पलामू में फिल्माई गई सत्यजीत रे ‘Days and Nights in the Forest’ 4k में रिलीज, शर्मिला टैगोर-सिमी ग्रेवाल आईं थीं झारखंड

DaysAndNightsInForest_image_05

डेस्क: ‘’ये रास्ता पलामू जाता है?” एंबेसडर पर सवार का सवाल था । …. 1969 का साल था । पतझड़ का मौसम था । शर्मिला टैगोर, सिमी ग्रेवाल, सत्यजीत रे पलामू में थे । पलामू के लोगों की जेहन से ये यादें कब की मिट चुकी होगीं। याद भी नहीं होगा कि कोयल नदी के किनारे… पलामू के जंगलों में दुनिया के मशहूर फिल्मकार ने उस वक्त Days and Night in the Forest को फिल्माया था जब किसी ने कैमरा तक नहीं देखा था । शर्मिला टैगोर, सिमी ग्रेवाल महीनों इस जंगल में रहीं 

पलामू में हुई थी सत्यजीत रे की फिल्म की शूटिंग

सत्यजीत रे ने अपनी महानतम फिल्मों में एक Days and Night in the Forest यहीं पर फिल्माई थी । पहली बार कैमरे में संताली संस्कृति की झलक सत्यजीत रे की इस फिल्म से ही दुनिया के सामने पहुंची । 16 जनवरी 1970 को Days and Night in the Forest रिलीज हुई थी ।  56 साल बीत चुके हैं । JANUS FILMS ने 27 फरवरी को 4K में इसे रिलीज किया है ।

DaysAndNightsInForest image 06

पलामू की फिल्म दुनिया भर में छाई

न्यूयॉर्क टाइम्स समेत कई बड़े अखबारों में इस फिल्म की समीक्षा प्रकाशित हुई है। झारखंड में फिल्माई गई, सज्यजीत रे द्वारा निर्देशित और शर्मिला टैगोर, सिमी ग्रेवाल जैसी अदाकारा का पलामू में शूटिंग करने की ये कहानी झारखंड के लोगों जरुर सुननी चाहिए …क्योंकि पयर्टन को बढ़ावा देने के लिए सरकारें माथापच्ची कर रही हैं, करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं लेकिन अपने सुनहरे इतिहास का कनेक्शन भूलते जा रहे हैं ।

सुनील गंगोपाध्याय के उपन्यास पर आधारित

सुनिल गंगोपाध्याय के 1968 के चर्चित उपन्यास पर आधारित डेज़ एंड नाइट्स इन द फॉरेस्ट निर्देशक सत्यजीत रे की महान उपलब्धियों में से एक है। यह आधुनिक समय में संबंधों की खोज की कहानी है, जिसमें लोककथा जैसी शाश्वत गूंज महसूस होती है।

DaysAndNightsInForest image 01

शर्मिला टैगौर और सिमी ग्रेवाल थीं एक्टर

कलकत्ता की भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर भागने की चाह में चार दोस्त—अशीम (सौमित्र चटर्जी), संजय (शुभेंदु चटर्जी), हरी (समित भंजा) और शेखर (रवि घोष)—पलामू की ओर निकल पड़ते हैं, जो भारत के ग्रामीण “आदिवासी इलाकों” में से एक है। वे एक चौकीदार को रिश्वत देकर जंगल के बीच बने एक अतिथि गृह में ठहरते हैं।

DaysAndNightsInForest image 02 2

हालाँकि वे सब कुछ छोड़कर दूर रहने का संकल्प लेते हैं, लेकिन जल्द ही वे स्थानीय लोगों से घुलने-मिलने लगते हैं। एक वन-परिवार से उनका परिचय होता है—संवेदनशील और चंचल अपर्णा (शर्मिला टैगोर) आत्मविश्वासी अशीम की ओर आकर्षित होती है, जबकि उसकी विधवा भाभी जया (काबेरी बोस) पुस्तक-प्रेमी संजय के करीब आती है। उधर, हाल ही में प्रेम-विच्छेद से गुज़रे हरी की मुलाकात संथाल लड़की दुली (सिमी गरेवाल) से होती है, और शेखर, जो स्वयं जुए का शौकीन है, अपने दोस्तों की शराबी उच्छृंखलता को नियंत्रित करने की कोशिश करता है। रे की यादगार चरित्र-रचना और सौमेंदु रॉय की भव्य श्वेत-श्याम छायांकन से सजी यह फिल्म पुरुष असुरक्षाओं और भारतीय वर्ग-भेद को गहरी संवेदनशीलता और परिपक्वता के साथ प्रस्तुत करती है।

सत्यजीत रे की संवेदनशील फिल्म

सत्यजीत रे के लगभग चार दशक लंबे निर्देशन करियर में कई महत्वपूर्ण मोड़ आए। 1969 में उन्होंने द एडवेंचर्स ऑफ गूपी एंड बाघा जैसी संगीतमय फैंटेसी फिल्म बनाई, जो उनके दादा उपेंद्रकिशोर राय चौधरी की कहानी पर आधारित थी। इससे पहले रे को संवेदनशील और यथार्थवादी फिल्मों के लिए जाना जाता था।

Days and Night in the Forest

Days and Night in the Forest 4k में रिलीज

इसके बाद 1970 में उन्होंने डेज़ एंड नाइट्स इन द फॉरेस्ट बनाई, जो फिर से एक शांत, मानवीय नाटक की ओर वापसी थी। ब्रिटिश विद्वान एंड्रयू रॉबिन्सन के अनुसार, रे ने सुनिल गंगोपाध्याय के उपन्यास के फिल्म अधिकार एक पत्रिका के विज्ञापन के आधार पर ही खरीद लिए थे।

रे ने कहानी में कई बदलाव किए। उपन्यास में चार बेरोजगार युवक ट्रेन से जंगल जाते हैं, लेकिन फिल्म में तीन को नौकरी दी गई है और वे कार से पलामू जाते हैं। इससे उनके चरित्र मध्यवर्गीय कलकत्ता समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं, न कि आवारा युवकों का। उनके व्यवहार में पश्चिमी प्रभाव और वर्ग-भेद भी झलकता है।

satyajit

रे ने पात्रों को अधिक जटिल और आधुनिक बनाया। फिल्म भारत के नए शहरी युवाओं के अकेलेपन, निराशा और असुरक्षा को दर्शाती है। पश्चिमी समीक्षकों ने इसे अत्यंत सराहा और इसे लगभग “यूरोपीय दृष्टिकोण” वाली फिल्म कहा।

प्रमुख कलाकार

अशीम – सौमित्र चटर्जी

संजय – शुभेंदु चटर्जी

हरी – समित भंजा

शेखर – रवि घोष

अपर्णा – शर्मिला टैगोर

जया – काबेरी बोस

दुली – सिमी गरेवाल

सत्यजीत रे की इस फिल्म को उस वक्त पूरी दुनिया खासतौर से अमेरिका और यूरोप में खूब सराहा गया

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now