डेस्कः उग्रवादी संगठन जेजेएमपी का खात्मा करने के बाद गुमला पुलिस का अगला टारगेट झांगुर गुट था। पुलिस की लगातार हो रही दबिश के बाद नरसंहार, अपहरण, हत्या, रंगदारी, गोली समेत 50 से अधिक मामलों में वांछित झांगुर गुट के सुप्रीमो कुख्यात रामदेव उरांव से आत्मसमर्पण कर दिया है। गुमला जिले के बिशुनपुर प्रखंड क्षेत्र में अपराधिक घटनाओं को अंजाम देने वाले दुर्दंात झांगुर गुट के रामदेव उरांव के सरेंडर करने की चर्चा सोमवार से जारी है। रामदेव उरांव के सरेंडर करने को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही है। कोई पुलिस के द्वारा उसकी गिरफ्तारी की बात कह रहा है तो कोई उसके आत्मसर्पण करने की बात कह रहा है। जबकि इस मामले में एसपी हारिस बिन जमां ने गिरफ्तारी या आत्मसमर्पण की बात से इंकार किया है।
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केंद्रीय खुफिया विभाग के एक अधिकारी ने नाम सामने नहीं आने के शर्त पर बताया कि रामदेव उरांव ने सरेंडर कर दिया है। रांची से आई पुलिस और उसके अधिकारियों की मौजूदगी में उसे रांची लाया गया है। वहां उससे पूछताछ की जा रही है। इधर मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है। सरेंडर की सूचना से व्यवसायी और लेवी देने वाले शांति और सुकून महसूस कर रहे हैं। रामदेव उरांव की सरेंडर या गिरफ्तारी की पुष्टि यदि होती है, तो यह गुमला पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता मानी जाएगी।
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कौन है रामदेव उरांव
2002 में झांगुर गुट के सुप्रीमो मारकुस मुंडा को मारकर खुद सुप्रीमो बनने वाला रामदेव उरांव ने बिशुनपुर और आसपास के प्रखंडों के उन क्षेत्रों में अपना वर्चस्व कायम किया जहां भाकपा माओवादी सक्रिय था। भाकपा माओवादियों से भी टक्कर लेता रहा। इसके खिलाफ बिशुनपुर, गुरदरी, घाघरा और चैनपुर थाना में 50 से अधिक हत्या, आर्म्स एक्ट, आगजनी जैसे गंभीर मामले दर्ज है। 17 से अधिक मामले में स्थायी वारंटी है। केवल बिशुनपुर थाना क्षेत्र में 40 से अधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस द्वारा चलाए गए अभियान में उसके सहयोगी पकड़े जाते थे लेकिन वह हर बार बच निकलता था। एके-56 जैसे आधुनिक हथियार के दम पर क्षेत्र में दहशत कायम किया था। सूत्रों के अनुसार, रामदेव उरांव ने बिशुनपुर और उसके आसपास के उन दुर्गम जंगलों में अपना नेटवर्क फैला रखा था, जहां कभी भाकपा माओवादी का दबदबा हुआ करता था। अपने कुछ वफादार साथियों की मदद से वह वर्षो तक पुलिस की गिरफ्त से बचता रहा। पुलिस ने वर्ष 2005, 2009, 2013 और 2018, 2021, 2025 में उसके खिलाफ विशेष अभियान चलाए। न केवल जिला पुलिस बल्कि केंद्रीय सुरक्षा बल के द्वारा गहन अभियान चलाया गया लेकिन रामदेव उरांव हर बार पहाड़ों और जंगलों में छिपकर फरार होने में सफल हो जाता था। ग्रामीण इलाकों में उसका भय इतना था कि लोग उसके खिलाफ शिकातय करने से डरते थे। पिछले 23 वर्षा से रामदेव ने पूरे इलाके में दहशत बनाये रखा था।




