लोहरदगा: आगामी रथ यात्रा महोत्सव के पूर्व लोहरदगा के ऐतिहासिक ठाकुरबाड़ी मंदिर में भगवान जगन्नाथ महाप्रभु, भगवान बलभद्र एवं देवी सुभद्रा का पारंपरिक नेत्रदान उत्सव श्रद्धा, भक्ति और वैदिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना, हवन तथा भव्य भंडारे का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उत्सव में भाग लेकर भगवान के दिव्य दर्शन किए और महाप्रसाद ग्रहण किया।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार स्नान पूर्णिमा के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र एवं देवी सुभद्रा अनासर काल में विश्राम करते हैं। इस दौरान उनके नेत्रों का पुनर्निर्माण किया जाता है। रथ यात्रा से पूर्व आयोजित नेत्रदान उत्सव में भगवान को नए नेत्र प्रदान किए जाते हैं, जिसके बाद भक्तों को उनके नवयौवन स्वरूप के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होता है।

इसी परंपरा के तहत ठाकुरबाड़ी मंदिर में पुरोहितों एवं आचार्यों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान के नेत्रदान संस्कार का आयोजन किया गया। पूजा-अर्चना एवं हवन के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ से सुख, समृद्धि और लोककल्याण की कामना की। मंदिर परिसर “जय जगन्नाथ” के उद्घोष से गूंजता रहा और भक्तिभाव का अद्भुत वातावरण बना रहा।

धार्मिक अनुष्ठान के पश्चात मंदिर प्रांगण में भव्य भंडारे का आयोजन किया गया। सबसे पहले ब्राह्मणों को सम्मानपूर्वक भोजन कराया गया, तत्पश्चात उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया। सैकड़ों भक्तों ने महाप्रसाद ग्रहण कर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया।

मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि रथ यात्रा को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मंदिर एवं रथ को आकर्षक ढंग से सजाया गया है तथा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। उन्होंने बताया कि कल भगवान जगन्नाथ, बलभद्र एवं देवी सुभद्रा की भव्य रथ यात्रा निकाली जाएगी, जिसमें नगर सहित आसपास के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

रथ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। लोग बड़ी संख्या में ठाकुरबाड़ी मंदिर पहुंचकर भगवान के नवयौवन दर्शन कर रहे हैं और रथ यात्रा में शामिल होने की तैयारियों में जुटे हैं। धार्मिक मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ के रथ को खींचने और उनके दर्शन करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है तथा जीवन में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है।

इस अवसर पर मंदिर समिति के सदस्य, पुजारीगण, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। नेत्रदान उत्सव के साथ ही लोहरदगा में रथ यात्रा महोत्सव की आध्यात्मिक छटा और अधिक बढ़ गई है।


