गुमला : 13 वर्षीय दिव्यांग नाबालिग से दुष्कर्म के जघन्य मामले में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-चार सह पोक्सो के विशेष न्यायाधीश संजीव भाटिया की अदालत ने आरोपी तांत्रिक संजय विश्वकर्मा को पोक्सो अधिनियम के तहत फांसी की सजा सुनाई है। साथ ही दो लाख रुपये अर्थदंड भी लगाया गया है। मामला जनवरी 2022 का है।
झाड़-फूंक के नाम पर बनाया शिकार
अभियोजन के अनुसार आरोपी, जो हजारीबाग जिले के ईचाक का निवासी है, ने पीड़िता के परिजनों का विश्वास जीतकर बच्ची की दिव्यांगता ठीक करने का झांसा दिया। झाड़-फूंक और तांत्रिक क्रियाओं के नाम पर वह इलाज का दावा करता रहा। इसी बहाने उसने बच्ची को अलग कमरे में रखने की बात कहकर कई महीनों तक दुष्कर्म किया। बाद में वह बिना सूचना दिए फरार हो गया।
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गर्भावस्था से हुआ खुलासा
26 अगस्त 2022 को बच्ची की असामान्य शारीरिक स्थिति देखकर परिजनों को संदेह हुआ। चिकित्सकीय जांच में गर्भवती होने की पुष्टि के बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ। पीड़िता के पिता ने तत्काल प्राथमिकी दर्ज कराई। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने झाड़-फूंक के नाम पर करीब 25 हजार रुपये की ठगी की थी।
अदालत की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान विशेष अपर लोक अभियोजक सुधीर कुमार टोप्पो ने गवाहों के बयान व चिकित्सकीय साक्ष्य प्रस्तुत किए। अदालत ने अपराध की गंभीरता, पीड़िता की आयु और दिव्यांगता को देखते हुए कठोरतम दंड को उचित ठहराया। फैसले में कहा गया कि ऐसे अपराध समाज की नैतिक चेतना को झकझोरते हैं और इन पर सख्त दंड जरूरी है।




