पटना : नीतीश सरकार के दो मंत्रियों के बीच आमने-सामने की स्थिति आ गई है। एक ने अपने बेटी को दूसरे दल से टिकट दिलाया तो दूसरे ने अपने बेटे को भी दूसरे दल में पहले शामिल कराया और अब टिकट के इंतजार है। मामला राज्य के सबसे हॉट सीटों में से एक समस्तीपुर की लोकसभा सीट की है। जहां से बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी की बेटी शांभवी चौधरी चिराग पासवान की पार्टी से उम्मीदवार है। यहां उनको चिराग ने अपने भाई प्रिंस राज का टिकट काटकर मैदान में उतारा है।
शांभवी की राह में रोड़े कोई और नहीं अटका रहा है, उनके सामने उनके पिता के कैबिनेट सहयोगी महेश्वर हजारी खड़े है जो अपने बेटे सन्नी हजारी को चुनाव मैदान में उतारना चाहते है। महेश्वर हजारी के बेटे ने इसी महीने कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ली है, गठबंधन के तहत समस्तीपुर की सीट कांग्रेस के खाते में गई है , माना जा रहा है कि सन्नी यहां शांभवी के मुकाबले चुनाव मैदान में उतर सकते है। दोनों ही उम्मीदवार नये है लेकिन सन्नी और शांभवी में दो बातों को लेकर तुलना हो रही है, या यू कहे कि समस्तीपुर में ये चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसका असर आमने-सामने की टक्कर में देखा जा सकता है। पहली बात की सन्नी हजारी समस्तीपुर जिले के ही है उनके पिता वहां से विधायक भी है, शांभवी के बारे में ये बाते कही जा रही है कि वो बाहरी है, ऐसे में समस्तीपुर को न तो वो समझ पाएंगी न ही और न ही वो यहां समय दे पाएंगी। दूसरी बात की महेश्वर हजारी पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत रामविलास पासवान के ममेरे भाई है। महेश्वर हजारी के पिता रामसेवक हजारी ही रामविलास पासवान को राजनीति में लेकर आये थे। वो भी सांसद और विधायक रह चुके थे। समस्तीपुर की सीट भी परंपरागत तौर पर पासवान परिवार का ही रहा है। पहले रामविलास के भाई रामचंद्र पासवान वहां से सांसद थे बाद में उनके बेटे प्रिंस पासवान वहां से सांसद बने, ऐसे में महेश्वर हजारी के बेटे सन्नी अगर चुनाव मैदान में उतरते है तो पासवान परिवार का हिस्सा होने का फायदा उन्हे मिल सकता है।
शांभवी बनाम सन्नी के संभावित भिड़त और क्षेत्र से मिल रहे फिडबैक के बाद मंत्री अशोक चौधरी के पसीने छूट गए है। राजनीतिक दावपेंच के माहिर माने जाने वाले अशोक चौधरी ने अपने सारे रिश्तों और संबंधों को टटोलना शुरू कर दिया है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष रह चुके अशोक चौधरी पटना से लेकर दिल्ली तक लॉबिंग कर महेश्वर हजारी के बेटे सन्नी हजारी को टिकट नहीं मिलने को लेकर तिकड़म लगा रहे है। कांग्रेस में अपने पुराने संबंध और लगाव को लेकर उन्होने पटना से लेकर दिल्ली तक कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं को सन्नी की जगह किसी और को टिकट देने का दवाब बना रहे है। समस्तीपुर में भी कांग्रेस के कई नेताओं को भी उन्होने पुराने रिश्ते याद दिलाये है, कई नेताओं को तो उन्होने अध्यक्ष रहते हुए किये गए के मदद की भी याद दिला दी है। समस्तीपुर में उम्मीदवार को लेकर कांग्रेस की ओर से हो रहे विलंब को भी इसी लॉबिंग का प्रभाव माना जा रहा है। समस्तीपुर में पिछली बार कांग्रेस ने अशोक राम को टिकट दिया था जिनको प्रिंस राज ने शिकस्त दी थी। शांभवी और सन्नी के बीच अगर चुनाव में आमना सामना होता है तो ये बिहार की सबसे मुख्य सीटों में एक होगी जहां नीतीश सरकार के दो मंत्रियों की दांव साख पर होगी।
साथी मंत्री के बेटे का टिकट कटावाने के लिए कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष पुराने पार्टी में कर रहे है लॉबिंग, बेटी की हार का सता रहा है डर

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