चाईबासाः चक्रधरपुर में स्थित झारखंड के कल्याण विभाग द्वारा संचालित आदिवासी कन्या छात्रावास की बदहाली और जर्जर स्थिति एक बार फिर उजागर हो गई है। छात्रावास भवन की छत का एक बड़ा हिस्सा अचानक भरभरा कर नीचे गिर गया, जिसके बाद से परिसर में रह रही छात्राओं और उनके अभिभावकों में दहशत का माहौल है। राहत की बात यह रही कि जिस वक्त यह मलबा गिरा, वहां कोई भी छात्रा मौजूद नहीं थी, जिसके कारण एक बहुत बड़ा हादसा टल गया। इस घटना में किसी प्रकार की जान-माल की क्षति नहीं हुई। वर्तमान में इस पुराने और खोखले हो चुके भवन में 73 छात्राएं रहकर अपनी पढ़ाई कर रही हैं। भवन वर्षों पुराना होने के कारण इसकी छतों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं। स्थानीय लोगों और छात्राओं का कहना है कि यह घटना प्रशासन के लिए एक खुली चेतावनी है और यदि समय रहते नए भवन का निर्माण नहीं कराया गया, तो भविष्य में किसी बड़े और दर्दनाक हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।

मूलभूत सुविधाओं के लिये भी छात्राएं परेशान
छात्रावास में रहने वाली छात्राओं को सिर्फ भवन की जर्जरता ही नहीं, बल्कि कई अन्य मूलभूत समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है। यहां जनरेटर की सुविधा उपलब्ध नहीं है। जिससे बिजली कटने पर छात्राओं को अंधेरे में रहना पड़ता है। वहीं छात्रावास परिसर में स्थापित सोलर जलमीनार पिछले पांच वर्षों से खराब पड़ी हुई है। इसके कारण 73 छात्राएं केवल एक चापाकल के सहारे पानी की जरूरतें पूरी करने को मजबूर हैं।
कॉमन रूम, लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं
छात्रावास के सामुदायिक शौचालय की स्थिति भी बदहाल है। शौचालयों के दरवाजे टूट चुके हैं और नियमित रखरखाव के अभाव में उनका उपयोग करना कठिन हो गया है। परिसर कच्चा होने के कारण बारिश के दिनों में कीचड़ और जलजमाव की समस्या उत्पन्न हो जाती है। छात्राओं को फिसलने और गिरने का खतरा बना रहता है। छात्राओं एवं अभिभावकों ने परिसर में पेवर्स ब्लॉक लगाने की मांग की है ताकि आवागमन सुगम हो सके। छात्रावास में डाइनिंग हॉल, कॉमन रूम, लाइब्रेरी और साइकिल स्टैंड जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है। आधुनिक सुविधाओं के दौर में जहां विद्यालयों और अन्य छात्रावासों में गैस सिलेंडर से भोजन तैयार किया जा रहा है। वहीं यहां आज भी लकड़ी के चूल्हे पर भोजन पकाया जाता है। छात्रावास का रसोईघर भी जर्जर अवस्था में है, जिससे सुरक्षा संबंधी चिंताएं बनी हुई हैं।

छात्राओं और वार्डन ने बयां किया अपना दर्द
छात्रावास की बदहाली को लेकर यहाँ रहने वाली सुमित्रा बोयपाई, संगीता गोडसोरे, रायमुनी पाडेया, श्रीदेवी सवैया और लक्ष्मी हेयं जैसी छात्राओं ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि छत गिरने की घटना के बाद से वे सब इतनी डरी हुई हैं कि रात को कमरों में सोने में भी डर लगता है। छात्राओं ने बताया कि यहां न तो कोई डाइनिंग हॉल है, न लाइब्रेरी, न कॉमन रूम और न ही साइकिल स्टैंड। वहीं, मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए छात्रावास की वार्डन स्नेहलता डहंगा ने कहा कि भवन काफी पुराना और सचमुच बेहद जर्जर हो चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्राओं की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और भवन की मरम्मत सहित अन्य तमाम गंभीर समस्याओं को लेकर विभागीय उच्चाधिकारियों को समय-समय पर लिखित रूप से जानकारी दी जाती रही है। अभिभावकों और स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने अब कल्याण विभाग से अविलंब इस बदहाली का संज्ञान लेने और तत्काल एक नए सुरक्षित भवन के निर्माण की मांग तेज कर दी है।


