लोहरदगा जिले के पेशरार थाना क्षेत्र के केकरांग बर टोली गांव में डायन-बिसाही के शक में पति, पत्नी और उनके 9 वर्षीय बेटे की बेरहमी से हत्या के मामले ने राज्य को झकझोर दिया है। इस जघन्य कांड पर झारखंड उच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्रवाई तेज कर दी है।
झालसा (Jharkhand State Legal Services Authority) के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद ने इस घटना को अत्यंत गंभीर मानते हुए लोहरदगा के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश (PDJ) राजकमल मिश्रा को तत्काल आवश्यक निर्देश जारी किए। निर्देशों के पालन में पीडीजे राजकमल मिश्रा ने पुलिस अधीक्षक (SP) सादिक अनवर रिजवी और एसडीपीओ वेदांत शंकर के साथ बैठक कर पूरे मामले की विस्तृत जानकारी ली।
इस दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) की टीम ने भी घटनास्थल का दौरा किया और पीड़ित परिवार से मुलाकात कर रिपोर्ट झालसा, रांची को भेजी। न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद के आदेश पर त्वरित राहत के रूप में पीड़ित परिवार को ₹20,000 की आर्थिक सहायता राशि प्रदान की गई।
डालसा सचिव राजेश कुमार ने पेशरार के बर टोली गांव पहुंचकर कांड की सूचिका और पीड़िता सुखमनिया कुमारी को यह राशि चेक के रूप में सौंपी। इस दौरान उनके देवर सहित अन्य परिजन भी मौजूद थे। डालसा टीम में सचिव राजेश कुमार के साथ पैनल अधिवक्ता लाल धर्मेन्द्र देव और इंद्रानी कुजू शामिल थे। वहीं, एसडीपीओ किस्को वेदांत शंकर भी मौके पर मौजूद रहे।
गौरतलब है कि कुछ दिन पूर्व केकरांग बर टोली गांव में डायन-बिसाही के अंधविश्वास के चलते तीन लोगों की निर्मम हत्या कर दी गई थी। पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी जारी है।



