कि सड़कों पर कम वाहन निकलें और वायु प्रदूषण थोड़ा कम हो सके।इसके अलावा, आयोग (CAQM) ने पहले ही सुझाव दिया था कि GRAP स्टेज-III में यह कदम आवश्यक है। सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद आयोग ने भी यह स्पष्ट किया कि प्रदूषण कम करने के लिए दफ्तरों की भौतिक उपस्थिति घटाई जानी चाहिए। जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस आयुक्त और विभिन्न विभागों के प्रमुखों को आदेश के सख्त अनुपालन का निर्देश दिया गया है। निजी दफ्तरों में भी इसका पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन को दी गई है।

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उल्लंघन पर कार्रवाई
आदेश में यह भी साफ है कि पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत जारी निर्देशों का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें जुर्माना और अन्य दंड शामिल हो सकते हैं।

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