डेस्कः नीट पेपर लीक-2026 को लेकर दिल्ली से लेकर पटना और मुंबई से लेकर रांची तक छात्रों का प्रदर्शन हो रहा है। पेपर लीक को लेकर कांग्रेस के साथ-साथ विपक्षी पार्टियां सत्तारूढ़ बीजेपी सरकार की घेराबंदी करते हुए शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे है। पेपर लीक को लेकर हो रही सियासत के बीच 2020 में हुए नीट पेपर लीक मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। नीट-यूजी 2024 पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने आरोपी संजीव कुमार उर्फ संजीव मुखिया को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की। एजेंसी ने कहा कि विस्तृत और गहन जांच के दौरान संजीव मुखिया के खिलाफ नीट-यूजी 2024 पेपर लीक या उसके वितरण में शामिल होने का कोई सबूत नहीं मिला। इसलिए इस मामले में चार्जशीट दाखिल नहीं की गई।
CBI ने जांच के बाद क्या कहा?
सीबीआई ने बताया कि वर्ष 2024 में बिहार पुलिस ने नीट-यूजी 2024 परीक्षा का प्रश्नपत्र चोरी होने का खुलासा किया था और इस संबंध में मामला दर्ज किया था। शुरुआती जांच में संजीव मुखिया पर संदेह जताया गया था, क्योंकि वह पहले भी कई परीक्षा प्रश्नपत्र चोरी और लीक मामलों में कथित रूप से शामिल पाया गया था। इसी आधार पर बिहार पुलिस ने उन्हें एफआईआर में आरोपी बनाया था।
पेपर लीक को लेकर मुखिया था चर्चा में
बाद में इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई। एजेंसी ने कहा कि जांच के दौरान उसने प्रश्नपत्र चोरी करने, उसे आगे पहुंचाने और उससे फायदा उठाने वाले हर व्यक्ति की पहचान कर ली। इसके बाद सीबीआई ने पटना की सक्षम अदालत में कुल 45 आरोपियों के खिलाफ कई चार्जशीट दाखिल की हैं।
जांच के दौरान किसी तरह का साक्ष्य नहीं मिला
सीबीआई के अनुसार, जांच के दौरान ऐसा कोई भी साक्ष्य नहीं मिला, जिससे यह साबित हो सके कि संजीव मुखिया नीट-यूजी 2024 प्रश्नपत्र चोरी या उसके वितरण की साजिश में शामिल थे। एजेंसी का कहना है कि उसने इस पूरे मामले की गहराई से जांच की है और पूरी साजिश तथा उसमें शामिल सभी लोगों की पहचान कर ली गई है।
बिहार पुलिस ने किया था गिरफ्तार
सीबीआई ने यह भी बताया कि जांच के दौरान संजीव मुखिया फरार थे। बाद में उन्हें बिहार पुलिस ने अन्य मामलों में गिरफ्तार किया। नीट-यूजी 2024 मामले की एफआईआर में भी उनका नाम था, इसलिए सीबीआई ने इस मामले में पूछताछ के लिए उन्हें पुलिस रिमांड पर लिया था।
पूछताछ के दौरान नहीं मिला सबूत
हालांकि, पूछताछ और जांच के बाद भी उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला, जिसके कारण सीबीआई ने इस मामले में उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल नहीं की और उन्हें इस केस में जमानत मिल गई। हालांकि, सीबीआई मामले में जमानत मिलने के बाद भी संजीव मुखिया बिहार पुलिस द्वारा जांच किए जा रहे अन्य मामलों में आरोपी होने के कारण न्यायिक हिरासत में रहे।
पेपर लीक मामले की जांच पूरी
सीबीआई ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि नीट-यूजी 2024 पेपर लीक मामले की पूरी जांच पूरी हो चुकी है, इसमें शामिल सभी लोगों की पहचान कर ली गई है और यह सुनिश्चित किया गया है कि कोई भी आरोपी कानून की प्रक्रिया से बच न सके।एजेंसी ने यह भी कहा कि यह स्थिति वर्ष 2024 में ही स्पष्ट कर दी गई थी। इसलिए अब यह दावा करना कि संजीव मुखिया का नाम जानबूझकर जांच से बाहर रखा गया या उन्हें बचाया गया, तथ्यात्मक रूप से पूरी तरह गलत है।


