नई दिल्ली: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नक्सलवाद और माओवादी हिंसा को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि देश ने हथियारबंद नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है, लेकिन चुनौती पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। अब उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ कहे जाने वाले लोगों को पहचानने और उन्हें अलग-थलग करने की जरूरत बताई।
प्रधानमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद और माओवाद ने दशकों तक देश के बड़े हिस्से को प्रभावित किया और लाखों युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुंचाया। उनके मुताबिक, इस हिंसा में 3,500 से ज्यादा पुलिस और सुरक्षा बल के जवानों ने अपनी जान गंवाई।


‘हथियारी नक्सली तो गए, लेकिन दिमागी नक्सल मौके की तलाश में’
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार ने देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का संकल्प लिया था और अब नक्सली हिंसा कमजोर पड़ चुकी है। उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में कभी नक्सलियों की गोलियां चलती थीं, वहां अब विकास और विश्वास का माहौल बन रहा है।
इसके बाद उन्होंने नक्सलवाद के एक कथित वैचारिक स्वरूप को लेकर चेतावनी दी। प्रधानमंत्री ने कहा कि जंगलों में हथियारबंद नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई में सफलता मिली है, “लेकिन हथियारी नक्सल तो गए, लेकिन दिमागी नक्सल, यह दिमागी नक्सल मौके की तलाश में है।”उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे लोग हिंसा और अराजकता के रास्ते तलाशते हैं और समाज को गलत दिशा में ले जाने के प्रयास करते हैं।
‘पहचानना और आइसोलेट करना होगा’
प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे लोगों को पहचानने और उन्हें मुख्यधारा से अलग करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि देश की युवा पीढ़ी को विकसित भारत के निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ना जरूरी है।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि नक्सलवाद की चुनौती को कम करके नहीं आंकना चाहिए। प्रधानमंत्री के अनुसार, लंबे समय तक माओवादी विचारधारा से जुड़े लोगों ने सत्ता के गलियारों और सरकारी समितियों में भी प्रभाव बनाने की कोशिश की।
2047 के विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ा नक्सलवाद का मुद्दा
प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद के मुद्दे को विकसित भारत के बड़े लक्ष्य से जोड़ते हुए कहा कि देश को हिंसा और अराजकता से निकालकर विकास की मुख्यधारा में आगे बढ़ाना जरूरी है। उनके संबोधन का केंद्रीय संदेश 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य पर केंद्रित रहा।
उन्होंने युवाओं को इस लक्ष्य का सबसे बड़ा लाभार्थी और साधक बताते हुए स्टार्टअप, AI, शिक्षा, खेल और नई तकनीक के क्षेत्रों में अवसर बढ़ाने की बात भी कही।
प्रधानमंत्री के बयान का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी के इस बयान ने नक्सलवाद की चुनौती को केवल हथियारबंद हिंसा तक सीमित न रखते हुए उसके कथित वैचारिक प्रभाव को लेकर भी बहस को सामने ला दिया है। उनका कहना है कि हथियारबंद नक्सली कमजोर हुए हैं, लेकिन समाज में हिंसा और अराजकता की सोच को बढ़ावा देने वाले तत्वों के प्रति सतर्क रहना होगा।






