भागो, भागो, …पानी आ गया। जाओ-जान बचाओ….धराली बाजार के दूसरी तरफ ऊंचाई वाले स्थानों से उफनाती खीरगंगा को देखकर भयभीत लोगों ने बाजार में मौजूद लोगों को सावधान करने की भरपूर कोशिश की, लेकिन वे कामयाब नहीं हो पाए। पानी की रफ्तार इतनी तेज थी कि कुछ ही पलों में खीरगंगा के सैलाब ने वहां मौजूद सभी लोगों को गिरफ्त में ले लिया। कुछ ही पलों में धराली बाजार का ज्यादातर हिस्सा नक्शे से गायब हो गया। वहीं, काफी लोग मलबे में दब गए।
मंगलवार दोपहर करीब डेढ़ बजे तक धराली बाजार में सबकुछ सामान्य था। धराली में बने होटलों और होम स्टे में रोजाना की तरह लोग अपना काम कर रहे थे। बाहर से आए यात्री होटलों और होम स्टे में रात गुजारने की तैयारी में थे। कोई खाना खा रहा था, तो कोई सो रहा था। कई लोग बाजार में टहल कर धराली के प्राकृतिक सौंदर्य का लुत्फ उठा रहे थे। किसी को नहीं पता था कि अगले ही पल क्या होने वाला है।
स्थानीय निवासी संजय पंवार, जयभवान पंवार, उत्तम पंवार ने बताया कि दोपहर करीब 1:50 बजे खीरगंगा में जलजला आते ही सबकुछ बदल गया। धराली की दूसरी ओर मौजूद लोगों ने खीरगंगा में उफान आता देख वहां मौजूद लोगों को सीटियां बजाकर और शोर मचाकर सावधान करने की कोशिश की, लेकिन जब तक लोग कुछ समझ पाते तब तक खीरगंगा का पानी और मलबा धराली पहुंच गया। वहां मौजूद लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला।
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कुछ ही पलों के भीतर खीरगंगा के सैलाब ने धराली बाजार को आगोश में ले लिया और पलभर में ही पूरा बाजार मलबे के ढेर में बदल गया। दर्जनों होटल और होम स्टे इस जलजले में बह गए। काफी लोग लापता बताए जा रहे हैं। कितनी जनहानि हुई है, इसका कोई अनुमान अभी तक नहीं लग पाया है। खीरगंगा के उफान ने धराली बाजार का नक्शा ही बदल दिया। अपनी प्राकृतिक सुदंरता के लिए मशहूर धराली फिलहाल तबाही की तस्वीर बनकर रह गया है।
गंगोत्री हाईवे पर यातायात ठप
धराली में खीरगंगा के उफान से गंगोत्री हाईवे का करीब 100 मीटर हिस्सा मलबे में दब गया। इससे हाईवे पर यातायात ठप हो गया। झाला से लेकर धराली तक जगह-जगह मलबा आने से हाईवे पर यातायात बाधित हो गया है। हर्षिल हेलीपैड के पास भी मलबा आने से हाईवे बंद है। इससे गंगोत्री धाम की यात्रा पर भी ब्रेक लग गया है। क्षेत्र में लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण सड़कों को खोलने के प्रयास सफल नहीं हो पा रहे हैं। धराली में खीरगंगा में आए उफान के बाद गंगोत्री हाईवे पर कई वाहन मलबे में दबे गए। हाईवे बंद होने से गंगोत्री की ओर दर्जनों यात्री वाहन फंसे हुए हैं। जबकि भटवाड़ी वाले छोर से यात्री आगे नहीं जा पा रहे।
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धराली हादसे में इतनी तबाही के पीछे पानी की रफ्तार और मलबे का दबाव भी बड़ी वजह रहा। विशेषज्ञों के अनुसार, जिस तरह से वहां ऊपर से पानी और मलबा आया और चंद सेकेंड में ही तबाही मचाई, तब पानी की रफ्तार करीब 15 मीटर प्रति सेकेंड रही होगी। इसके साथ ही, उस पानी के साथ आए मलबे ने 250 किलो पास्कल (प्रेशर की यूनिट) का दबाव पैदा किया, जिस कारण एक भी निर्माण टिक नहीं सका।
15 मीटर प्रति सेंकंड थी रफ्तार
दून विश्वविद्यालय में भूगर्भ विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉ. विपिन कुमार के अनुसार इस तरह की संकरी घाटियों में अतिवृष्टि या बाढ़ के चलते पानी जब तेजी से मलबे के साथ है तो उसकी रफ्तार काफी ज्यादा होती है। धराली आपदा की वीडियो फुटेज और पुराने अध्ययन के आधार पर यह कहा जा सकता है कि पानी की रफ्तार 15 मीटर प्रति सेकेंड के आसपास रही होगी। साथ ही, पानी के साथ नीचे की ओर आए मलबे ने भवनों पर करीब 250 किलो पास्कल का दबाव डाला होगा। पानी की रफ्तार और मलबे का दबाव इस बड़ी तबाही के लिए जिम्मेदार है।
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डॉ. विपिन के अनुसार, उन्होंने अपनी टीम के साथ कुछ समय पूर्व ही इस इलाके में शोध किया था। तब यह बात सामने आई थी कि इस क्षेत्र में पहले भी इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं, जिनका मलबा ऊपरी इलाके में जमा था। प्रोफेसर डॉ. नेहा चौहान ने बताया, गर्मियों में ग्लेशियर पिघलने से भी धीरे-धीरे वहां पर मलबा जमा हो रहा था, जिसने भारी बारिश के कारण पानी के साथ आकर धराली में इतनी बड़ी तबाही मचाई।
रास्ते बंद, हर तरफ पानी और मलबा, उत्तरकाशी में आपदा के आगे बचाने वाले भी बेबस

उत्तरकाशी में मलबे में फंसे लोगों के जीवन पर एक एक पल काफी भारी गुजर रहा है। बंद रास्तों के कारण प्रशासन को राहत पहुंचाने में खासी मुसीबतों का सामना करना पड़। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने बीआरओ और लोनिवि अधिकारियों को जल्द से जल्द मार्ग खुलवाने के निर्देश दिए हैं।
रेस्क्यू टीम को हो रही काफी दिक्कत
आपदा की सूचना मिलते ही रेस्क्यू आपरेशन की टीम उत्तरकाशी आगे रवाना होने लगी तो करीब आठ किलोमीटर आगे नेताला में बारिश में आए मलबे ने रोक दिया। काफी देर मशक्कत करने के बाद देर शाम नेताला मार्ग खुल पाया था। उसके बाद भटवाड़ी और झाला के पास भी जगह जगह मलबा आने की वजह से यातायात बाधित था। इस बीच क्षेत्र संचार सेवाएं और बिजली आपूर्ति प्रभावित होने ने भी मुश्किलों को बढ़ा दिया है। दून में अपराह्न प्रभारी मुख्य सचिव आरके सुधांशु ने राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के कंट्रोल रूम में अधिकारियों संग राहत कार्यों की समीक्षा की।
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आपदा प्रबंधन सचिव वीके सुमन के अनुसार एनडीआरएफ के 50 जवान दिल्ली से भेजे गए हैं व दून से 15 जवान गए हैं। देहरादून और गंगोत्री से एसडीआरएफ के 75 और आईटीबीपी के 30 जवानों को घटनास्थल भेजा गया है। अधिकारियों ने बताया कि मार्ग बाधित होने तथा मौसम खराब होने के कारण राहत और बचाव दलों को घटनास्थल पर पहुंचने में कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मार्गों को खोलने की कार्यवाही गतिमान है। मौसम के अनुकूल होते ही, राहत और बचाव दल हवाई तथा सड़क मार्ग से घटनास्थल पर पहुंच जाएंगे।
युकाडा दो हेली देगा, केंद्र से भी मांगी मदद
प्रभारी मुख्य सचिव आरके सुधांशु ने बताया कि युकाडा के दो हेलीकॉप्टर राहत और बचाव कार्यों के लिए भेजे जाने के लिए तैयार हैं। मौसम अनुकूल होने पर वायु सहायता पहुंचाई जाएगी। दूसरी तरफ, रेस्क्यू टीमों को घटना स्थल तक जल्द से जल्द पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार से दो एमआई 17 और एक चिनूक हेलीकॉप्टर मांगा गया है। इसके लिए पत्र भेज दिया गया है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय तथा गृह मंत्रालय को घटना के संबंध में जानकारी दे दी है। केंद्र सरकार ने राहत और बचाव कार्यों में हरसंभव मद्द का आश्वासन दिया है।
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