नहीं रहे दुनिया के सबसे उम्रदराज मैराथन रनर फौजा सिंह, 114 वर्षीय धावक हुए हिट एंड रन के शिकार

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July 15, 2025

fauja singh

पंजाबः दुनिया के सबसे उम्रदराज मैराथन रनर फौजा सिंह नहीं रहे । 114 वर्ष की उम्र में उनका हिट एंड रन की वजह से निधन हो गया । ब्रिटिश-भारतीय नागरिक विश्व के सबसे बड़ी उम्र वाले धावक थे । फौजा सिंह के साथ ये दुखद हादसा  उस वक्त हुआ जब वे जालंधर के पास अपने पैतृक गांव ब्यास पिंड में सड़क पार कर रहे थे, तभी एक अज्ञात वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी।

विश्व भर से श्रद्धांजलि, प्रधानमंत्री मोदी ने दी प्रतिक्रिया

जैसे ही फौजा सिंह के निधन की खबर फैली, पूरे विश्व से श्रद्धांजलियों का तांता लग गया। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें “अद्भुत इच्छाशक्ति वाला असाधारण खिलाड़ी” बताया।

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उनके कोच हरमंदर सिंह ने Sikhs In The City नामक रनिंग क्लब की ओर से बयान जारी कर कहा, “मानवता के प्रतीक और सकारात्मकता की मिसाल फौजा सिंह का निधन अत्यंत दुखद है। क्लब के आगामी सभी आयोजन उनके जीवन और उपलब्धियों को समर्पित होंगे।”

Fauja Singh

89 की उम्र में शुरू की दौड़, 100 साल में रचा इतिहास

फौजा सिंह ने 89 वर्ष की उम्र में दौड़ना शुरू किया और 2000 से 2013 के बीच कुल 9 पूर्ण मैराथन पूरी कीं। 2011 में टोरंटो मैराथन में वे 100 वर्ष की उम्र में फुल मैराथन पूरी करने वाले पहले व्यक्ति बने। हालांकि, गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने जन्म प्रमाणपत्र की कमी के कारण उनके रिकॉर्ड को औपचारिक मान्यता नहीं दी। उनके ब्रिटिश पासपोर्ट पर जन्म तिथि 1 अप्रैल 1911 दर्ज है, और उन्हें रानी एलिज़ाबेथ द्वितीय द्वारा 100वें जन्मदिन की बधाई पत्र भी प्राप्त हुआ था।

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बंटवारे का दु:ख, मैराथन शब्द सुना तक नहीं था

एक किसान के रूप में जीवन बिताने वाले फौजा सिंह ने 40 वर्ष की उम्र तक ‘मैराथन’ शब्द तक नहीं सुना था। 1990 के दशक में पत्नी गियान कौर की मृत्यु और फिर छोटे बेटे कुलदीप की एक दुर्घटना में मौत के बाद वे अवसाद में चले गए। इसके बाद परिवार उन्हें वापस लंदन ले गया, जहाँ Ilford में गुरुद्वारा जाने के दौरान उन्होंने एक वृद्ध समूह को दौड़ते देखा, और वहीं से उनकी दौड़ की यात्रा शुरू हुई। उनके कोच हरमंदर सिंह ने उन्हें प्रशिक्षित किया और कहा, “अगर मैं उनसे न मिला होता, तो मैं कभी दौड़ की दुनिया में नहीं आता।”

दुनिया भर से मिला फौजा सिंह को सम्मान

2000 में उन्होंने पहली बार लंदन मैराथन में हिस्सा लिया, वो भी 89 की उम्र में। आयोजकों ने उन्हें पगड़ी हटाने को कहा, पर उन्होंने मना कर दिया। अंततः आयोजकों को झुकना पड़ा और फौजा सिंह पगड़ी पहनकर दौड़े — इसे उन्होंने अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि बताया। 2004 में Adidas ने उन्हें Impossible is Nothing कैंपेन में शामिल किया, जहाँ वे मुहम्मद अली जैसे दिग्गजों के साथ दिखे। 2006 में उन्हें बकिंघम पैलेस आमंत्रित किया गया और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री द्वारा लाहौर मैराथन में भी बुलाया गया। उनकी अधिकतर कमाई चैरिटी को जाती रही। उन्होंने हमेशा सादा जीवन, संयमित खानपान और मानसिक शांति को अपनी लंबी उम्र का राज बताया।

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