रांचीः 14वीं जेपीएससी परीक्षा में अभ्यर्थियों को फर्जी ढंग से पास कराने के लिए राज्य में एक बड़े सिंडिकेट का संचालन हो रहा था। अभय तिवारी मास्टरमाइंड था और उमेश कुमार उसका सहयोगी था। ये लोग अलग-अलग लोगों के माध्यम से अभ्यर्थियों की तलाश करते थे और पैसे लेकर उन्हें पास कराने का भरोसा दिलाते थे। इस परीक्षा में पास कराने के लिए सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों से एक करोड़ और एससी-एसटी अभ्यर्थियों से 80 लाख रुपये तक मांगे जा रहे थे। यह जानकारी सीआईडी ने अदालत को दी।
सीआईडी ने घोटाले की जांच के क्रम में दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनकी जमानत याचिका पर बुधवार को अपर न्यायायुक्त-1 सह विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत में सुनवाई हुई। कोर्ट ने दोनों पक्षों की बातों को सुनने के बाद आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी। ज्ञात हो कि इस मामले में सीआईडी ने कांड संख्या 16-2026 दर्ज किया है। अभय तिवारी टीडीपीएल में मार्केटिंग मैनेजर के पद पर कार्यरत था और वहां रहते हुए उसने जेपीएससी और सीजीएल की परीक्षाएं पास कीं। उस पर आरोप है कि उसने अपने रिश्तेदारों और कई अभ्यर्थियों को गलत तरीके से परीक्षा में पैसे लेकर सफल कराया। अभ्यर्थियों से पांच से पच्चीस लाख रुपये तक वसूले और 500 से अधिक ओएमआर शीटों में गड़बड़ी करायी। स्ट्रांगरूम में उत्तरपुस्तिकाओं में निकालने में भी भूमिका निभायी।
अभय तिवारी ने टीडीपीएल कर्मियों, जेपीएससी से जुड़े लोगों और अभ्यर्थियों के बीच माध्यम की तरह काम किया। इसके बैंक खाते में मनी ट्रेल की जानकारी मिली है। टीडीपीएल के निदेशकों के रांची प्रवास के दौरान उनके होटल का खर्च भी अभय तिवारी के खातों से यूपीआई के माध्यम से अदा किया गया। अभय तिवारी को सीआईडी ने 22 जुलाई को गोड्डा से गिरफ्तार किया था। उसने पूछताछ में पूरे घोटाले की कई जानकारी सीआईडी को दी। उसने स्वीकारा कि जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष व अन्य अधिकारी तथा टीडीपीएल के निदेशक सभी इस गड़बड़ी में शामिल है।

धमेंद्र को भी अभय तिवारी देता था पैसे
सीआईडी जांच में गिरफ्तार हुए धमेंद्र के संबंध में सीआईडी को एक और जानकारी मिली है। धमेंद्र मुख्य सचिव कार्यालय का कर्मी था, लेकिन जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल ख्यिांग्ते का करीबी था। वह उनके साथ ही काम कर रहा था। वह जहां काम करता था, वहां से जेपीएससी परीक्षा के आठ अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड मिले थे। धमेंद्र पर यह भी आरोप है कि उसने टीडीपीएल कंपनी को जेपीएससी में काम दिलाया। अभय तिवारी के खाते से 50 हजार रुपये धमेंद्र के खाते में भेजे गये थे। शंका यह है कि इस पैसे से धमेंद्र ने अपनी पत्नी के नाम पर बुलेट बाइक खरीदी थी।
उमेश को अभय तिवारी ने दिया था अभ्यर्थियों की तलाश का काम
सीआईडी ने कोर्ट को सुनवाई के दौरान बताया कि अभय तिवारी ने 14वीं जेपीएससी परीक्षा में अभ्यर्थियों की तलाश करने का काम जनवरी 2026 में उमेश को दिया था और वह भी बराबर का साझेदार था। बाद में अन्य एजेंटों को भी यह काम दिया गयज्ञ। उन्हें एक अभ्यर्थी देने पर पांच लाख रुपये कमीशन देने की बात कही गयी थी। इसके बाद कई एजेंटों ने अभ्यर्थियों की तलाश की और उनसे पैसे लिये। इस मामले में एक अन्य आरोपी बुधेश्वर भगत ने बया दिया है कि 24 अभ्यर्थियों के नाम और रोल नंबर जुटाये गये थे। इनमें 11 अभ्यर्थी पीटी में सफल हुए, जांच में अभ्यर्थियों से मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र बतौर सुरक्षा गारंटी रखे गये थे। बड़ी राशि का लेन-देन किये जाने के भी साक्ष्य मिले हैं।




