रियोः ब्राजील में BRICS सम्मेलन चल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं और इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दी धमकी दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में चेतावनी दी है कि जो भी देश ब्रिक्स की “अमेरिका विरोधी नीतियों” का समर्थन करेगा, उस पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त आयात शुल्क (टैरिफ) लगाया जाएगा।

ट्रंप ने इससे पहले ब्रिक्स देशों को 100 प्रतिशत टैरिफ की धमकी दी थी, यदि वे वैश्विक व्यापार में डॉलर के इस्तेमाल को कम करने की दिशा में सोचने मात्र की भी हिम्मत करते हैं। माना जा रहा है कि BRICS आपस में कारोबार के लिए डॉलर की निर्भरता को कम करना चाहते हैं । इस पर अमेरिका को ऐतराज है ।
क्यों हो रही है डॉलर पर निर्भरता घटाने की कोशिश?
ब्रिक्स देशों की यह कोशिश कोई नई नहीं है। जब से अमेरिका ने ईरान (2012) और रूस (2022) को अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग नेटवर्क स्विफ्ट (SWIFT) से बाहर कर दिया, तब से कई देश अमेरिका और डॉलर आधारित वैश्विक वित्तीय व्यवस्था पर निर्भरता कम करने की ओर बढ़े हैं। विशेष रूप से रूस और चीन ने आपसी व्यापार में अपनी घरेलू मुद्राओं का उपयोग करना शुरू कर दिया है।
कितना ताकतर है BRICS
- दुनिया की 45% आबादी ब्रिक्स देशों में है।
- यह गठबंधन वैश्विक GDP में 35% से अधिक का योगदान देता है।
- अक्टूबर 2024 में रूस के कज़ान में आयोजित शिखर सम्मेलन में ब्रिक्स ने मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात को सदस्यता दी।
- जनवरी 2025 में इंडोनेशिया के जुड़ने के साथ ब्रिक्स की कुल सदस्य संख्या 10 हो गई।
BRICS में भारत की ताकत
भारत ब्रिक्स का संस्थापक सदस्य रहा है और पिछले कुछ वर्षों में इस मंच के माध्यम से बहुपक्षीय व्यापार और विकास के लिए लगातार समर्थन करता रहा है। हालांकि, अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी बनाए रखने के चलते भारत को अब संतुलन साधने की चुनौती है।




