लोहरदगा: जिला प्रशासन लोहरदगा की ओर से दो दिवसीय साहित्य एवं फ़िल्म महोत्सव “अखड़ा आलाप” का आज समाहरणालय मैदान में शुभारंभ हुआ। इसका शुभारंभ उपायुक्त डॉ ताराचंद समेत अतिथियों द्वारा किया गया।

इस अवसर पर विधायक डॉ रामेश्वर उराँव ने कहा कि आज अभिभावकों को अपने बच्चों के पढ़ाई के प्रति सजग रहने की जरूरत है। पढ़ाई हमारे जीवन मे महत्वपूर्ण स्थान रखती है। बच्चे क्या पढ़ रहे हैं, वे क्या सीख रहे हैं यह ध्यान रखना अभिभावक का कार्य है। इसलिए पढ़ाई की महत्ता सबसे ऊपर है। पढ़ाई से अंधविश्वास दूर होता है। सवालों का जवाब मिलता है।विधायक ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा यह पहल काफी अच्छी है जहाँ साहित्य और फ़िल्म के महत्व को एक मंच प्रदान किया गया है। भविष्य में हम सभी मिलकर एक बड़ा मंच ऐसे प्रयास को प्रदान करेंगे।

पढ़ाई पूरी करने के बाद ही हो शादी
डॉ रामेश्वर उरांव ने कहा कि आज भी 12-14 वर्ष की उम्र में बाल विवाह की खबरें सुनने को मिलती हैं। यह पढ़ाई की उम्र है। इसे शादी कर बर्बाद नहीं किया जा सकता है। इस उम्र में किसी बच्चे का तन और मन दोनों अवयस्क होता है। यह अपराध है।

किताबें होती हैं समाज का आईना : डॉ ताराचंद
उपायुक्त डॉ ताराचंद ने कहा कि किताबें समाज का आईना होती हैं। किताबों में वही लिखा होता है जो इस समय के कालखंड में घटा होता है। इसी प्रकार फिल्मों से भी हमें सीखने को मिलता है। फ़िल्म बनाने में एक फिल्ममेकर और किताब लिखने में लेखक को कितना संघर्ष करना पड़ता है इस साहित्य एवं फ़िल्म महोत्सव से सीखने को मिलेगा।

पैनल डिस्कसन में रखे विचार
आज के उद्घाटन सत्र में लोक साहित्य विशेषज्ञ गुंजल इकिर मुंडा द्वारा “स्मृति के स्वर : मुंडारी कहानी और संगीत” विषय पर अपने विचार रखे। फिल्ममेकर निरंजन कुजूर के सवालों का गुंजल इकिर मुंडा ने बखूबी जवाब दिए।

प्रथम सत्र में संथाली भाषी फ़िल्म “पपाया” फ़िल्म दर्शकों को दिखायी गयी।

आज के कार्यक्रम में उप विकास आयुक्त दिलीप प्रताप सिंह शेखावत, लेखक रणेन्द्र, पेंटर सीआर हेम्ब्रम, कवि एवं लेखक महादेव टोप्पो, फिल्मकार मेघनाथ, फिल्मकार बीजू टोप्पो समेत जिला स्तरीय पदाधिकारीगण व अन्य उपस्थित थे।




