डेस्कः लैब में सोना? सही सुना आपने। वैज्ञानिकों को सबसे बड़ी कामयाबी मिली है। धातुओं को सोने में बदलने की कहानी हम सबने सुनी है । अलकेमिस्ट या किमियागीरी सैकड़ों वर्षों से धरती पर अपना कमाल करते रहे हैं वो ।अलकेमिस्ट द्वारा धातुओं को सोना में बदलने की कहानी हम सैकड़ों वर्षों से सुनते आ रहे हैं लेकिन आज तक इसे लैब में में परखा नहीं जा सका था । मगर दुनिया के नामी वैज्ञानिकों और प्रतिष्ठित लैब LHC में सीसा को सोना में बदलने में कामयाबी हासिल हुई है।
हर सेकेंड में 89,000 सोने के परमाणु
जी हां मध्यकालीन कीमियागरों का सपना अब हकीकत बन गया है। यूरोप के Large Hadron Collider (LHC) में वैज्ञानिकों ने सीसे (Lead) को सोने (Gold) में बदलने में सफलता हासिल की है। हैरानी की बात यह है कि यह मशीन हर सेकंड करीब 89,000 सोने के परमाणु बना रही है।
सोने में बदल गया सीसा
गौरतबल है कि LHC दुनिया की सबसे बड़ी पार्टिकल एक्सीलरेटर (कण त्वरक) मशीन है, जो अत्यधिक गति से परमाणुओं को आपस में टकराती है। इसमें काम कर रही वैज्ञानिकों की टीम ALICE Collaboration ने यह चमत्कारी खोज की है—उन्होंने लेड के परमाणुओं से तीन प्रोटॉन्स निकाल दिए, जिससे वह सोने में बदल गए।
हालांकि, यह प्रक्रिया आमने-सामने की टक्कर से नहीं हुई। टीम ने देखा कि जब दो लेड परमाणु बहुत नजदीक से गुजरते हैं लेकिन टकराते नहीं हैं, तब उनके चारों ओर की शक्तिशाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड (चुंबकीय क्षेत्र) कुछ परमाणुओं को दूसरे तत्वों में बदल देती है।

कितना सोना बना?
2015 से 2018 के बीच हुई एक प्रयोग श्रृंखला में वैज्ञानिकों ने लगभग 8.6 अरब (86 billion) सोने के परमाणु बनाए। यह संख्या सुनने में बहुत बड़ी लगती है, लेकिन इसका कुल वजन केवल 29 पिकोग्राम (एक ग्राम का एक खरबवां हिस्सा) है। यानी इतनी मात्रा से तो एक छोटा सा जेवर भी नहीं बन सकता।
हालांकि मशीन हर सेकंड हजारों परमाणु बना सकती है, लेकिन हर परमाणु का जीवनकाल बेहद कम होता है—वे पलक झपकते ही टूट जाते हैं। हाल के तकनीकी सुधारों से मशीन की क्षमता दोगुनी हो गई है, लेकिन यह अभी भी किसी व्यावसायिक उपयोग के लिए पर्याप्त नहीं है।

पहली बार सोने के निर्माण की पुष्टि
वैज्ञानिक उलियाना दिमित्रियेवा ने बताया कि यह पहली बार है जब LHC में सोने के निर्माण को वैज्ञानिक रूप से देखा और विश्लेषण किया गया है। “ALICE ZDCs की अनोखी क्षमताओं के कारण हम पहली बार इस प्रक्रिया का व्यवस्थित रूप से अध्ययन कर सके हैं,” उन्होंने प्रेस रिलीज़ में कहा।
सिर्फ सोना बनाने के लिए नहीं है यह रिसर्च
वैज्ञानिक जॉन जोवेट ने बताया कि यह प्रयोग केवल सोना बनाने के लिए नहीं हैं, बल्कि इनसे यह समझने में मदद मिलती है कि परमाणु और कण कैसे व्यवहार करते हैं। यह जानकारी भविष्य के बेहतर कण त्वरकों के विकास में उपयोगी होगी।
“ये नतीजे हमें विद्युत–चुंबकीय विघटन (electromagnetic dissociation) के सिद्धांतों को परखने और सुधारने में मदद करते हैं, जो LHC और भविष्य के कोलाइडर्स की परफॉर्मेंस सीमाएं समझने के लिए जरूरी है,” जोवेट ने कहा।




