रांचीः टेंडर घोटाला के जरिये करोड़ों रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED की ओर से रांची PMLA (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) की स्पेशल कोर्ट में याचिका दायर कर यह जानकारी दी गई है कि पूर्व मंत्री आलमगीर आलम और उनके OSD (ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) संजीव लाल एवं ग्रामीण विकास विभाग के पूर्व इंजीनियर इन चीफ वीरेंद्र राम के विरुद्ध अब तक अभियोजन स्वीकृति नहीं दी है।
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ED ने सरकार से मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के मद्देनजर अभियोजन स्वीकृति मांगी थी। 120 दिन बाद भी सरकार से जवाब नहीं मिलने के बाद प्रवर्तन निदेशालय (इडी) ने पिटीशन दायर कर न्यायालय से सरकार की तरफ से जवाब नहीं मिलने को अभियोजन स्वीकृति मानने (deemed sanction) का अनुरोध किया है।
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ED ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आलोक में करीब पांच महीने पूर्व राज्य सरकार से पूर्व मंत्री आलमगीर आलम और उनके OSD संजीव लाल एवं वीरेंद्र राम के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति मांगी थी। लेकिन उक्त आरोपितों के विरुद्ध अब तक अभियोजन स्वीकृति नहीं मिली। दरअसल नवंबर 2024 से पहले तक मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में किसी अधिकारी के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए सरकार से अभियोजन स्वीकृति लेने की जरूरत नहीं होती थी।लेकिन इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गयी थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई के बाद नवंबर 2024में दिये गये फैसले में सरकारी अधिकारियों के ख़िलाफ़ मुकदमा चलाने के लिए सरकार की अनुमति को आवश्यक बताया था।




