झारखंड हाईकोर्ट ने साहिबगंज जिले में पहाड़िया जनजाति के कथित उत्पीड़न के मामले को अति गंभीर मान सख्त आदेश दिया है। जस्टिस संजय प्रसाद की कोर्ट ने कहा कि जिले में कुछ लोग कानून को हाथ में लेकर ‘समानांतर शासन’ चला रहे हैं।
हाईकोर्ट ने आरोपी सफीकुल शेख, जलील शेख और काशिम शेख की अग्रिम जमानत खारिज कर दी है। प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए पहाड़िया समुदाय को तत्काल सुरक्षा और सुविधाएं देने को कहा। एफआईआर के अनुसार 14 मार्च 2025 को साहिबगंज के सिरासिन में पहाड़िया जनजाति के लोग होली मना रहे थे। इसी एक समुदाय के कुछ लोगों ने होली मनाने से रोक दिया। साथ ही इस समुदाय का राशन-पानी बंद करा दिया।
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आरोप है कि महिलाओं के साथ बदसलूकी भी की गई और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। इतना ही नहीं, आरोपियों द्वारा यह फरमान जारी किया गया कि कोई दुकानदार पहाड़िया समुदाय को राशन नहीं देगा, कोई डॉक्टर इलाज नहीं करेगा, सरकारी नल से पानी नहीं लेने दिया जाएगा और बच्चों को स्कूल और आंगनबाड़ी जाने से रोका जाएगा। एक सरकारी कुएं को भी पत्थर डालकर क्षतिग्रस्त करने का आरोप है।
कोर्ट ने साहिबगंज के डीसी और एसपी को आदेश दिया कि वे पहाड़िया समुदाय की तत्काल सुरक्षा सुनिश्चित करें। साथ ही राज्य सरकार, गृह विभाग, डीजीपी और आदिवासी कल्याण विभाग को निर्देश दिया कि भोजन, पानी, चिकित्सा और अन्य मूलभूत सुविधाएं बिना किसी बाधा के उपलब्ध कराई जाएं।
जरूरत पड़ने पर वरिष्ठ अधिकारियों की समिति गठित करने को भी कहा गया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसी घटनाएं केवल साहिबगंज ही नहीं, बल्कि पूरे दुमका प्रमंडल में दोबारा न हों, इसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार और पुलिस महानिदेशक की होगी।
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