महिला आरक्षण पर लोकसभा में पीएम मोदी ने विपक्ष को घेरा, ‘विरोध करने वालों को उठानी पड़ेगी कीमत’

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Live Dainik

April 16, 2026

pm modi in loksabha

नई दिल्ली: संसद के विशेष सत्र के दौरान लोकसभा में बोलते हुए प्रधानमंत्री Narendra Modi ने कहा कि भारत में महिलाओं को आरक्षण 25–30 साल पहले ही लागू हो जाना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा कि अब संसद के पास एक ऐतिहासिक अवसर है, जिससे महिलाओं की निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ाकर देश के विकास को और मजबूत किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि महिलाओं की बढ़ती भागीदारी न सिर्फ उन्हें सशक्त बनाएगी, बल्कि देश में अधिक समावेशी और संतुलित शासन भी सुनिश्चित करेगी।

इस विशेष सत्र में तीन प्रमुख विधेयक पेश किए गए हैं:

  • संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026
  • परिसीमन विधेयक, 2026
  • केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026

इनमें से पहले दो विधेयक कानून मंत्री Arjun Ram Meghwal द्वारा पेश किए गए, जबकि तीसरा विधेयक गृह मंत्री Amit Shah ने प्रस्तुत किया।

इस सत्र का मुख्य उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करने से जुड़े संवैधानिक संशोधन को आगे बढ़ाना है। हालांकि यह कानून 2023 में पारित हो चुका है, लेकिन इसका लागू होना परिसीमन प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है, इसलिए अभी तक इसे लागू नहीं किया गया है।

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प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पंचायतों में महिलाओं को आरक्षण इसलिए दिया गया क्योंकि राजनीतिक दलों को अपने पदों का खतरा नहीं था। लेकिन अब पंचायतों से निकलकर महिलाओं में राजनीतिक जागरूकता आई है और वे निर्णय लेने की प्रक्रिया में भागीदारी चाहती हैं।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जो लोग इस कदम का विरोध करेंगे, उन्हें लंबे समय तक इसकी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए, क्योंकि इससे किसी एक दल को नहीं बल्कि पूरे देश को फायदा होगा।

प्रधानमंत्री ने “विकसित भारत” की परिभाषा बताते हुए कहा कि इसका मतलब सिर्फ आर्थिक विकास नहीं, बल्कि देश की 50% आबादी यानी महिलाओं की नीति-निर्माण में भागीदारी भी है।

वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने साफ कहा कि धर्म के आधार पर मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण देना संविधान के खिलाफ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी हालत में धर्म आधारित आरक्षण नहीं देगी।

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दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के नेता Akhilesh Yadav ने मांग की कि पहले जनगणना कराई जाए और उसके आधार पर ही परिसीमन व आरक्षण लागू किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिम और ओबीसी महिलाओं को भी इस आरक्षण में शामिल किया जाना चाहिए।

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