लोहरदगा में निशा उरांव के नेतृत्व में पेसा कानून उल्लंघन के खिलाफ विरोध, पारंपरिक अगुआओं ने डीसी को सौंपा ज्ञापन

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June 11, 2026

लोहरदगा: जिले में पेसा कानून, 1996 और आदिवासी पारंपरिक व्यवस्था को लेकर नया विवाद सामने आया है। आदिवासी पारंपरिक बहुस्तरीय व्यवस्था, लोहरदगा जिला के प्रतिनिधियों ने वरिष्ठ आईआरएस अधिकारी निशा उरांव के नेतृत्व में उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर पारंपरिक ग्राम सभाओं, रूढ़िजन्य कानूनों तथा धार्मिक-सांस्कृतिक अधिकारों के संरक्षण की मांग की है।

प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि जिले में “मॉडल ग्राम सभा” के नाम पर ऐसी नई व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं, जो आदिवासी समाज की पारंपरिक ग्राम सभा व्यवस्था और पेसा कानून की मूल भावना के विपरीत हैं। संगठन ने मांग की कि केवल ग्राम प्रधान, हातु मुंडा, महतो, पाहन और पाइनभरा जैसे पारंपरिक पदों वाली ग्राम सभाओं को ही मान्यता दी जाए।

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ज्ञापन में धर्मांतरित आदिवासियों के धार्मिक एवं पारंपरिक पदों पर बने रहने पर भी सवाल उठाया गया। संगठन का कहना है कि ग्राम प्रधान, पाहन, महतो और पड़हा राजा जैसे पद धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व रखते हैं, इसलिए पारंपरिक आदिवासी आस्था का पालन नहीं करने वाले धर्मांतरित व्यक्तियों को इन पदों पर नहीं रखा जाना चाहिए।

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इसके अलावा गांवों में आयोजित होने वाली कथित चंगाई सभाओं पर भी आपत्ति जताते हुए प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि ग्राम सभा की पूर्व अनुमति के बिना किसी भी प्रकार की चंगाई सभा आयोजित करने पर रोक लगाई जाए। उन्होंने इस संबंध में न्यायालयों के आदेशों का भी हवाला दिया।

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संगठन ने भुईहरी और पहनाई भूमि के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि धर्म परिवर्तन के बाद पारंपरिक पदों से जुड़ी ऐसी भूमि पर अधिकार समाप्त माना जाना चाहिए और उसे पुनः ग्राम सभा के नियंत्रण में दिया जाना चाहिए।

ज्ञापन में गैर-पारंपरिक पड़हा संगठनों को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई। संगठन ने प्रशासन से मांग की कि धनबल या अन्य माध्यमों से गठित ऐसे संगठनों को सरकारी अथवा कानूनी मान्यता नहीं दी जाए।

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प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से पेसा नियमावली के अनुरूप सभी प्रक्रियाओं में पारंपरिक आदिवासी पदाधिकारियों की भागीदारी सुनिश्चित करने तथा आदिवासी समाज की धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक स्वायत्तता की रक्षा के लिए शीघ्र कार्रवाई करने की मांग की।

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